Tuesday, December 30, 2014

लक्ष्य प्राप्ति हेतु

जो मानव भूख से त्रस्तहोने पर भी
सुमार्गों पर सदैव प्रसस्त रहते हैं
उनके मार्ग में आये हुए पर्वत भी
मार्ग उनके लिए स्वयं छोड़ देते हैं ,
सांसारिक व्यक्तियों को दृष्टांत देने हेतुं
भिक्षुक बन देशाटन करते रहते हैं
जो पदार्थ जैसा भी जहां भी मिला
 नियति मान ,क्षुधा शांत कर लेते हैं ,
 अनगिनत अवरोध विरोधावास होते भी
परिवर्तन लाने में पूर्णत सफल होते हैं
और एक दिन विरोध करने वाले भी
उन्हें ईश,महात्मा,गुरु और देव कहते हैं |

Thursday, December 18, 2014

पाक से मृत बच्चों के अभिभावक

इतने जख्म दिए है तुमने कि
मलहम के फाये भी कम पड़ जायेंगे
आज अपनों का शहीदी दिवस मना रहे जो
कल तुम्हारा भी मातम वो ही जरूर  मनाएंगे |
बकरों कि माएं आखिर कब तक खैर मनाएंगी
शहीदों कि माएं  तुम्हारे गले पर छुरियाँ चलाएंगी
फिर तुम्हारा नामो निशाँ इस जहां में नहीं बचेगा
नाही कोई अश्क बहायेगा तुम्हारे लिए नाही मातम मानेगा |

Wednesday, December 17, 2014

मलानत

जिन बच्चों को मारा तुमने
वो सब निरीह और निराकार थे ,
वो खुद ,खुदा के आकार थे
उनमे कितने ही मुहम्मद जब्बार थे ,
सभी भविष्य में पाक धरोहर
और अब्बु ,अम्मी का दुलार थे ,
तुमने क्योँ मारा उनको तालिबानी
क्या यही है तुम्हारी शेर दिल कहानी,

Saturday, December 6, 2014

हम शिकवे शिकायत क्योँ करें तुम  से
जब तुमने जिंदगी से ही जुदा कर दिया है
मैंने गजलें लिख लिख भेजी थी तुमको पर
 तुमने अब तक खतो किताबत ना किया है
मेरा कसूर क्या था जानेमन ,हुस्ने बहार 
मैंने तो माशूका समझकर बस इश्क़ किया है
आज तक  खुद  को फरहाद समझता रहा
और तुमको इबादत से शीरी खिताब दिया है ,

Tuesday, December 2, 2014

इश्क़

जिंदगी को खुशनुमा बनाना है तो 
किसी से भी इश्क़ जरूर कीजिये ,
क्योँकि इश्क़ और मुश्क कभी नहीं छिपता 
इसलिए छिपाने की  कोशिश मत कीजिये,
चाहे कितनी ही मुश्किलें आये रास्ते में 
एक दुसरे से बेवफाई कभी ना कीजिये ,
ताजिंदगी एक दूजे को कभी न छोड़िये 
मौत भी कभी आ जाए तो गले लगा लीजिये  |

Monday, November 24, 2014

दिल्ली कि जनता से एक अपील

दिल्ली की जनता और ंसंपूर्ण मतदाताओं से मेरी प्रार्थना है कि फ़रवरी में जो विधान सभा के चुनाव होने जा रहे हैं उनमे आम आदमी पार्टी को बहुमत दिलाकर अरविन्द केजरीवाल जी को एक बार फिर दिल्ली का मुख्य मंत्री बनायें ताकि उनकी अग्नि परिक्षा भी ली जा सके ,कि वो अपने वायदों पर कितना खरा उतरते हैं ,
क्योँकि आज हमारे देश को आजाद हुए लगभग ६६ वर्ष बीत चुके हैं पर कोई भी नेता अपने आपको ईमानदार ,भ्र्ष्टाचार रहित प्रशासन ,अथवा महंगाई पर लगाम लगाने वाला सिद्ध नहीं कर सका ,और नाही कभी कोई भी नेता अपने आपको पूर्णत:देश भक्त या जनता का सेवक घोषित करने के लिए आगे आया ,
इतने वर्षों के पश्चात महा ईमानदार ,देश भक्त ,जनता का सेवक और अच्छी सोच रखने वाला ,देश और जनता का हित सोचने वाला एक नेता अरविंद केजरीवाल मुश्किल से देशवासियों या दिल्ली वालों को मिला है और यदि आपने इस नेता को पूरा मौका या कोई उच्च पद देकर सुशोभित नहीं किया तो उसका दिल टूट जाएगा और यदि वो इस बार पूर्ण समर्थन नहीं मिला और उसने राजनीति छोड़ दी तो भविष्य में शायद ही कोई और दूसरा ईमानदार और अच्छा नेता अगले ६५ साल में भी भारत कि जनता को मिलने वाला नहीं और फिर हम सभी देशवासियों का भविष्य अन्धकार में डूब जाएगा ,
इसलिए मेरी प्रार्थना है कि  जिस प्रकार आप सभी  ने देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को सहर्ष स्वीकारा और उनके भारत के उच्च पद पर मनोनीत करा दिया और अब आप उनकी भी अग्नि परिक्षा ले ही रहे हैं और उनकी ईमानदारी और देश भक्ति को निहार रहे हैं ,
उसी प्रकार एक बार केजरीवाल जी को भी आजमा कर देख लीजिये ,और इसमें बुरा भी कुछ नहीं है ,क्योंकि यदि कोई मिटटी का घड़ा भी खरीदता है तो उसे थोक बजाकर देखता है ,तो आप भी देखिये ,धन्यवाद

Wednesday, November 19, 2014

कर शुक्रिया

कर शुक्रिया
जब सुबह का दीदार हो
कहीं किसी ने पिछली रात
इस दुनिया को अलविदा कहा होगा ,
कर शुक्रिया
जब दीखे माँ का चेहरा
कल किसी ने अपने खुदा को खोया होगा ,
कर शुक्रिया
जब पिता ने तुझे निकम्मा कहा
जाने कितने इस मार्ग दर्शन के बिना भटक गए ,
कर शुक्रिया 
पीने को कलश भर जल मिला
कहीं एक शिशु अधूरी चाह में अग्नि समर्पित हुआ ,
कर शुक्रिया
खड़ा है तू अपने पगों पै
जाने  कितनों ने हाथों में चप्पल पहिन जिंदगी गुजारी है ,
कर शुक्रिया
तेरी किस्मत तेरे हाथों में हैं
कहीं कोई पिता अपने बच्चों  का सिर सहलाने में असक्षम है ,
कर शुक्रिया
गुनगुना लेता है तू प्रत्येक सुर को
कोई ममता लोरी सुनाने को अश्रु बहाती है ,
कर शुक्रियाज
आज  सामना नहीं हुआ मार्ग में मौत से
आज भी जाने कितनी जिंदगियां रूठी हैं अपनों की छाँव से ,
कर शुक्रिया
हर निवाले का जिसने तुझे स्वांसें बख्शी हैं
इस रोटी के वास्ते आज एक लाजो ने अपनी आबरू गवाई है |



















Monday, November 17, 2014

आस्ट्रलिया में गांधी जी की प्रतिमा के अनावरण पर आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी का भाषण

आस्ट्रेलिया में गांधी जी की मूर्ती का अनावरण करते समय हमारे प्रधानमंत्री जी ने जो भाषण दिया वो आप सभी ने सूना भी होगा ,शायद आप में से किसी को एक त्रुटि जो  बार बार अपनायी जा रही थी नजर ना आई ,परन्तु मुझे वो त्रुटि बहुत ही आखर रही थी और वो त्रुटि थी बार बार महात्मा गांधी जी के नाम का सम्बोधन जो की मोदी साहब के द्वारा किया जा रहा था ",उन्होंने गांधी जी बोलने से पहले या बाद में लगाया हो जैसे की महात्मा गांधी या गांधी जी "वो बार बार मात्र" गांधी "ही कहकर सम्बोधित कर रहे थे जैसे की गांधी जी महात्मा गांधी ना होकर मोदी साहब का कोई लंगोटिया यार हो, या उनका कोई अपना बच्चा हो, या कोई ऐरा गेरा नत्थू खेरा हो ,या कोई आम भारतीय हो ,जिस व्यक्ति ने देश को आजाद कराने के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन आहूत कर दिया हो ,और फिर आजाद होने के बाद भी देश से कुछ नहीं चाहा हो और अंत में नाथूराम गोडसे की गोली का शिकार होकर स्वर्ग सिधार गया हो और वो गोडसे भी किसको बिलोंग करता था ये मोदी साहब को बताने जरूरत नहीं है क्योँकि वो बाखूबी जानते हैं और आजादी के परवान चढ़ने के कारण ही आज मोदी जी देश के प्रधानमंत्री बन संसार में घूम घूमकर मजे ले रहे हैं और प्रसिद्धि पा रहे हैं किसके कारन ,स्वर्गीय गांधी जी के कारण से ही ,क्योँकि न तो देश को मोदी जी ने आजाद कराया और नहीं आर एस एस या भारतीय जनता पार्टी ने ,क्या उस महात्मा के लिए आदरणीय ,महात्मा या जी ,अथवा स्वर्गीय जैसे दो शब्द भी उनके पास नहीं थे क्या भारत  की ये ही संस्कृति है ,इससे साफ़ होतां है की मोदी जी के ह्रदय में गांधी जी के लिए कोई मान सम्मान नहीं हैं वो तो उनके नाम की माला रटकर जनता को दिखाते हुए अपनी रोटियां सेंक रहे हैं ,और ऊपर से सवा सौ करोड़ भारतियों की बेइज्जती भी कर रहे हैं क़ि "यह कहकर क़ि भारत में लोग कहते हैं क़ि मोदी जी जबसे प्रधानमंत्री बने हैं तो गांधी जी क़ि माला भज रहे हैं "यद्द्य्पी गांधी जी के प्रति उनके ह्रदय में कितना सम्मान है वो तो उनकी भाषा ही से गांधी गांधी कहकर झलकता दिखाई देता है ,दुसरे देश में जाकर अपने देश वासीयियों क़ि बुराई करना एक बड़े देश के पी एम को शोभा नहीं देता ,और बाहर वालों पर भी इसका क्या प्रभाव पड़ा होगा |

Sunday, November 16, 2014

मेरी कहानी असत्य पर आधारित

मेरी पहली शादी जब में १५ साल का था एक गाँव की लड़की से हो गई थी ,तब में कुछ भी नहीं था मेरी हालत ठीक एक कुत्ते जैसी थी क्योंकि सुबह और शाम की रोटी के लिए घर वालों के ऊपर ही निर्भर था जैसे की बेचारा एक कुत्ता पेट भरने के लिए किसी के भी घर की और देखता है मेरे मना करने के बावजूद भी घरवालों ने जबरदस्ती  मेरी शादी कर दी थी ,मैं तब १० वि कक्षा में पढता था ,उसके बाद १२ वि पास की और फिर बी ऐ पास किया और दिल्ली आ गया ,यहां आकर बहुत संघर्ष किया और मैं एक बड़ा आदमी बन गया ,जब मेरे पास अच्छा उद्योग और पैसा ,मोटर गाडी हो गई तो मैं पहली पत्नी को भूल गया और अब वो मुझे अपने स्टेंडर्ड से नीचे की लगने लगी इसलिए मैंने फिर दूसरी शादी कर ली जो अच्छी पढ़ी लिखी ,सुन्दर थी ,
खैर उस मेरी पहली पत्नी ने शादी भी नहीं की और वो मेरे नाम की ही माला आज भी भजती रहती है ,पर मैंने उसे नाही पहले और नाहीं अब यानी की कभी भी घास नहीं डाली फिर भी कभी कभी खत अवश्य भेज देती है जिसमे पति परमेश्वर कह कर सम्बोधित करती है पर मै उसकी चिट्ठी का जवाब कभी भी नहीं देता ,और ये बात किसी को बताता भी नहीं और खत पढ़कर फाड़ कर फेंक देता हूँ,पर मुझे अंदर ही अंदर कुछ ग्लानि सी होती है,
आज मेरे पास भगवान की दिया सबकुछ है अच्छा व्यापार ,मान सम्मान खूब धन दौलत ,२,चार गाड़ियां ,नौकर चाकरों की फौज चारो और से मुझे घेरे  रहती है ,मेरी नेतागीरी भी खूब चलती है मै भी खुद को प्रधान मंत्री राष्ट्रपति से काम नहीं समझता ,पर मेरे साथ सबसे बड़ी दिक्क़तये है की जब भी मेरे गाँव और आसपास के लोग मेरे क्षेत्र के लोग या जनता कहिये मुझसे मिलने आते रहते हैं ,वो मेरे सामने तो मुझे बहुत अच्छा और बड़ा आदमी कहते हैं पर जब भी आपस में बात करते हैं तो एक दुसरे को कहते हैं कि ये यानी की मैं बहुत ही कमीना ,और घटिया आदमी हूँ क्योँकि मैंने अपनी धर्मपत्नी को छोड़ रखा है और पता नहीं किस्से शादी कर राखी है ,और पता नहीं कहाँ कहाँ मुंह मारता फिरता हूँ  ,भाई ये बड़ा आदमी है अब इसे कोई क्या कहे ,और हम सबकी तो मजबूरी हैं हम कुछ कह भी नहीं सकते ,गाँव में जाता हूँ या किसी रिश्तेदारी में जाता हूँ तो सब मेरे बारे में ऐसी बाते करते हैं ,
पर मेरी सबसे बड़ी गलती है की मैंने दूसरी शादी कर ली,यदि मै दूसरी शादी नहीं करता तो शायद मुझे कोई भी कुछ नहीं कहता और दुसरे बड़े बड़े नेताओं की तरह मुझे भी भारत की जनता वैसे ही प्यार करती जैसे कि भारत के अन्य बड़े बड़े नेताओं को करती है ,
ये कहानी पूर्णत: सत्य है पर मेरी कहानी पूरी तरह असत्य पर आधारित है ,
हो सके तो अपनी राय भी मुझे भेजें कि क्या मैं वास्तव में कमीना आदमी हूँ ,या मैंने पहली पत्नी को छोड़कर कुछ गुनाह किया है ,












Wednesday, November 12, 2014

झाड़ू ,स्वच्छता अभियान और श्री नरेंद्र मोदी

केजरीवाल या  आम आदमी  पार्टी के चुनाव चिन्ह झाड़ू के करिश्मे को देखकर (४९ दिन की सरकार )इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने झाड़ू को ही गुजरात का नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारत का मॉडल बना दिया और उन्होंने झाड़ू कि इतनी प्रसिद्धि कि कि आज तक संसार में बिना पैसे खर्च किये इतना बड़ा और जबरदस्त विज्ञापन किसी भी वस्तु ,पशु  पक्षी ,या प्रोडक्ट का नहीं हुआ और शायद नाही कभी होगा उन्होंने भारत के   सबसे अमीर  घराने अम्बानी ,और अभिनेता सलमान खान ,सभी खान और अमिताभ बच्चन सहित बड़े छोटे उद्योगपतियों और जाने माने महापुरुषों और नेताओं से गली और कूंचों में झाड़ू लगवा दिया और स्वच्छता अभियान के नाम पर खूब नाम बटोरा शायद ही ऐसा नेता भी किसी देश में ही शायद पैदा हुआ हो ,पर भारत ही एक ऐसा मुल्क है जहां पर केजरीवाल जैसे ईमानदार नेता तो वहीँ प्रसिद्धि पाने वाले नेता नरेंद्र मोदी जी जैसी हस्तियां समय समय पर जन्म लेती रहती हैं |
वैसे स्वछता अभियान चलाने से जो जनता नहीं जानती थी कि झाड़ू किसका चुनाव चिन्ह है और केजरीवाल कौन है वो भी अच्छी तरह से जान गए ,और इसका फायदा सबसे ज्यादा केजरीवाल को ही होगा ,इतने बड़े विज्ञापन से अब दिल्ली में केजरीवाल कि सरकार बन्नी तय हो चुकी है जिसके लिए मोदी जी बधाई के पात्र हैं

एक महापुरुष की जीवनी

हलों के बीच में से हल कैसे निकाला जाता है ,
जल्तों के बीच से बिना जले कैसे निकला जाता है ,
कोयलों की दलाली में हाथ काले होने से पहले कैसे निकला जाता है ,
लज्जावानों को लज्जा हीन बना निर्लज्ज कैसे बनाया जाता है,
बहुत से वायदे करने के बाद वायदों से कैसे मुकरा जाता है ,
जनता को बेवकूफ बनाकर उच्च पद पर कैसे पहुंचा जाता है ,
उच्च पद पर पहुँचने के बाद जनसेवक का पद कैसे पाया जाता है,
और जन सेवक बनने के बाद झाड़ू कैसे लगाया जाता है ,
बच्चों को वातसल्य देकर नेहरू जैसा नेता कैसे बना जाता है ,
नित नै नै पोशाकें पहिनकर जनता को किस प्रकार लुभाया जाता है ,
बड़ी बड़ी बातें कर कर के विपक्षियों को कैसे मिटाया जाता है ,
पांच माह के शासन काल में पांच पांच बार विदेशों में कैसे जाया जाता है ,
बिना विश्वास मत प्राप्त किये किसी प्रदेश का मुख्य मंत्री कैसे बनाया जाता है ,
बड़े बड़े शूरमाओं को धता बताकर बाहर का रास्ता कैसे दिखाया जाता है ,

Tuesday, November 11, 2014

वोट का अधिकार

हमारे देश की जनता के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है जिसे वो अपना कह सके ,जैसे की प्रॉपर्टी का अधिकार भी नहीं है जोकि आपने अपनी खून पसीने की गाढ़ी कमाई से बनाई है ,वो भी हमारे देश की ही धरोहर है ,इसी प्रकार हमारा शरीर भी हमारा नहीं है वो भी सरकार की प्रॉपर्टी है ,क्योँकि आपको आत्महत्या तक करने का अधिकार नहीं है यदि आपने किसी भी कारण से दुखी होकर आत्महत्या करने की कोशिश की और किसी कारण आप नहीं मरे तो आपको बचने की हालत में सीधा जेल जाना पडेगा , 
यदि हमारे पास है तो वो है मात्र विचारों की स्वतंत्रता और दूसरा अधिकार हमारे पास है जिसे हम अभी तक अपना अधिकार कह सकते हैं और वो है वोट देने का अधिकार ,उसमे हम किसी को भी वोट करें ,या ना करें ,करें भी तो किसी को भी करें ,परन्तु अभी ज्ञात हुआ है की हमारे आदरणीय प्रधान मंत्री जी उसे भी छीनने जा रहे है यानी की वो कहते हैं की वोट डालने के लिए सभी को जाना पडेगा और वोट करना भी पडेगा और जो नहीं वोट देने जाएगा उसे कोई न कोई सजा अवश्य दी जायेगी अभी सजा का प्रावधान नहीं हुआ है की वो किसप्रकार की सजा होगी ,जुर्माना या जेल वो अभी निश्चित  नहीं किया गया है ,यद्द्य्पी वो ये कानून गुजरात में पास भी कर चुके हैं पर अभी सजा का प्रावधान नहीं किया है ,
खैर मेरा कहने का तातपर्य ये है की जो कानून हमारा है और उसे प्रयोग में लाएं या ना लाएं हम किसी को वोट दें या ना दें उसको भी भी क्योँ हमसे छीनने का प्रयास किया जा रहा है |क्या ये हमारी स्वतंत्रता का हनन नहीं है इसलिए हमारी मोदी जी से प्रार्थना है की वो इस नियम को पास ना करें |

Sunday, November 9, 2014

देश किसके हाथों में जा रहा है

क्या आप जानते हैं कि देश धीरे धीरे किसके हाथों में जा रहा है ,और किसका सैंकड़ों वर्ष पुराना सपना सच होने जा रहा है ,शायद नाही आप जानते हैं और नाहीं आपने कभी इस बारे में सोचा है ,तो हम आपको बताते हैं आज हमारा देश धीरे धीरे राष्ट्रिय सेवक संघ के हाथों में जा रहा है और उन्ही का बरसों पुराना सपना सच भी होता जा रहा है ,देखिये किस प्रकार आज ..........................
प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी जी आज देश के सर्वे सर्वा हैं जो कि आर एस एस के पैदाइशी सदस्य और कर्मठ कार्य करता भी हैं 
और हरयाणा के मुख्य मंत्री भी आर एस एस के पैदायशी सदस्य हैं ,
महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री भी आर एस एस के पैदायशी सदस्य हैं ,और 
अभी अभी गोवा के मुख्य मंत्री भी आर एस एस के पैदायशी सदस्य हैं ,
और आगे भी जिस प्रदेश में भाजपा कि सरकार बनेगी वहाँ पर भी अब आर एस एस के ही मुख्य मंत्री बनेंगे ऐसा ही प्रावधान भाजपा पास कर चुकी है |
और इससे पहले भी जिन प्रदेशों में भाजपा कि सरकार हैं वहाँ भी sabhi मुख्य मंत्री आर एस एस के ही पैदायशी सदस्य हैं ,भाजपा तो मात्र नाम मात्र के लिए है 
अब वैसे भी भाजपा भाजपा ना रहकर आर एस एस पार्टी बन चुकी है ,अब इसका फैसला तो भविष्य ही करेगा कि ये भारतीय जनता पार्टी या इनका उपनाम आर एस एस देश के लिए कितना हितकर होगा

Saturday, November 8, 2014

खुदा जाने उनके कमल रुपी मूक मुख से
प्रेम के शब्द ,गुलाब पुष्प जैसे कब झरेंगे ,
पर हम भी बेताब हैं वो शब्द सुनने के लिए
जिंदगी के अंत तक भी हम इन्तजार करेंगे

Tuesday, November 4, 2014

ज्यादा लाइक पाने और प्रसिद्धि हेतु फेस बुक पर कुछ टिप्स

जी हाँ यदि आप फेस बुक पर प्रसिद्धि और अधिक लाइक लेना  चाहते हैं तो आप निम्नलिखित टिप्स अपनाएँ
१ आप गंदे गंदे जोक्स लिखें ,
२ बिना मतलब के शेर लिखें ,
३ कोई भी हसीं चित्र लगाकर उस पर शेर लिखे
४ हसीना के कपडे अस्त व्यस्त हों
५ और उलटी सीधी लेटी किसी नायिका का चित्र लगाएं ,यदि कुछ नग्न अवस्था में हो तो सोने पे सुहागा ,
६ जो नेता ज्यादा प्रसिद्ध हो उसको और प्रसिद्ध करें ,
७ यदि महिला मित्र हैं तो वो भी अपने अच्छे और सुन्दर चित्र लगाएं ,जैसे तिनकी जैन जी लगाती हैं ,
८सेक्स  को लेकर वार्तालाप करें ,
९ सेक्सी चित्र लगाएं  घटिया घटिया सी जो देखने में कविता लिखें,
१० घटिया घटिया सी कवितायें लिखे यानी कि अच्छी कविता कभी ना लिखें 



 ,

Monday, November 3, 2014

मोदी जी अपने किये हुए वायदे पूरे करें

मुझे तो कुछ ऐसा लगता है की हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी नए नए काम करके जैसे की विदेशों की यात्रा ,उनसे अच्छे संबंध बनाकर दिखाना ,और ३ महीने में ही अमेरिका ,जापान ,भूटान ,नेपाल की यात्रा करना ,गंगा की सफाई कराना ,स्वच्छता अभियान चलाना ,हर महीने रेडियो पर जनता से मन की बात करना,सांसद और विधायकों को गावों का गॉड दिलवाना , देश के स्कूलों के बच्चों से वार्तालाप करना ,कोंग्रेसियों के पीछे पड़ना ,जम्मू जाकर दिवाली सेलिब्रेट करना ,उद्योगपति मुकेश अम्बानी की पत्नी का जन्मदिन बनारस में जाकर मनवाना ,काला धन काला धन का मात्र शोर मचाना ,पटेल साहब की स्टेच्यू को २००  मीटर,ऊंची बनवाना और उसपर लगभग ३०००करोद
 रुपया खर्च करना , सोनिया जी के दामाद वढेरा को बार बार सम्बोधित करना ,औरआगे गांधी जी की स्टेच्यू बनवाने के लिए भी जनता को प्रेरित करना क्योँकि अकेले पटेल साहब की स्टेच्यू गुजरात में कड़ी बहुत ज्या शोभा नहीं देगी जब तक गांधी जी की स्टेच्यू उनके साथ ना हो क्योँकि गंदी और पटेल दोनों एक जान और जिस्म दो थे इतनी गाढ़ी मित्रता थी दोनों में ,वैसे भी दोनों गुजराती ही थे ,यद्द्य्पी दोनों ने देश को आजादी दिलवाने अथक सहयोग दिया था ,इसके अलावा और  भी बहुत से काम करके जनता को जो मुख्य मुद्दे है उनसे भटकाने का काम कर रहे हैं
हमारी आदरणीय मोदी जी से करवद्ध प्रार्थना है कि वो अयोध्या में राम मंदिर बनवाएं  ,जम्मू कश्मीर में धारा ३७० समाप्त कराएं ,गौ हत्या बंद करवाएं ,पूर्ण लोकपाल बिल पास कराएं ,विदेशों से काला धन जल्दी से जल्दी वापस लाएं ,और महंगाई को दूर भगवाएँ ,और गरीबों को गरीबी से निजात दिलवाएं ,जय हिन्द |

Sunday, November 2, 2014

श्वान और इंसान में अंतर

अपने घर के मुख्य द्वार से निकलते ही 
सम्मुख गली का श्वान नजर आता है 
यद्यपि वो हमारा आज भी पालतू नहीं है
फिर भी मुझे  देखते ही पूँछ हिलाता है ,
जानते हो वो ऐसा क्योँ करता है
और क्यों नृत्य करके दिखाता है
क्योँकि प्रात:और संध्या के वक्त
मात्र दूध और,कुछ रोटियां खाता है ,
वफादारी के नाम पर घर के बाहर बैठ
चौकीदारी का फर्ज पूरी तरह निभाता है
यदि कोई  उच्च स्वर में हमसे बात भी करे
तो उसे सबक सिखाने हेतु तैयार हो जाता है ,
दूसरी और कोई भी भाई बंधु रिश्तेदार
जब मेहमान बन  कर हमारे घर आता है
तब हम  उसकी आव भगत बहुत करते हैं
फिर भी भविष्य में बेवफाई करके दिखाता है |

Wednesday, October 29, 2014

लोकोक्तियाँ

पवित्रं आत्मा कभी भी अपवित्रता का ग्रहण नहीं करती ,चाहे परिणाम कुछ भी क्योँ न हो ,
"प्रारब्ध" सदैव हमारे पीछे पीछे भागता है और" भाग्य" हमारे से दो कोस दूर होकर चलता है और'" होनी" सदैव हमारे साथ साथ चलती है ,
मृत्यु हमेशा हमारे साथ साथ चलती है और इस ताल में रहती है कि हमसे चूक हो और वो हमको अपनी गोड में ले ले |

Tuesday, October 28, 2014

स्वर्गीय दार्शनिक नीत्शे के विचार

स्वर्गीय नीत्शे (१८४४-१९००)एक जर्मनी दार्शनिक और क्रांतिकारी विचार वाले एक दार्शनिक थे जो अपने विवादात्मक विचारों के लिए जाने जाते थे और उनका सबसे अधिक विवादात्मक विचार "ईश्वर मर चुका है "ने उस समय में संसार में खलबली मचा दी थी |
नीत्शे के कुछ विचार प्रस्तुत हैं ,
आस्था क्या है ,सत्य ना जानने की इच्छा|
ईश्वर एक विचार है जो प्रत्येक सीधी साधी चीज को  जटिल चीज में तब्दील कर देता है |
मैं ईश्वर में विश्वास नहीं कर सकता" वो हर वक्त अपनी तारीफ़ सुनना चाहता है ,यही चाहता है की दुनिया भर कहे कि ईश्वर तुम  कितने  महान हो "|
क्यां इंसान ईश्वर कि सबसे बड़ी गलतियों में से एक है या फिर ईश्वर ही इंसान कि सबसे बड़ी गलती है |
डर नैतिकता कि माँ है इंसान नैतिक रहता है क्योँकि वो डरता है|
सम्पूर्ण समझदारी ,सत्य के सभी सबूत अपनी खुद कि सोचने परखने की क्षमता से हासिल होते हैं |
ओहो ये ओरतें ",ये ऊंचे इंसान को और भी ऊंचा बना देती हैं और नीचे को और भी नीचे गिरा देती हैं |"
दुनिया के सभी महान विचार टहलने के दौरान लोगों के दिमाग में आये हैं |
हमको हर उस दिन को बेकार हुआ मानने चाहिए ,जिस दिन हम एक बार भी ख़ुशी से नहीं थिरके या किसी दुसरे के चेहरे पर मुस्कान ना फैलाई |
शैतान से लड़ते समय सावधानी इस बात कि रखनी चाहिए कि कहीं" हम ही तो शैतान नहीं बनते जा रहे हैं "




Saturday, October 25, 2014

मनहूस जिंदगी

हम कब तक अव्यवस्थित जिंदगी को जीते रहेंगे
जीवित रहते हुए भी लाश की भांति ढोते रहेंगे
अपनों को दिए सुखों के बदले उनके दिए दुखों को
अपना अहोभाग्य समझकर ही झेलते रहेंगे ,
दिन रात ,उठते ,बैठते ,सोते जागते ,खाते पीते
नाशुक्रे भाई बंधु ,रिश्तेदारों का मनन करते रहेंगे
अन्तोगत्वा भाईचारा ,ममता ,वातसल्य ,प्रेम
जीवन भर उन सभी को अर्पण करते रहेंगे |


Thursday, October 23, 2014

दीपावली पर्व

अमावस की तिमिर युक्त रजनी को
मिटटी के दीपों ने पूनम बना दिया
अपने अंदर का तेल बत्तियों को पिला
उनका मुख अग्नि से जला दिया ,
उनसे जाज्वलित होते प्रकाश  ने
शशि को भी आइना दिखा दिया
उसको इतना विचलित कर दिया
कि उसने अपना मुखड़ा छिपा लिया,
युगीय परम्परा को चिरस्म्रत कर 
देवी देवो  को भी विस्मित कर दिया
जनमानस  को भी खुशिया देकर 
दिवाली नाम से नामकरण कर दिया ,
अब दिवाली पर सब खुशियाँ मनाते हैं
कहते हैं दुश्मन भी मित्र बन जाते हैं
एक दुसरे को मिष्ठान अर्पण करके
आलिंगनबद्ध हो दुश्मनी को भूल जाते हैं |

दीपावली की शुभकामनाएं

दीपावली के पावन पर्व पर प्रज्ज्वलित दीप पंक्तियाँ ,और मोमबत्तियों ,बिजली चलित यंत्रों का जाज्वलित प्रकाश ,सभी फेसबुक मित्रों को  नौकरी में प्रमोशन ,व्यापार  में वृद्धि ह्रदय में अनुराग ,समाज में सोहार्द्य ,राष्ट्र की गरिमा में वृद्धि ,और विश्व में शान्ति स्थापित करें |

Thursday, October 16, 2014

सद्कर्म करने में बुरा क्या है

अपने  जीवन को हम गिरवी रखकर भी किसी की सेवा कर सकें तो उसमे बुरा क्या है ,
यदि अपना धन खर्च करके किसी की भूख मिटा सकें तो उसमे बुरा क्या है ,
यदि अपना खून पिलाकर किसी की प्यास बुझा सकें तो उसमे बुरा क्या है ,
यदि अपनी जिंदगी को दाव पर लगाकर डूबते को बचा सकें तो उसमे बुरा क्या है ,
यदि अपने मान सम्मान को मिटाकर भी किसी को चरित्रहीन होने से बचा लें तो उसमे बुरा क्या है
अपनी चर्म की जूतियां बनाकर भी अपने माता पिता को पहिना दें तो उसमे बुरा क्या है ,
यदि अपने आपको भुलाकर भी मित्रता को बचा लें तो उसमे बुरा क्या है ,
यदि हम अपने ह्रदय को बड़ा करके सम्पूर्ण संसार को उसमे बसा लें तो उसमे बुरा क्या है
क्योँ ना  हम लोकतंत्र को बचाने के लिए गुंडे मवाली ,भ्र्ष्टाचारी असत्य भाषी नेताओं को अपने अधिकार (वोट )से वंचित रखें |

Monday, October 13, 2014

बीफ का निर्यात

हमारी सरकार जिन बूढी गाय माताओं और बूढ़े बैल बाबाओं को काट काट कर उनका मांस निर्यात कर रही है और करोड़ों डॉलर कमा रही है ये कोई बहुत ज्यादा नहीं है ,यदि इन मरने वाली गाय माताओं और बैल बाबाओं का गोबर जो ये प्रितिदिन घास फूस खाकर बनाते हैं ,यदि उसकी कम्पोस्ट खाद बनाकर भी निर्यात किया जाए ,अथवा अपनी कृषि योग्य खेती में ही उपयोग में लाया जाए तो ,मांस निर्यात से ज्यादा करोड़ों की कमाई हो सकती है ,,और ऐसा भारत भर में सदियों से होता चला आया है और जमीन से इन्हीं की खाद के बल पर ना जाने कितना पैसा और अन्न पैदा करते रहे हैं ,
पर हमारी सरकारों को तो बिना हाथ हिलाये ही करोड़ों रुपया चाहिए फिर चाहे कितने  ही निरीह पशु क्योँ ना मारे जाएँ उनके लिए तो भैंस और गाय या बैलों में कोई अंतर नजर नहीं आता ,परन्तु मेरे विचारों में जो हिन्दू होकर भी गाय को गौमाता और बैल को बैल बाबा नहीं मानता वो वास्तव में हिन्दू ही नहीं है या हिन्दुओं के नाम पर कलंक है ,
भाइयो मुझे तो ऐसा लगता है जैसे की जो गाय या बैल काट काट कर भेजे जा रहे हैं ये हमारी माताएं और पापा जी ही हैं ,
अत:मेरी इस सरकार से ये प्रार्थना है की कम से कम इन बेचारे बूढ़े गाय और बैलों को काट काट कर इनका मांस तो निर्यात ना करें |

Saturday, October 11, 2014

करवा चौथ पर्व

आज सभी हिन्दू विवाहित नारियों ने
सौंदर्य प्रसाधन  सामग्री का उपयोग कर
स्वयं को अति सुंदरी प्रदर्शित करने हेतु
अथक प्रयत्न और प्रयास किया होगा ,
फिर निर्जल रहकर निमग्न भावों से
करवा चौथ का व्रत पूर्ण दिन रखा होगा
अपने पति की दीर्घायु की कामना कर
सात जन्म तक एकत्व का प्रणलिया होगा ,
रात्रि  को मिष्ठान ,पकवानो से थाल सजा
चद्रमा का दर्शन पति के साथ किया होगा
फिर शशि और पति का मिलान करके
दोनों को एक ही जैसा स्वरूप दिया होगा ,
फिर दोनों ने मिलकर मिष्ठान और पकवान
चन्द्रमा देवता को सप्रेम अर्पण किया होगा
फिर सावित्री जैसे पत्नी ने नतमस्तक हो
अपने प्राण नाथ के चरणों को छुआ होगा |

Wednesday, October 8, 2014

मेरे देश कि जनता

पशु, पक्षी ,परिंदे ,और सभी प्रकार के जानवर तक भी जानते हैं कि यदि कोई व्यक्ति उनको उनकी ही बोली बोलकर सुनाता है या उनके सम्मुख किसी प्रकार का नाटक करके दिखाता है या  उनको किसी भी प्रकार से लुभाता है या लालच देता है अथवा किसी भी प्रकार का स्वांग रचता है तो वो उस व्यक्ति के सम्पर्क में आना तो छोडो उससे दूर ही भागते हैं नाही उसको अपना समझते हैं परन्तु वाह रे मेरे  हिन्दुस्तान कि जनता तुम कितनी भोली भाली और निश्छल ,और समझदार हो कि आपके पास कोई भी व्यक्ति या नेता आपके पास आकर सुहाने सपने दिखाता है ,या किसी भी प्रकार का लालच देता है ,तुमसे अपनत्व जताता है तुम्हारी बोली बोलकर दिखाता है ,आपसे गले मिल लेता है ,हाथ मिला लेता है और दूसरी पार्टियों के नेताओं या व्यक्तियों कि कमी गिनाता है या बुराई करता है ,प्रितिदिन नए नए खद्दर के अच्छे कपडे पहिनकर दिखाता है ,या खुद को गांधी ,नेहरू ,पटेल का शिष्य बताता है या खुद को बहुत छोटा व्यक्ति बताकर आपको इमोशनली प्रभावित करता है तो आप उसको अपना नेता ,भाई ,मित्र मान लेते हैं और अपने वोट के अधिकार को सम्पूर्ण तन मन धन तक को उसके हवाले कर देते हो ,और जब बाद  में आपको धोखा मिलता है तो फिर खुद को कोसते हैं या उस व्यक्ति ,नेता को गाली देते हो और ये ही रवैया पिछले ६७ साल से चला आ रहा है उसमे कोई सुधार नहीं हुआ और नाही आता नजर आ रहा है चलो सबका भगवान भला करेंगे जनता का भी और देश का भी ,वैसे अभी भी वक्त है |

Friday, September 19, 2014

अब न्याय पालिका के न्यायाधीश भी बदसलूकी में आरोपित

अभी तक तो हमारे देश की पोलिश ही बदनाम थी और एक मुहावरा बन चुका है की जब "रक्षक ही भक्षक " हों तो क्या किया जाए ,अब तक जितने भी बलात्कार काण्ड ,छेड़खानी के मामले या नारी जाती पर एब्यूजिंग होती थी तो हर व्यक्ति का ध्यान जाता था कि ये ऐसा करने वाले गुंडे ,मवाली या बदमाश ही होंगे पर फिर पता चला कि ऐसे कामों में पुलिश वाले भी शामिल होने लगे हैं तो आम आदमी का सर शर्म से झुक जाता था पर पिछले कुछ दिनों से समाचार पत्र ,रेडिओ ,टी वि चैनल सभी पर सुनाई देता है कि पहले एक सुप्रीम कोर्ट के जज घेरे में आये जो जजों के शिक्षा देते वक्त एक जज लड़की से बदतमीजी कर बैठे ,वो अभी ठंडा न्नहीं हुआ था कि अभी अभी सुप्रीम कोर्ट के नए बनने वाले जज दत्तू साहब पर भी एक वकील और रॉ कि अधिकारी ने दावा ठोक दिया कि उन्होंने उसके साथ जो किया वो ठीक नहीं था तो दत्तू साहब सुप्रीम कोर्ट के जज बनने के काबिल नहीं है फिर अलाहाबाद में ११ प्रिशिक्षु जजों ने एक साथी जज लड़की के साथ बदतमीजी कि ,ऐसी घटनाएं प्रितिदिन हो रहीं हैं ,जिसके कारण भारत और सभी भारतवासियों का सर शर्म से चुल्लू भर पानी में डूब चुका है ,
अब ज़रा सोचिये कि यदि देश कि पुलिश और जज दोनों ही एक जैसे और बलात्कारियों कि श्रेणी में आ जाएंगे तो फिर जिनके साथ बलात्कार होता है तो उनको न्याय कैसे मिलेगा और जिस देश में न्याय व्यवस्था ही फेल हो जायेगी तो वहाँ लोकतंत्र कैसे जीवित रहेगा ,जबकि हमारे देश कि सभी व्यवस्थाएं ही कुछ अजीब गरीब तरह से चल रही हैं ,

चीन के राष्ट्रपति की मेजबानी पर तफसरा

क्या मेरे देशवासियों को ऐसा नहीं लगा की हमारे प्रिय प्रधानमंत्री  मोदी जी ने ,चीन के राष्ट्रपति की मेजबानी में कुछ ज्यादा ही पैर  पावड़े बिछा  रखे थे की वो गांधी जी की प्रतिमा पर  साबरमती आश्रम में पुष्प चढ़ाते समय अपनी चप्पल्स भी निकालनी भूल गए .दुसरे ये भी देखना गवारा नहीं किया कि जिस व्यक्ति को आप गुजराती षटरस भोजन परोस रहे हैं उसके सैनिक हमारी सीमा को कितने अंदर तक प्रवेश का गए हैं ,लगता है उनका ५६ इंच का सीना सिकुड़ कर शायद ३६ इंच का ही रह गया है ,
और वो उसको इस प्रकार मेजबानी कर रहे हैं मानो कि वो चीन का राष्ट्रपति ना होकर मोदी जी अथवा हमारे देश का अन्नदाता ,या आश्रयदाता हो मोदी जी उसको ऐसे ऊँगली पकड़ कर घूमा रहे हैं जैसे कि वो बच्चा हो ,कभी उसे फूल तो कभी खिलौना तो कभी छतरी और कभीकभी मिटटी के शेर दिखाकर ,और वो ये भी भूल गए कि मोदी खुद भी भारत जैसे देश के प्रधानमंत्री भी हैं ,ना कि कोई मामूली आदमी  |
और उसके बावजूद भी मुझे तो चीनी राष्ट्रपति के मुख पर कोई ख़ास शिकन नजर नहीं आई और नाही उन्होंने अपनी मुस्कराहट बिखेरीं ,मुझे तो लगता है चीनी अपने देश कि खातिर कुछ भी कर लेते हैं पर मैफिर भी  कहूँगा कि दुश्मन ,तो दुश्मन ही होता है ,और वो भी चीनियों जैसा ये लोग दोस्ती को भूल जाते हैं पर अपना साम्राज्य बढ़ाने के लिए दुश्मनी को नहीं भूलते ,चीन विस्तारवादी देश है और वो भारत तो  क्या किसी भी पडोसी देश का मित्र नहीं हो सकता ,ये बात तिब्बतियन भली भांति जानते हैं ,जानते तो हम भी हैं पर हम ज़रा अधिक ही शांतिप्रिय हैं ,हम अपनी जान ही नहीं सबकुछ दे सकते हैं पर शान्ति अवश्य खरीदते हैं ,चीन कि निगाहें आजकल नेपाल ,पाकिस्तान ,और ंहमारे अरुणाचल प्रदेश पर भी है ,इसलिए मोदी जी ज़रा संभल के ये रास्ते बहुत ही कटीले हैं |

Wednesday, September 17, 2014

हकीकत

किसी नवयौवना को देखकर
सत्तर साल के बुड्ढे की
राल टपकने  लगती है
साठ साल के बुड्ढे का
दिल धड़कने लगता है
चालीस साल का व्यक्ति
मिलने को आतुर होने लगता है
पच्चीस साल का युवक
रास्ता छोड़,दूसरी और चलने लगता है ,

Monday, September 15, 2014

जुबान का रास ( वाणी की मिठास )

एक साधारण व्यक्ति बियाबान जंगल से गुजर रहा था दूर दूर तक कुछ दिखाई नहीं दे रहा था ,भूख के कारण उसकी जान निकली जा रही थी ,थककर चूर हो चुका था अचानक उसको दूर एक झोपडी चमकी और वो व्यक्ति उस झोपडी की तरफ चल दिया वहाँ जाकर देखा तो वहां पर बुढ़िया कुछ पका रही थी ,उसने बुढ़िया को बड़े ही प्यार से दुआ सलाम किया और एक लोटा पानी माँगा ,तो उसने पानी दिया जिसे पीकर उसने अपनी प्यास बुझाई और फिर कहा हे माँ मुझे भूख बहुत जोर से लग रही है ,क्या पका रही हो ,बुढ़िया ने बहुत ही प्यार से कहा बेटा खिचड़ी पका रही हूँ अभी खाकर अपनी भूख मिटा लेना दोनों माँ बेटे साथ साथ खाएंगे ,
थोड़ी देर बाद वो व्यक्ति बुढ़िया से बोला हे माँ तुम इस बियाबान जंगल में इस घास फूस की झोपडी में रहती हो यदि रात्रि में आंधी ,तूफ़ान आ जाएँ और खूब  बरसात हो जाए तो तुम्हारी ये झोपडी तो उड़ जायेगी या टूट फुट कर बह जायेगी तो फिर तुम क्या करोगी ,तब तक खिचड़ी भी पाक चुकी थी ,इतनी बात सुनकर बुढ़िया को इतना क्रोध आया की उसने खिचड़ी की भरी पतली उस व्यक्ति के ऊपर फेंक कर मारी जिससे की उसके सभी कपडे भी  ही खराब हो गए ,और वो भूखा प्यासा ही उसकी झोपडी से चल दिया ,
अब जो भी व्यक्ति रास्ते में उसके कपडे देखता तो उससे पूछता भाई ये क्या हो गया ,तो वो एक बात ही कहता भाई ये मेरी जुबान का रास टपक रहा है
तो भाइयो मेरी आपसे भी प्रार्थना है कि आप भी ज़रा अपनी जुबान से सोच समझकर ही बोले वरना कहीं आपका भी ऐसा ही हाल ना हो और आप हंसी के पात्र बनो |

Sunday, September 14, 2014

कभी कभी दड़बे से निकालकर मेरे हुश्न के मालिक ,
अपनी नजरे इनायत हम पर भी  कर दिया करो
हमारे आशिक़ लाइन लगाकर हमें घूरा करते हैं पर
 हम बदनसीब माशूक़  हैं जो सिर्फ तुम पर मरते हैं 
कहीं ऐसा ना हो की मुहब्बत में आग लग जाए और
कोई चील कौवा आपकी मासूका को उठा ले जाए
फिर हमें बेवफा माशूका का खिताब देने भर से
आपके दिल में बसी मुहब्बत बदनाम ना हो जाए |

Friday, September 12, 2014

मोदी जी एक ,चुनौती देने वाले अनेक

जी हाँ आदरणीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी को चुनौती देने वालों की कमी नहीं है
सर्व प्रथम सभी विपक्षी पार्टीज जिन्होंने चुनाव वाले दिन से ही मोदी जी का जीना हराम कर दिया और उनके  पीछे हाथ धोकर  ऐसे पड़ गए जैसे की किसी अनजान व्यक्ति के पीछे कुत्ते भोंक भोंक कर पीछे पड़ जाते हैं  ,
उसके बाद उन्ही की पार्टी के सीनियर नेता भी दिल से या बगैर दिल के उनके पीछे पड़े रहे ,उनसे तभी पीछा छूटा जब वो देश के प्रधानमंत्री बन गए ,वैसे तो अंदर घात अभी भी चालु है ,
सम्पूर्ण देश की ६७ %आबादी जिसने भाजपा या मोदी जी ,अथवा आर ऐस ऐस को अपना वोट नहीं दिया क्योँकि वो समझते थे की इनके बस्का देश चलाना नहीं है उनको मोदी जी के बाजूओं पर भरोसा नहीं था ,
फिर प्याज और टमाटर की कीमतों का आसमान को छूना ,
और पूरे देश पर सभी वस्तुओं पर महंगाई की मार ,जो काम होने का नाम ही नहीं ले रही थी ,
आतंकवादी और पाकिस्तान ,जो आस्तीन का सांप बनकर डसने की कोशिश बराबर कर रहा था ,
आज उनके कार्यकर्ता जो उनकी कार्य शैली से नाराज हैं क्योँकि आज किसी भी भाजपा कार्यकर्ता का या उनके संगी साथी या गली मोहल्ले वाले वाले जिनसे उन्होंने वोट मांगे थे उनके काम नहीं हो रहे ,इसीलिए विधान सभा के उपचुनावों में भाजपा को मुंहकी खानी पड़ेगी ,
और अंत में कहूँगा भगवान जी जो की मोदी जी के आने के बाद से ही उनके पीछे पड़े हुए हैं ,तभी से बाढ़ ,भूकम्प ,आंधाड़ ,तूफ़ान और नाजाने क्या क्या हो रहा है हजारों आदमियों की जाने जा रहीं है और अभी तक भी कुदरत का कहर बर्प रहा है आज जम्मू कश्मीर ,और पंजाब में जो त्राहि त्राहि मच रही है है वो इसी बात का प्रमाण है ,और कहीं एक्सीडेंट ,एरोप्लेन एक्सीडेंट ,ट्रैन एक्सीडेंट ,सभी कुछ तो हो रहा है ,
आगे भी भगवान ही मालिक है |

Wednesday, September 3, 2014

एक आदर्श और सशक्त विचार

यदि व्यक्ति जीवन में तीन प्रकार के कोट्स से बच जाए तो उसकी उन्नति को कोई भी मनुष्य ,भाग्य या मैं तो कहूँगा कि स्वयं भगवान जी भी चाहें तो नहीं रोक सकते ,वो व्यक्ति दिन प्रतिदिन आसमान कि ऊंचाइयों को छूटा चला जाएगा ,अब आपमकहेंगे कि वो तीन कोट कौन से हैं ,तो भाइयो वो तीन कोट हैं ,
१ काला कोट ( जिसको वकील साहब पहिनते हैं )अब आप कखुद समझ गए होंगे इसका तातपर्य क्या है |
२सफ़ेद कोट (जिसको डॉक्टर पहिनते हैं )इसका मतलब भी आप समझ गए होंगे |
३ पेटी कोट (जिसे स्त्रियां पहनती हैं )इसका मतलब भी आप भलीभांति समझ गए होंगे |
वैसे भी समझदारों को इशारा ही काफी होता है ,इसलिए अब आपके ऊपर निर्भर करता है |

Tuesday, September 2, 2014

पैसा हाथों का मेल है

मेरे एक जान पहिचान वाले मुझसे मिलने आये काफी देर तक बात चीत चलती रही और फिर अचानक पैसे को लेकर बात होने लगी ,तो वो बोले भाई "पैसा तो हाथ का मेल है "परन्तु मैं मानने को तैयार नहीं था और मैं कह रहा था की पैसा हाथ का मेल नहीं बल्कि हाथो की मेहनत और मुकद्दर का खेल है ,परन्तु वो भी नहीं मान रहे थे अपनी बात पर अडिग थे ,आखिर किसी निर्णय पर नहीं पहुंचे और चाय पानी पीकर वो अपने घर बुलंदशहर को वापस चल दिए ,दुआ सलाम कर चले गए , ,अचानक लगभग १ घंटे बाद उनका फोन आया भाई मेरा तो किसी ने पर्स मार लिया शायद ,अब जेब में पैसे नहीं हैं ,मैंने पूछा अभी कहाँ से बोल रहे हो ,बोले आनंद विहार बस अड्डे से ,मैंने कहा वहाँ कैसे पहुंचे ,बोले कुछ पैसे ऊपर वाली जेब में पड़े थे सो टिकट ले लिया और यहाँ पहुँच गया ,
अब वो बोले अब मैं क्या करूँ ,मैंने कहा यार पैसा तो हाथ का मेल है हाथ रगड़ो और पैसा बनाओ और टिकट लो और घर जाओ ,वो बोले मै दुखी हूँ और तुमको मजाक सूझ रही है ,भाई मै मजाक कहाँ कर रहा हूँ मै तो आपकी बात ही दुहरा रहा हूँ ,
अच्छा एक काम करो किसी की दूकान पर काम कर लो मेहनत से पैसे मिल जाएंगे और फिर घर चले जाना ,बोले यार ऐसा कैसे हो सकता है ,एक दिन काम काने के ५० या १०० तो दे ही देगा ,इतने का ही टिकट होगा बुलंदशहर का ,वो तो बात ठीक है पर यार क्योँ मिटटी पलीत करा रहे हो ,मेरा तो यहां कोई जानने वाला भी नहीं है ,मैं बोला फिर मेरे घर आ जाओ ,तो वो बोले मेरी जेब में वहां आने के लिए भी पैसे नहीं है ,अजीब समस्या हो गई ,आखिर मैंने शाहदरा में अपने एक जान पहिचान वाले को फोन किया और उसे आनंद विहार अड्डे पर भेजा और उनको ५०० रूपये देकर आने को कहा ,वो पैसे देकर आ गया ,और फिर एक सप्ताह बाद उनका फोन आया भाई आप ठीक कह रहे थे पैसा हाथ का मेल नहीं बल्कि दोनों हाथो की मेहनत का फल है और उन्होंने ५०० रुपया मनी ऑर्डर भी मुझे भेज दिया ,तो भाइयो आई बात समझ में आप भी जानो और समझो पैसा बहुत मेहनत से कमाया जाता है ,हाथों का मेल नहीं है ,और जब जेब में पैसा नहीं होता तो ५ का नोट ५० का और १० का नोट १०० का और १०० का नोट १००० का नजर आता है |

Monday, September 1, 2014

क्या हिन्दुओं में लड़कों की कमी है ?

कुछ लोग कहते हैं क्या हिन्दुओं में लड़कों की कमी है ,
हन्दुओं में लड़कों की कमी नहीं है ,"परन्तु  अच्छे और पढ़े लिखे लड़कों की बहुत भारी कमी है ,
क्योँकि पहले तो जो लड़के अच्छी तरह से पढ़लिखकर अपने पैरों पर खड़े हो जाते हैं या अच्छी नौकरी पा लेते है वो तो किसी भी गैर बिरादरी में शादी रचा लेते हैं ,अब बचते हैं थोड़े बहुत संस्कारी पढ़े लिखे लड़के ,तो वहाँ "एक अनार और सौ बीमार "वाला हाल होता है वहाँ पर जब बोली लगती है तो जो अधिक पैसे वाला है वो ही उसे खरीदकर अपनी बहन या बेटी की शादी उसके साथ शादी कर देता है ,अब जो बाकी पढ़ी लिखी वेल क्वालिफ़िएड ,अच्छी नौकरी करने वाली लडकियां बचीं वो क्या करें वो किसके साथ शादी करें ,या तो वो किसी दूसरी बिरादरी में जाकर शादी करें या फिर अपनी बिरादरी में जो काम पढ़े लिखे आधे अधूरे ,मजदूरी करते ,या अपनी थोड़ी बहुत खेती बिगाड़ते या,किराया खाते लड़के  बचे ,उनसे शादी करने का पट्टा अपने गले लटका कर अपनी जिंदगी बर्बाद कर लें क्या उनके लिए यही नियति है ,भाई अब लड़की पहले वाली लड़की गाय ,भैंस या बकरी नहीं रही की ,माँ बाप ने जब चाहा ,जिसके भी गले में या जिस खूंटे से भी बांधा और जिंदगी में मरने जीने को छोड़ दिया ,परन्तु अब वो समझदार हो गई हैं इसलिए जिंदगी को नरक बनाने के लिए तैयार नहीं है ,और मजे की बात ये है की वो आधे अधूरे कम पढ़े लिखे भी बिना मोटा दहेज़ लिए पढ़ी लिखी नौकरी करती लड़की से शादी करने के लिए भी उनके अभिभावक तैयार नहीं होते यानी की उनको बहु नहीं बल्कि पैसा कमाने वाली घर में काम करने वाली मोटा दहेज़ लेकर आने वाली ,वंश को चलाने वाली एक नौकरानी चाहिए यानी की बहु या लड़की नहीं बल्कि एक मशीन हो गई |

Saturday, August 30, 2014

मोदी जी की जापान यात्रा

मोदी जी जापान गए हैं
साथ में अडानी अम्बानी
अजीम प्रेम जी,कुछ अन्य 
को भी साथ लेकर गए हैं ,
वहां के नेता राजनेताओं से
मिलेंगे जूलेंगे ,खाएंगे पीयेंगे ,
घूमेंगे फिरेंगे ,देखेंगे भालेंगे
आनंदित होंगे वार्ताएं करेंगे ,
वहां के नेताओं को भी
अपने कमर्शियल कौशल से
अपनी वाक्पटुता के छल से
पूर्णत:प्रभावित करेंगे ,
फिर वो भाजपा सरकार को
इतना आश्वासन अवश्य देंगे
जितना भी वो चाहेंगे
धन मान सम्मान अवश्य देंगे ,
भारत को अब जापानी भी
मोदी जी की निगाहों से देखेंगे
सम्पूर्ण भारत में रेलों का जाल
जापानी उपक्रम फैला देंगे ,
मात्र शर्त ये है मोदी जी ,
जैसा हम कहे आप वैसा करेंगे
चाहे सभी देशों से संबंध रखना
पर चीन से हमेशा दूर रहेंगे ,
मोदी जी सभी प्रकार का आश्वासन
जापानियों को अवश्य देंगे
और उसके बदले में इच्छित निवेश
जापान से कराकर ही दम लेंगे ,
आशा है मोदी जी की इस यात्रा का
भारत को अभिभूत फल मिलेगा
भविष्य में एक दुसरे के प्रति
सहयोग और सद्भावना,प्रेम बढ़ेगा |






वास्तविकता यही है

वास्तविकता
यदि आप किसी यार ,दोस्त ,रिस्तेदार ,व्यापारिक दोस्त ,पडोसी के घर किसी शादी समारोह ,जन्मदिन ,साल गिरह ,या किसी भी फंक्शन का इन्विटेशन कार्ड देने के लिए उनके घर जाते हैं और दोनों हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हैं कि आपने समारोह में अवश्य आना है ,आपके बिना सब कुछ अच्छा अच्छा नहीं लगेगा
उन्होंने कहा कि क्योँ नहीं भाई साहब अवश्य आएंगे ,हम नहीं आएंगे तो भला और कौन आएगा ,फिर आप तो अपने है आपके यहां नहीं आएंगे तो फिर किसके यहां जाएंगे ,हम तो आपके बिना अधूरे हैं ,सबसे पहले पहुंचेंगे भाई साहब ,कोई काम वाम हो तो बताइये ,अपने ही अपनों के काम आते हैं ,यदि वो ऐसा कहते हैं तो आप पक्का जान लीजिये कि वो आपके समारोह में आएंगे ही नहीं
यदि उन्होंने कहा ठीक है भाई साहब जरूर आएंगे या कोशिश करेंगे ,तो वो अवश्य ही आएंगे |
 

Friday, August 29, 2014

लव जेहाद कैसे समाप्त हो

लव जेहाद का खात्मा करना है तो ,
सबसे पहले अपनी लड़की और लड़कों को संस्कारित करना होगा ,अपना मान और अपमान की बातें समझाना होगा उनको उनके सम्मान की बातें भी बतानी होंगी ,ताकि जीवन में उनको जिल्लत ना उठानी पड़े ,
सर्व प्रथम दहेज़ को जड़ से समाप्त करना होगा ,
कखपति हो या ंकरोड़पति सभी की शादी कोर्ट में ही होगी रजिस्ट्रेसन ही मान्य होगा ,
किसी भी प्रकार का कोई शादी समारोह नहीं होगा ,
यदि लड़की चाहे तो पिता की जायदाद ,धन सम्पत्ति से अपना हिस्सा ले सकती है
यदि किसी भी दुसरे धर्म में शादी करती है तो उसे पिता की मल्कियत से कुछ भी नहीं मिलेगा ,
यदि कोई लड़के वाला अंदर खाते ,लुका छिपी धन माँगता पाया गया तो उसे कम से कम १४ साल की बामुसककत कैद का प्रावधान होना चाहिए , भय का वाता वर्ण पैदा करना होगा ,
यदि लड़की वाला भी जबरदस्ती या अंदर खाते ,लुका छिपी धान देता पाया गया तो उसे भी १४ साल की सजा का प्रावधान होना चाहिए ,
जो धर्मानुयायी फिर भी पैसे का लालच या धमकी या अपहरण अथवा किसी भी प्रकार का अनुचित कार्य करके धर्मांतरण की कोशिश करेंगे या करवाएंगे उनको भी उम्र कैद का प्रावधान होना चाहिए ,
यदि कोई सरकारी अफसर भी ऐसे कार्य में लिप्त पाया गया तो उसको भी कम से कम १० साल की सजा का प्रावधान होना चाहिए ,
कोई पंडित  ,पादरी ,मौलवी ,काजी ,भी लिप्त पाया जाए तो उसे भी १० साल की कैद का प्रावधान होना चाहिए ,

Thursday, August 28, 2014

दिल्ली में केवल आम आदमी पार्टी कि सरकार

सुना है की दिल्ली विधान सभा के चुनावों में  भाजपा अपनी पार्टी के सभी सांसदों को आम आदमी पार्टी के खिलाफ उतार रही है ,जो की दिल्ली के सभी चुनावी क्षेत्रों में भाषा और क्षेत्र  के हिसाब से कम्पैनिंग करेंगे और चाहे कुछ भी करना पड़े दिल्ली को फतह करके ही रहेंगे ,यानी कि मोदी और केजरीवाल कि कुस्ती दिल्ली में ही होगी ,वैसे भी दिल्ली में कुल मिलाकर २७२ वार्ड हैं यदि एक वार्ड में एक एक सांसद भी लगा दिया जाए तो भी उनके पास समर्थक सांसद सहित ३२५ हैं फिर  भी ५३ संसद और बाकी बचेंगे ,सूना है कि वो सम्पूर्ण दिल्ली में हर वार्ड में जाकर जासूसी करेंगे और हो सका तो फर्जी वॉट्स डलवाने  में भी भरपूर आर एस एस कि मदद भी करेंगे और ऊपर से मोदी जी भी सभी वार्डों को सूचित करेंगे ,फिर मै सोचता हूँ कि क्या होगा बेचारे केजरीवाल जी कि पार्टी का {,भाजपाइयों के मुताबिक़ दिल्ली कि ७० सीटों पर वो जीत जाएंगे }और दिल्ली में भाजपा कि सरकार बन जायेगी ,
मुझे समझ नहीं आता कि इतने सांसद और इतने जोर शोर से तैयारी  वो भी ,युद्ध स्तर पर  ,क्या इससे ऐसा नहीं लगता कि भाजपाई ,आम आदमी पार्टी या केजरीवाल से बुरी तरह घबराई हुई है ,इतना डर तो हमने पहले कभी भी नहीं देखा |
अब सवाल उठता है कि यदि फिर भी भाजपा कि सरकार दिल्ली में नहीं बनी और केजरीवाल जी जीत गए यानी कि आम आदमी पार्टी कि सरकार बन गई तो फिर मोदी जी या भाजपा अथवा उनके समर्थनों का क्या होगा ,वो अपना मुंह कहीं छिपाएंगे ,या डूब कर मर जाएंगे ,क्या इनकी इज्जत खाक में नहीं मिल जायेगी ,
और ये भी पक्का है कि दिल्ली कि जनता ने तय कर लिया है" इस बार केजरीवाल ,नहीं चाहिए मोदी और नाहीं सोनिया जी का लाल"

Tuesday, August 26, 2014

पोल खोल कर रख दी

मोदी जी और भाजपा सरकार की लोकप्रियता की पोल खोल कर रख दी ,
जी हाँ अभी हाल में हुए बिहार, पंजाब ,कर्नाटक और मध्यप्रदेश में हुए मध्यावधि ,विधान सभा चुनावों ने मोदी जी का जो ग्राफ दिन प्रितिदिन ऊपर चढ़ता बताया जा रहा था और उनकी लोकप्रियता में अभूतपूर्व इजाफा होना बताया जा रहा था उसका गुब्बारा फूट चुका है ,जानते हैं ऐसा क्योँ हुआ ,इसका कारण है कि आप माने या ना माने "जनता सब कुछ जानती है "झूठ कि लाली पॉप ,शब्दों कि लाली पॉप खाने से किसी का पेट नहीं भरता ,पेट तो रोटी से ही भरता है ,और मोदी जी ये भली भांति जानते हैं फिर भी शब्दों के जाल से जनता को बाँधना चाहते हैं ,सो जनता बांध गई परन्तु कहावत है कि "काठ कि १ बार ही चढ़ती है बार बार नहीं "
अभी तो आगे आगे देखना क्या होता है ,यदि मोदी जी ने रचनात्मक काम नहीं किया तो उसका हश्र क्या होगा मोदी जी अच्छी तरह जानते हैं ,वैसे ५ साल उनके पास हैं वो कुछ भी कर सकते हैं |

Monday, August 25, 2014

मोदी जी की लोकप्रियता चौथे आसमान पर

कटाक्ष
मोदी जी और भाजपा की लोकप्रियता पिछले १०० दिन के सुशासन के परिणामों के कारण चौथे आसमान पर पहुँच चुकी है यानी की पिछले चुनाव में जो उनको २८३  सीट्स मिली थी अब वो बढ़कर ३१४ हो चुकी हैं ",पंजाब केसरी " २५/८ /१४ के समाचार पत्र के द्वारा ,आप जानते हैं आखिर ऐसा क्योँ हुआ ,
१ वो भारत के सबसे अधिक ईमानदार नेता है ,इसीलिए उन्होंने अपना पूरा चुनाव अभियान लगभग ३ लाख किलोमीटर ,पैदल और साइकिल से मात्र दो जोड़ी कपड़ों के सहारे एक वक्त खाना खाकर पूरा किया ,उन्होंने अपना एक वक्त का खाना गरीब आदमियों को खिलाया ,२
२ जो महंगाई भाजपा के आने से पहले आसमान को छू रही थी उसको उन्होंने अपने छू मंतर से जमीन पर लिटा दिया ,जैसे आटा गेंहू  पहले ३० रुपया किलो बिक रहा था उसे २० रुपया किलो कर दिया ,आलू ३० रूपये से घटाकर १० रुपया और टमाटर ८० रूपये से ३० रूपये ,प्याज ५० रूपये से १८ रुपया किलो और दूध ६० रूपये से घटकर ४० रूपये हो गया ,जिसके कारण मुद्रा स्फीति काफी नीचे आ गई और जनता में ख़ुशी की लहर दौड़ गई है ,
३ गरीबी जो पहले चार्म सीमा पर थी वो भी काफी नीचे आ गई क्योँकि मोदी जी ने कांग्रेस के मुकाबले अमीर आदमियों की कमाई में कुछ वृद्धि कर दी जिसके कारण रातों रात बहुत सारे गरीब लोग अमीर हो गए ,
४ मोदी जी के प्रयासों के कारण अब भ्र्ष्टाचार दिल्ली के क्या देश के किसी भी सरकारी दफ्तर में देखने तक को नहीं मिलता किसी भी दफ्तर में जाइए मोदी जी का नाम लीजिये और बिना रिश्वत दिए अपना काम करा लीजिये ,वो बात अलग है की रिश्वत का नाम बदल कर सुविधा शुल्क के रूप में देना पड़े और वो भी पहले से बहुत ज्यादा ,अब यदि काम कराना है तो ये तो करना ही पडेगा ,
 ५ पाकिस्तान को उन्होंने जैसे ही अपनी आँखे दिखाई और फटकार लगाईं तो नवाज शरीफ साहब हाथ जोड़कर मोदी जी के पैरों में पड़ने के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं ,
६ चीन  भी अपनी सेनाओं को पीछे हटाकर ले गया और भविष्य में कोई भी गुस्ताखी ना करने की कसम खाकर वापस चीन की दीवार के भी दूसरी पार चला गया ,
आतंकवादी फैसला करने के लिए उनको बार बार गुहार कर रहे हैं और अपनी जान की भीख मांग रहे हैं
७ राम मंदिर अयोध्या में बन्ना शुरू हो गया है अगले साल तक हिन्दू ही नहीं मुस्लिम भी उदघाटन समारोह में शामिल होंगे
८ धरा ३७० का मोदी जी के आने से ही कोई महत्त्व नहीं रह गया है वो भी २ या ४ माह में खत्म हो ही जायेगी
९ अमेरिकन राष्ट्रपति मोदी जी आवभगत करने हेतु बांह फैलाये खड़ा है और देखना चाहता है की आखिर मोदी है क्या चीज
१० उनकी  अपनी पत्नी आज भी उनके लिए सारे व्रत रखती हैं उनकी दीर्घायु के लिए कामना करती हैं और उनसे मिलने के लिए भगवान जी से मध्यस्थता कराना चाहती हैं पर मोदी जी अभी नहीं मान रहे हैं
११  जिस  हिसाब से मोदी जी देश विदेश की यात्रा कर रहे हैं और उनको धन और मुहावरे या बातें बाँट रहे हैं उससे तो ऐसा ही लगता है कि आसपास के सभी देश भी मोदी जी और भाजपा सरकार के मुरीद हो जाएंगे |









हमारे चुप प्रधानमंत्री मोदी जी

पाक मुद्दे पर चारों और से सभी नागरिक एक ही बात कहते नजर आ रहे हैं कि आखिर मोदी जी कुछ करते क्योँ नहीं ,या कुछ बोलते क्योँ नहीं ,अब तो हद ही हो गई है कि उनके समर्थक भी बोलने लगे हैं ,
दरअसल बात ये है कि मोदी जी बहुत ही बुद्धिमान व्यक्ति हैं ,वो गुजराती होने के नाते लड़ाई झगड़ों से दूर ही रहने वाली परवर्ती के हैं इसलिए भी वो पाक से पंगा लेना नहीं चाहते ,दुसरे ये काम प्रधानमंत्री का नहीं बल्कि रक्षा मंत्री का होता है इसलिए वो ही देख रहे हैं ,तीसरे उन्होंने कारगिल युद्ध का परिणाम देख लिया जिससे कुछ हासिल नहीं हुआ ,केवल लाशों के और वो भी निरीह सैनिकों और व्यक्तियों की,इसलिए यदि पाक के साथ युद्ध को टाला जाए तो ज्यादा अच्छा है
यदि  दो चार सैनिक शहीद हो भी गए तो कोई बात नहीं उससे तो अच्छा है की युद्ध होता और हजारों सैनिक और नागरिक मारे जाएँ ,
चौथा मुख्य मुद्दा है जिस खिताब को अटल बिहारी वाजपेयी ना पा सके उसे पाने के लिए मोदी जी कुछ भी कर सकते हैं और वो खिताब है "शान्ति के देवदूत " यदि मोदी जी को शांति का देवदूत ही बन्ना है तो फिर कुछ भी हो ,वो पाकर ही रहेंगे ,
दुसरे पडोसी धर्म अपनाना हम भारतवासियों का मानवता के नाते फर्ज बन जाता है ,
परन्तु जो हमारे अपने मृत्यु शैया पर लेट कर शहीद हो चुके हैं उनको भी तो नहीं भुलाया जा सकता इसलिए देश की मर्यादा का प्रश्न हमेशा उनके  जीवन को प्रदूषित करता रहेगा और जनता को जवाब भी देय होगा |

Tuesday, August 12, 2014

एकमात्र पुरुष

इस संसार में एकमात्र पुरुष ही ऐसा प्राणी है जो अपने प्यार को सैंकड़ों ,हजारों ,या जितनों में भी बाँट सके बाँट देना चाहता है और जिसको भी अपना प्यार देता है ,बदले में उससे कुछ ना कुछ लेना भी चाहता है ,यानी कि मुफ्त में किसी को प्यार नहीं देता ,जब कि प्राकृतिक तौर पर जानवर भी अपना प्यार एक के अलावा किसी दूसरे से अपना प्यार नहीं बांटते ,यानी कि वो भी प्रकृति के नियमों का उललंघन नहीं करते ,पर एक पुरुष महाशय हैं जो कि खुल्ल्मखुल्ला प्रकृति के नियमों का भी उललंघन भी करते हैं और फिर भी खुद को सभ्य और संस्कारी साबित करने कि कोशिश करते हैं ,ये भी दुनिया का नौवा आश्चर्य है |

Monday, August 4, 2014

आत्मविभोरता

आत्मविभोर रहो
दूसरों को  आत्मविभोर करो
आपके समीपस्थ वातावरण भी
आत्मविभोर रहेगा ,
परिणाम भी सुखद और
आत्मविभोर  ही होंगे
समस्त जन आपकी
प्रशंसा और  स्तुति करेंगे
जिस पगडण्डी पर आप चलेंगे
सभी आपका पगानुसरण करेंगे
आपकी वाणी से निकले
एक एक शब्द को
मूल मंत्र मानकर
आत्मविभोर होते रहेंगे |

Friday, August 1, 2014

परिवार में बड़ा होने का फर्ज और उसके लाभ

आज कैसा ज़माना आ गया है देखो

सबसे पहले अपने माँ बापू के डाबर को पालो पोसो ,
फिर उनको पढ़ाओ लिखाओ ,
व्यापार कराओ या नौकरी लगवाओ ,
फिर उनकी शादी करो ,
अपने बच्चों को मत पुचकारो ,उनके बच्चों को प्यार करो
अपने बच्चों को कारपोरेशन के स्कूल में पढ़ाओ या मत पढ़ाओ ,पर उनके बच्चों को कान्वेंट में पढ़ाओ ,
उनके बच्चों की गलती पर अपने बच्चों को पीटो पर उनके बच्चों को हाथ मत लगाओ ,
हाथ लगाया तो जाली कटी सुनो ,और चुप बैठ जाओ ,या उनके बर्तन अलग कराओ
किसी शादी ब्याह या जमीन जायदाद के लिए कर्जा लेना है तो अपने नाम में लाओ पर सभी जगह पर उनका नाम अवश्य लिखवाओ ,नहीं लिखवाया तो गाली खाओ ,
ब्याज तुम खुद भरो ,घर खर्चा तुम खुद दो ,पर कमाई का हिसाब मत मांगो ,कमाई का हिसाब माँगा तो ,हम हम नहीं तुम तुम नहीं ,
ज्यादा बात बढ़ी तो सभी अलग अलग हो जाओ ,
जब बटवारा होगा तो ट्रैन का आखिरी डिब्बा भी उतना ही हिस्सा लेगा जितना आपको मिलेगा ,
सभी भाइयों को अपने से ज्यादा हिस्सा दे दो तब भी ये एलीगेसन लगेगा की आपने उनको कम  दिया है ,
और यदि उनमे थोड़ी सी सहनशीलता नहीं है तो मुकदद्मे झेलने के लिए तैयार हो जाओ और फिर कोर्ट के चक्कर बुढ़ापे में काटते रहो ,
सुबह को रोटी लेकर जाओ ,कोर्ट में तारीख भुगतो ,खाना खाओ और बुड्ढे होते जाओ ,
जो कर्ज तुम्हारे सर पर चढ़ा था उनसे बोलो दो तो जवाब मिलेगा हम कौन सा कर्जा लेकर आये थे जो लाया वो ही देगा ,और एड़ियां रगड़ते रगड़ते ,कर्जा देते ,अपनी अओउलाद और पत्नी की गाली खाते खाते एक दिन नरक लोक सिधार जाओ ,
तुम फर्ज पूरा करते करते गरीब और बीमार होकर अपमान जनक स्तिथि में जीवन बिताओ ,और वो आराम से ऐश्वर्य पूर्ण जीवन बिताएंगे ,
ऐसी स्तिथि से तो भाइयो अच्छा है की अब ज़माना आ गया है
अपनी अपनी दाढ़ी में घस्सा लगाओ
चाहे सारा डाबर भाड़ में ही कौन ना जाए |















Sunday, July 13, 2014

ख़्वाब शेर

ख़्वाब में नूर ऐ हुश्न को देखा
तो बल्लियों उछलने लगे 
नृत्य किया उसके साथ तो
 खुद को नवाब समझने लगे 
ख़्वाब जब टूट गया तो
खुद को मनहूस कहने लगे
बेगम ने पूछ लिया तो
शर्म से गाल लाल हो गए |

Tuesday, July 8, 2014

क्या मुस्लिम भाई कुछ रौशनी डालेंगे

क्या मुलिम भाई १५वि शताब्दी से पहले के अपने इतिहास पर कुछ रौशनी डालने की कृपा करेंगे?
क्या वो इस  शताब्दी से पहले भारत में रहते थे ,यानी कभी  भारत के बाशिंदे थे ?
यदि बाशिंदे थे तो वो किस प्रांत  ,(सूबा )या स्टेट में रहते थे और उस वक्त उनको जनसंख्या  कितनी थी ?
और वो किस खानदान ,या कबीले के सदस्य थे ,
क्या उनको पूरी तरह से धार्मिक स्वतंत्रता थी ?
उस वक्त भारत में किन लोगो ,जातिय (समुदाय ) का राज्य था यानी कि कौन सा वर्ण राज्य करता था ,
यदि वो भारत में नहीं थे तो तो वो भारत में कब आये ,और कहाँ से आये ,
और अपने साथ अपनी सभ्यता और संस्कृति के हिसाब से क्या क्या साथ लेकर आये थे ,
या फिर मुग़ल बादशाह बाबर के साथ भारत में आये थे और फिर उनकी संताने भारत में ही बस गई और यदि सभी मुग़ल आज भारत में हैं तो वो इस वक्त कहाँ और किस prdesh में हैं ,
यदि सभी मुस्लिम भाई मुग़ल खानदान  से संबंधित हैं तो ओरंगजेब के जमाने के कनवर्टेड हिन्दू अब कहाँ चले गए हैं या वो भी आज भारत में ही हैं 
आज देखने में आता है कि जो जाती या वर्ण जैसे राजपूत ,चौधरी ,मालिक जायसी ,चौहान ,राणा ,सकलानी ,राणावत ,शेखावत ,राजावत , और बहुत कुछ शब्द हैं जो हिन्दू और मुस्लिम दोनों में ही मिलते हैं इसका क्या कारण है ,
मैं ये सबकुछ मात्र अपनी जानकारी और इतिहास कि तह में जाने के लिए लिख रहा हूँ  कोई भी हिन्दू या मुस्लिम भाई इसे अन्यथा ना ले ,यदि कोई हिन्दू भाई भी इस लेख पर प्रकाश डालना चाहे तो उसका भी स्वागत है |

Monday, July 7, 2014

अश्क़ बहते हुए देखकर
भला पसीना किसका नहीं छूटता
तपस भरी हो अगर जिस्म में
भला लावा किसका नहीं फूटता
इश्क़ जब कुलाचें मारता है तो
उलटा सीधा कुछ नहीं सूझता
दिल आ जाए गर गधी पर तो
हंसनी भी लगती है बदसूरत बेवफा,

Tuesday, July 1, 2014

वो कहती हैं कभी हम
बेजुबान हुआ करते थे
ठीक गधे की मानिंद ,
पर अब वो कहती हैं
हम बदजुबान हो गए हैं
ठीक आदमी की मानिंद,
इतना फर्क आने का
आखिर ये माजरा क्या है
पहले तुम खफा थी हमसे
अब हम तुमसे खफा हैं 


Sunday, June 29, 2014

मेरा धर्म क्या है

क्या
 सर पर दस बाल  की चोटी रखने से हिन्दू हो गया
 शरीर से  थोड़ी खाल कटाने से मुसलमान हो गया
फिर मुझे बताओ मैं हिन्दू हूँ या मुसलमान
मेरे साथ तो दोनों प्रकार का ही संस्कार होगया

मंदिर जाने मात्र से कोई हिन्दू हो गया
और मस्जिद जाने मात्र से कोई मुसलमान हो गया
मै तो दोनों पवित्र स्थानो पर मस्तक झुकाता हूँ
मुझे बताओ की मैं फिर कौन से धर्म से हो गया ,
रामायण महाभारत पढ़ने से मैं  हिन्दू हो गया 
और कुरआन शरीफ पढ़ने से  मुसलमान हो गया
मैं तो सभी धार्मिक पुस्तकें पढता और अम्ल करता हूँ
मुझे  बताओ फिर मैंने कौन सा धर्म ग्रहण कर लिया |
 

Friday, June 27, 2014

एक कहावत है

काला बामन ,ठिगना गूजर
गोरा जाटव ,लंबा कुम्हार
इन चारों से भय माने करतार

पक्षियों के द्वारा नेक सलाह

हमारा ख्वाबगाह तो चमन है
जहां मात्र चैन और अमन है
जहां ना भारत और पाक है
और ना इराक़ और यमन है ,
स्वर्ग में भी घोसले बनाते हैं हम
जन्नत में उड़के चले जाते है हम
युद्ध का नजारा देख आते हैं जाकर
यमन को सलाम कर आते है हम 
ना जाने में भय ना आने  में डर
ना पासपोर्ट ना वीसा का चक्कर
सभी सीमाएं खोल रखीं हैं हमने
आपस में प्यार प्रेम की खातिर ,
काश सभी देशवासी ऐसा कर दिखाते
हम पक्षी भी देख देख मुस्कुराते
जो देश इस सबसे  सहमत ना होते
बाकी देश उनकी खिल्ली उड़ाते |

Tuesday, June 24, 2014

यदि जिंदगी में उन्नति करनी है तो .

कम खाओ और गम खाओ
सारे जहां  का जहर पीकर नम हो जाओ

Monday, June 23, 2014

रजनी

वो रजनी जो अपनी
कलुषता के लिए
सर्वप्रसिद्ध होते हुए भी
सभी जड़ ,चैतन्यों को
किसी ना किसी रूप में
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में
कुछ ना कुछ
अवश्य प्रदान करती है
किसी को
आनंद और अनुभूति ,
तो किसी को प्रेम
प्रकृति की संरचना हेतु
काम क्रीड़ा ,
आलिंगन और प्रेमालाप
किसी को प्रियतम से
मिलान के मीठे मीठे ख़्वाब
किसी को संध्या होते ही
प्रेयसि के साथ
पांच सितारा होटल में जा
स्वादिष्ट भोजन ,
नृत्य और शराब ,
तो किसी को
उदर पूर्ती करने हेतु
सेंधमारी ,राहगीरी करने का
असीम साहस और प्रताप ,
तो वृक्षों और लताओं को
अपना होने का आभाष
कार्बनडाई आक्साइड फेंक
शुद्ध होने का प्रयास
पशु और पक्षियों को भी
शान्ति से अपने नीड़ों में
लुक छिपकर आनंद विभोर हो
उषा होने तक
शान्ति का वेद पाठ .
पर आज तक
किसी ने भी उससे नहीं पूछा
तुम ये सब किस लिए करती हो
तुम्हें क्या चाहिए
अपना सर्वस्व देकर भी
दिन रात शांत क्यों रहती हो |

















Saturday, June 14, 2014

गुजरात और मुख्य मंत्री श्री नरेंद्र मोदी

गुजरात प्रदेश को पहले सौराष्ट्र कहा जाता था ,क्योँकि ये प्रदेश भारत में सभी राज्यों से ज्यादा समृद्ध था ,
उसका कारण था यहां की जनता की  व्यापारिक मानसिकता और वो भी उच्च स्तरीय ,और उसी का कारण है की आज भी  गुजरात में बहुत बड़े बड़े उद्योगों की स्थापना और दिन  प्रतिदिन उन्नति के मार्ग पर प्रशस्त होना
दरअसल गुजरात की जनता बहुत ही संवेदनशील ,विनम्र ,बुद्धिमान ,दूरदर्शी ,सदा जीवन उच्च विचार रखने वाली  पूर्णत: धार्मिक परवर्ती ,और काम करने के अलावा अथवा धन एकत्रित करने के अलावा वो किसी और भी अपने को ना भटकाने वाली ,उसे राजनीति से कुछ लेना देना नहीं ,कौन क्या कर रहा है और क्या नहीं कर रहा ,उसे मात्र अपने काम से काम है ,फजूल की बातों में समय बर्बाद नहीं करती ,वहाँ पर २००१-२ के दंगों से पहले हिन्दू मुस्लिमों में कोई मतभेद नहीं था ,ये सबकुछ जो भी हुआ सब राजनीतिज्ञों और नेताओं के कारण हुआ ,वरना ऐसा भी कुछ नहीं होता ,उनके गाँव ,नगर या शहर में बिजली ,पानी है या नहीं है ,या कौन कितना चन्दा मांग रहा है ,कौन सरकार कितना टैक्स लगा रही है वो कोई खास मुद्दा नहीं मानते वो तो देखते हैं की वो क्या बचा रहे हैं ,जो उनके पास आता वो दे देते हैं ,लड़ाई झगड़ों में वो नहीं पड़ते ,और लगभग सभी गुजराती लखपति तो होते ही हैं ,व्यसन इनको दूर दूर तक छो नहों पाते ,शराब जैसी चीज को ये हाथ तक नहीं लगाते ,इसी वजह से आज भी गुजरात में शराब पूर्णत; प्रतिबंधित है |
दूसरा कारण एक छोटा प्रदेश है जहां पर मात्र २६ लोकसभा की सीट्स हैं तो इतने छोट से प्रदेश  और वो भी सुख समृद्धि से संपूर्ण तो इस छोटे से प्रदेश को संभाला है मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने ,काश उन्होंने  उत्तर प्रदेश ,बिहार या मध्यप्रदेश अथवा राजस्थान सभाला होता तो शायद जो मुश्किलें आज उनके सामने आ रहीं है आदि उनसे रूबरू नहीं होना पड़ता यदि होते भी तो निजात पा लेते ,
पर अभी तक देखने से तो मुझे लागतक है की

 गुजरात  जैसे प्रदेश को संभालना एक मामूली बात थी पर भारत जैसा देश जिसमे आज २९ राज्य हैं उनको संभालना मोदी जी के लिए मुस्किल तो नजर आता ही है और टेडी खीर भी है ,यदि उनके सहयोगियों ने पूरी तरह से साथ नहीं दिया तो उनके लिए बहुत मुश्किल हो जाएगा क्योंकि एक राज्य के सामने एक देश की समस्याएं बहुत ही ज्यादा हैं,और वो भी ऐसा देश जहां का अपना खजाना खाली हो ,खुद मोदी जी के शब्दों में खजाने की हालत बहुत ही खराब है ,आज के के न्यूज़ पेपर टाइम्स ऑफ़ इंडिया में ,यानी की हमको ब्याज तक देने के लिए रुपया उधार लेना पड़ता है ,इससे बुरी हालत और क्या होगी ,उस देश को संभालना कोई खाला जी का खेल नहीं है फिर जहां पर भ्र्ष्टाचार अपनी चरम सीमा पर है ,अरबों खरबों रुपया बाहर के बैंकों में पड़ा है ,आम आदमी किसी भी प्रकार का टैक्स देने को तैयार नहीं है ,बड़े से बड़ा आदमी टैक्स की चोरी करता है ,ज़रा सोचिये कैसे संभालेंगे मोदी जिन इस २९ राज्य वाले भारत देश को जिनको मात्र एक्सपीरियंस है एक विधायक का या एक मुख्य मंत्री का, मई तो उनको एक नै नवेली दुल्हन की तरह समझता हूँ क्योँकि वो जिस घर में जाती है उसे उस घर की चूल्हा चाकी का भी पता नहीं होता तो वो घर क्या खाक संभालेगी ,जय हिन्द .जय भारत










उनसे उनको रूबरू ना होना पड़ता

Wednesday, June 11, 2014

वास्तविकता जानने का प्रयत्न

क्या कोई  कांग्रेस या  भाजपा का  बड़े से बड़ा नेता ये कहने के लिए तैयार है की अरविन्द केजरीवाल जो कि पिछले समय में दिल्ली के मुख्यमंत्री रह चुके हैं वो एक भगोड़े नेता हैं और यदि वो भगोड़े नेता थे तो उनको ढूंढा क्योँ नहीं गया ,और यदि ढूंढ भी लिया गया तो उनके विरुद्ध वो कार्यवाही क्योँ नहीं की गई जो कि एक भगौडे के विरुद्ध कि जानी चाहिए ,क्या इसके लिए दिल्ली कीवर्तमान सरकार दोषी है या फिर भाजपा की केंद्रीय सरकार ,क्योँकि चुनावों के दौरान भगोड़ा शब्द इन दोनों पार्टीज की नेताओं की ,खास तौर पर भाजपा वालों की जुबान पर पर रखा ही रहता था या प्रत्येक भाषण में बोला जाता था ,उससे ऐसा लगता था की जैसे केजरीवाल कोई बहुत बड़ा मुजरिम हो ,ना की कोई आम आदमी पार्टी का बड़ा नेता ,
कृपया सबूतों के साथ अपना नाम ,पता ,मोबाइल नो ,हमारे प्रोफाइल पर भेजे ,यदि ३ दिन तक किसी ने भी कुछ नहीं भेजा तो समझा जाएगा कि केजरीवाल भगोड़ा नहीं थे बल्कि ये इल्जाम असत्य थे जो कि उनकी प्रसिद्धि को काम करने और लोकसभा चुनावों में हराने  के लिए प्रयोग किये गए थे |

मोदी के सिहासन आरूढ़ होने के १६ दिन बाद

मस्ती का आलम बहुत दिन बाद आया है
थोड़ा सा सरूर तो चढ़ जाने दो,
अभी तो जुबान ही बहकने लगी है ,
थोड़े से पैर भी तो  लड़खड़ाने दो ,
दारु तो हमने कभी पीकर नहीं देखि
अहंकार में ही थोड़ा झूम जाने दो
हमने कब कहा था पूरा ठेका हमारा है
समाज के ठेकेदारों को भी करके दिखने दो |

Thursday, June 5, 2014

नेताओ का मुख और बलात्कार

नेताओ के मुख में जो भी आया वो बोल दिया
बलात्कार को बलात्कार नहीं खेल कह दिया 
मंत्री जी ने कहा लड़कों से गलतियां हो जाती हैं
उसके लिए क्या उनको जेल में भेज दिया जाए
मात्र दो मिनट की छोटी  सी भूल के लिए
भरी जवानी में ही उनको फांसी लगा दी जाय
जब मीडिया कर्मी युवती ने मंत्री से बात की
बोले आपके साथ तो कुछ नहीं हुआ सुरक्षित हो
आप अपना काम चुपचाप करती रहो फिर
किस बात के लिए चिंता क्योँ करती हो
फिर एक  मंत्री जी ने अपने सुविचार दिए
बलात्कारी और स्त्री को  एक नजर से देखिये
यदि स्त्री सहर्ष संलग्न पायी जाए तो
उसको पहले फांसी पर लटका दीजिये ,
फिर एक गृह मंत्री जी का ब्यान देखिये
आप मुख्य मंत्री जी परेशानी भी देखिये
वो क्या कर सकते हैं बलात्कार के केस में
वो बलात्कारियों को ढूंढते फिरेंगे प्रदेश में ,
खुदा ना खास्ता जब इनकी भैंस खो जाती हैं
या किसी झोटे के साथ भाग जाती हैं
तो पूरी पोलिश फ़ोर्स लग जाती है ढूंढने में
और चौबीस घंटे में आ बंध जाती है खूंटे में ,















Tuesday, June 3, 2014

गिनती नहीं साहस चाहिए

भारत में सिक्ख समुदाय की आबादी लगभग २ करोड़ है ,और वो हमेशा अपनी प्रत्येक बात मनवा कर ही दम  लेते हैं और भारत सरकार को झुकना भी पड़ता है |
और मुस्लिमो की आबादी लगभग १७ करोड़ है उनका भी भारत मेंसिक्का  चलता है  ,सभी राजनितिक पार्टियां उनके तलवे चाटती हैं |
और राजपूतों की आबादी लगभग ३५ करोड़ है ,उनको कोई  भी राजनितिक पार्टी नहीं पूछती ,यदि
 पूछ भी लेती हैं तो इस्तेमाल  करके फेंक देती हैंऔर ये उफ़ भी नहीं करते ,फिर उफ़ भी किसके बलबूते पर करें अपना राजपूत भाई तो दूसरी पार्टी में को भागता है ,या जो उसी पार्टी में भी है वो अपने भले के लिए उस भाई से ही अपना मुंह छिपाने लगता  है कि कही पार्टी कि गाज उस पर भी न गिर जाए |
फिर भी ये बात राजपूतों की समझ में नहीं आती और नाहीं ये  कभी संगठित होते और नाहीं भविष्य में होने का प्रयत्न भी करते ,क्या इनकी राजनितिक महत्त्वाकांक्षा मर चुकी है ,या फिर राजधर्म को ही भूल गए हैं


Friday, May 30, 2014

दोस्त की बात याद आ गई तो बहुत कपडे सिला लिए मैंने भी

मैं एक दिन अपने  दोस्त के   दफ्तर में बैठा था तो वो मुझसे बोला यार चांदनी chouk चलना है मैंने कहा क्योँ ,वो बोला कुछ कपडे खरीदने हैं वहाँ जाकर उसने लगभग ९० जोड़ी कपडे अपने लिए खरीदे ,मै बोला यार तू पागल हो गया है क्या ,कपड़ों पर ज्यादा पैसा खर्च करना बेवकूफी है ,फैशन बदलते रहते हैं ,नए नए कपडे आते रहते हैं ,फिर ज्यादा कपडे हों तो केयर भी नहीं हो पाती ,दीमक ,कीड़े लगने का डर,यानी की सभी प्रकार नुकसान ही नुक्सान है ,जब मै उसको सबकुछ बोल चुका तो फिर वो बोलने लगा की सुन ,लाख रूपये की एक ही बात बताऊंगा ,
वो बोला भाई आज मेरा व्यापार अच्छा चल रहा है मेरे पास धन की कमी नहीं है खूब आ रहा है खूब जा रहा है ,मै और मेरा pariwaar खूब मजे ले रहे है ,व्यापार का क्या पता कब दिवाला निकल जाय और मै पैसे पैसे के लिए मोहताज हो जाऊं ,तब मुझे ३ चीजों की जरूरत होगी रोटी कपड़ा और मकान ,रोटी तो आदमी कहीं भी जाकर खा लेगा मंदिर ,मस्जिद गुरुद्वारा लंगर ,यार दोस्त रिश्तेदार किसी के यहाँ भी जाएगा रोटी मिल जायेगी ,मकान मेरे पास रहने के लिए है ही ,कोई परेशानी नहीं होगी ,अब यदि मेरे पास कपडे नहीं होंगे तो मै क्या पहनूंगा ,नंगा घूमूँगा तो कोई पास नहीं बिठाएगा ,उधार मांगूंगा तो कोई उधार नहीं देगा ,मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा फाटे  पुराने कपड़ों में जाऊंगा तो कोई khaane को दे या ना दे भिखारी जानकार भगा भी देंगे नौकरी मांगने जाऊंगा यदि अच्छे कपडे नहीं होंगे तो कोई नौकरी भी नहीं देगा ,फाटे पुराने में घूमूँगा तो इज्जत भी चली जायेगी कोई अपने यहां शादी ब्याहों में भी नहीं बुलाएगा ,ऐसी बहुत सी बाते हैं जिसके कारण मैंने ९० जोड़ी कपडे सिलवाये हैं .एक तो ये कपडे हर तरीके से मेरी इज्जत को ढाप कर रखेंगे ,किसी को पता भी नहीं चलने देंगे की मेरा दिवाला निकल चुका है ,और कपड़ों के भुलावे में आकर कोई ना कोई शरीफ आदमी मेरी हेल्प भी कर सकता है होसकता है की अपना व्यापार दोबारा खड़ा कर सकूँ ,
और देखों इन ९० जोड़ी कपड़ों में मै काम से काम ४ जोड़ी भी १ साल में इस्तेमाल करूंगा तो २३ साल तो निकल ही जाएंगे ,अब मेरी उम्र ५० साल है इसलिए ५० +२३ =७३साल हो सकता है फिर मेरी राम राम सात हो जाए क्योंकि इतनी उम्र आजकल होती है ,तो भाई इन ९० जोड़ी कपड़ों के sahaare इज्जत से रह सकूंगा ,खा सकूंगा ,मर सकूंगा ,
और मजे की बात बता दूँ की उस मेरे दोस्त का कुछ दिन बाद ही दिवाला भी निकल गया और १५ साल तक वो दिल्ली में रहा और मैंने जब भी उसे देखा उन्हीं अच्छे कपड़ों में देखा ,पर उसका चेहरा लटका रहता था ,शायद वो उस बात को भूल गया था पर मुझे याद थी ,उसके कुछ दिन बाद वो अमेरिका चला गया अब वहीँ पर व्यापार कर रहा है ,कहते हैं की वो वेल सेटल्ड है ,
इसलिए भाई मैंने भी और बहुत से देश के लोगों और नेताओं ने इतने कपडे सिल्वा लिए हैं की कल को कुछ भी हो पर हमारी हवा तो कपड़ों के बल पर वैसी ही रहेगी ,उसमे अंतर नहीं पडेगा | जय हिन्द 












 

मोदी जी प्रधानमंत्री बने तो

मैंने अपने २ अप्रैल २०१४ के लेख में लिखा था  कि यदि मोदी प्रधानमंत्री  बने तो देश में भूकम्प आ जायेगा,आंधी और तूफ़ान आएंगे ,महंगाई बढ़ जायेगी ,फसलें नष्ट हो जाएंगी , तो वो भी ६ कि तीव्रता वाला भूकम्प आ गया ,आंधी और  तूफ़ान आज आ गए जिनमे दिल्ली राजधानी में ही सैंकड़ों पेड टूट कर गिर गए ,कितनी ही गाड़ियां टूट फुट गईं ,बिजली घंटों तक गुल रही ,चारों और हाहाकार सा मच गया ,ट्रेफिक जाम हो गया ,
आम की फसल नष्ट हो गई ,और भी तरबूज खरबूजे ,खीरे की फसल नष्ट हो गई ,
लगभग सभी दालें १०० रूपये से ऊपर चली गई ,आता भी 20 रुपया किलो तेज हो गया ,जिससे गरीब मार हो गई बिजली और पानी की किल्लत दिन प्रितिदिन बढ़ती ही जा रही है ,जनता दुखी है .अच्छे दिन भी जो की मोदी जी लाये हैं जनता को बुरे लगने लगे ,
कैसी है हमारे देश की जनता मिनटों में केजरीवाल अच्छे लगने लगते है .और फिर थोड़ी सी देर में मोदी जी ,और अभी ४ दिन बीते हैं तो कांग्रेस का गीत अलापने लगे ,क्या होगा इस देश का ,
मेरी मोदी जी से करबद्ध प्रार्थना है की वो इस देश की जनता के लिए कोई जादुई चिराग ढूंढ़ कर लाएं जो वर्षों का काम महीनों में और महीनों का काम दिनों में ,और दिनों का काम घंटों में और घंटों का काम मिनटों में कर दे ,और ये आपकी जय जयकार करते रहे ,वार्ना मोदी जी ये तो लुढ़कने वाले लोटे हैं ,किसी भी और लुढक जाएंगे ,फिर मत कहना की मुझे पता नहीं था |
वैसे ये जो सम्पूर्ण घटनाएं जैसा की ऊपर लिख चुका हूँ जो हो रही हैं और १३ का आंकड़ा आपके और आपकी 
सरकार हेतु कुछ अच्छा नहीं है |कृपया माफ़ करना









सरकार के लिए बहुत अच्छा नहीं है 

एक कहावत थी

एक कहावत थी
उनके लिए जिन अभिभावकों के घर मात्र पुत्रियां ही होती थीं,पुत्र नहीं
जोड़ जोड़ मर जाएंगे
चौखन्डे और गोल
माल जमाई खाएंगे
ससुरे की जय बोल ,
परन्तु अब ये कहावत बदलकर उन अभिभावकों के लिए जिनके घर पुत्र ही पुत्र हैं ,पुत्रियां नहीं ,
जोड़ जोड़ मर जाएंगे
चौखन्डे और गोल
माल बहुएं खायेंगी
ससुरे की जय बोल
क्या तर्क सँगत है या नहीं ,यदि है तो क्योँ ?और तर्कसंगत नहीं है तो क्योँ ?

Thursday, May 29, 2014

मोदी जी आ गए
अच्छे दिन लाएंगे
पहली जुलाई से दिल्ली में
बिजली के दाम ड्यौढ़े हो जाएंगे ,
अभी तक यूनिट से बिल लेते थे
 अब लोन के पैसे भी वसूले जाएंगे
ऊपर से सरचार्ज भी लगाया जाएगा
हम तो मोदी जी के गीत गाएंगे
तभी तो अच्छे दिन आएंगे

Monday, May 26, 2014

क्या मोदी जी न्याय कर पाएंगे

ऐरो को भी बुलाया
गैरों को भी बुलाया
नत्थू खेरों को भी बुलाया
पर बचपन जिनके साथ बिताया
उनको मुंह तक भी ना लगाया ,
चाय वालों को भी बुलाया
चाल वालों को भी बुलाया
खोखे  वालों  को बुलाया
ढोकले वालों को बुलाया
परं जिन्होंने ऊँगली पकड़ चलना सिखाया
उनको मुंह से बोलकर भी ना बुलाया ,
देसी भी आये विदेशी भी बुलाये
दोस्त भी आये दुश्मन भी बुलाए
सभी नाते रिश्तेदार घर बैठे रहे
अपने बुलावे की आस लगाए 
पर जिन्होंने पेट काटकर निवाले खिलाये
उनको भी ना निमंत्रण भिजवाया ,
जिस व्यक्ति ने इतने बड़े समारोह में
अपने परिवार वालों को नहीं बुलाया
माली हालत कमजोर होने के कारण
भाई ,बहन भाभी ,भतीजे ,भतीजी जैसे
ना भूलने वाले रिश्तों को भी भुलाया ,
और तो और जो पत्नी पिछले ४३ वर्ष से
पतिव्रत धर्म का पालन कर रही है
मोदी जी को पति मान व्रत कर रही है
उसे भी समारोह तक  में नहीं बुलाया ,
में कैसे विश्वास  करूँ कि वो व्यक्ति
देश को नै दिशा और दशा दे पायेगा |


















Thursday, May 22, 2014

वाणी से क्या क्या और क्योँ निकलता है

वाणी से क्या क्या और क्योँ निकलता है ,
वाणी वही  सब कुछ उगलती है जो कुछ व्यक्ति के ह्रदय में भरा होता है ,यदि ह्रदय में गंदगी भरी है तो वो गन्दी गन्दी ,बुरी बुरी गालियों का प्रयोग करता है जैसा की हम कुछ मित्रों को फेस बुक पर लिखते हुए देख चुके हैं ,यदि प्रेम भरा है तो वो प्रेम पूर्ण कविताएँ और विचार प्रस्तुत करते हैं ,यदि क्रोध भरा है तो ज्वलनशील विचारों से फेसबुक के पन्नों को जलाकर राख कर देते हैं ,यदि वीरता और शौर्य उनके ह्रदय में है तो वो वीरत्व से परिपूर्ण लेख लिखते हैं ,यदि जिनका ह्रदय राजनीति से ओतप्रोत है तो वो राजनितिक घटनाओं और संभावनाओं का जिक्र ही करते हैं ,कहने का तातपर्य यही है वाणी ,ह्रदय रुपी शब्दकोश से चुने हुए शब्दों को ही प्रसारित करता है अन्य कुछ नहीं ,
परन्तु कुछ लोग बहुत ही समझदार होते हैं उनके पास अच्छे शब्द ना होते हुए भी वो जो भी टूटे फूटे शब्द होते हैं उनको ही जोड़ तोड़ करके अच्छे शब्दों की माला बनाकर अपनी वाणी से प्रस्तुत कर देते हैं फिर वाणी भी उनकी दासता स्वीकार कर लेती है |

Monday, May 19, 2014

एक वर्ण ऐसा भी है

हिन्दूओं को ऋषि मुनिओं ने चार वर्णों में बाँट दिया था ,जिनमे प्रमुख ,१ क्षत्रिय २ पंडित ३वैश्य ४ शूद्र थे ,ये सभी वर्ण युगों से अपने कर्मों के साथ साथ देश और प्रदेश के लाभ हेतु समय असमय या कोई कठिनाई उत्पन्न होने पर अन्य कार्य भी कर लेते थे पर अपना मुख्य कार्य अवश्य करते थे  ,पर अब ये सभी वर्ण सभी कार्य ,चाहे सामाजिक हों या राजनितिक अथवा व्यापारिक सब कुछ कर लेते हैं और राजनीति में तो बहुत ही बढ़चढ़ कर पार्ट अदा करते हैं ,
परन्तु इनमे एक वर्ण ऐसा भी है जो अपनी मान मर्यादा ,गौरव ,अपना इतिहास ,अपनी राजनीतिक आकांक्षा ,अपनी महत्त्वाकांक्षाओं को भूलकर अपने रक्त की ऊष्मा को बरकरार रखकर अपने ही रक्त का रक्तं पिपाशु बनकर दुसरे वर्णों ,दूसरी राजनितिक पार्टियों ,चाहे वो कांग्रेस हो या भाजपा अथवा बसपा या सपा अथवा कोई भी अन्य उन सभी के सार्वभोमियों ,अध्यक्षों ,नेताओं ,नेत्रियों ,के हाथों अथवा इशारों तक की कठपुतली बनकर अपने ही रक्त को भी हल्दीघाटी में हरवाकर संकोच नहीं कर रहा है ,जो कार्य पहले भाट,, चारण ,कवि किया करते थे वो कार्य भी आज यही वर्ण कर रहा है ,और आनंदित करने वाली बात ये है की उनको लज्जा नाम की चीज नहीं है अपितु फक्र महसूस कर रहे हैं ,
आखिर  क्योँ ,इस  वर्ण को ऐसा क्या हो गया है जब की धनाभाव भी नहीं है ,शिक्षा का अभाव भी नहीं है ,शक्ति का अभाव भी नहीं है ,शौर्यता का अभाव नहीं है ,कहने कहने का तातपर्य है की किसी चीज का भी अभाव नहीं है यदि अभाव है तो संगठन का ,एकता का ,जो आज ५०० वर्षों से नहीं हो पा रहा है ,
तो क्या ये वर्ण एक दिन ऐसे ही रेंगता हुआ और जलालत भरी जिंदगी जीता हुआ काल कवलित हो जाएगा ,या कोई भीष्म इसे फिर से जीवन दिलवा सकेगा ,शायद नहीं ,क्योँकि कोई किसी की सुनता ही नहीं ,और जहां कोई किसी की सुनता नहीं तो वहाँ ना तो कोई अवतार हो सकता है और नाहीं कोई नेता और नाही कोई उबारने वाला ,जय श्री राम












और एक

Friday, May 16, 2014

काल चक्र योग को कोटि कोटि बधाई

आज काल चक्र योग ने ,शुक्र शनि ,राहु ,केतु के भरपूर सहयोग से भारत भू पर अपना सम्पूर्ण कार्य भलीभांति फलीभूत कर दिया ,अब भविष्य की गतिविधियाँ क्या और कैसे प्रसारित होंगी,ये ज्येष्ठ मास सम्पूर्ण वृतांत सहित निर्धारित करेगा जो एक वर्ष ४ मॉस १६ दिन तक प्रभावी होगा ,जय श्री राम

Wednesday, May 14, 2014

आज गुजरात में भाजपा की बैठक में क्या हुआ ,
आडवाणी जी भी अड़ गए
जोशी जी को आ गया जोश
सुषमा धीरे धीरे सिसक रहीं
मोदी के  जी   उड़ गए होश  ,
जेटली जी खिसियाते रहे
राजनाथ जी मिमियाते रहे
कोई किसी की सुनता नहीं
कैसे चलाएंगे सम्पूर्ण देश |

मैंने हमेशा अपनी जिंदगी को
उन्ही लोगों के हवाले किया ,
जिनसे सदा मै वफ़ा करता रहा
पर वो मुझे दगा ही देते रहे ,
मैं उन्हें अमृत पिलाता रहा
फिर भी वो जहर उगलते रहे
जब मुझे उनकी जरुरत पड़ी
तो सब अहसान फरामोश हो गए |

Friday, May 9, 2014

मिडिया बिकाऊ है या नहीं

ये तो अब सिद्ध हो गया की हमारे देश का मीडिया बिकाऊ नहीं है चाहे कोई कितने ही पैसे का लालच क्योँ न दे क्योंकि अभी लोकसभा के चुनावों में एक जानी मानी पार्टी ने मीडिया को खरीदने की बहुत कोशिश की पर खरीद ना सके वो बात दीगर है की जो उन्होंने देखा वो ही दिखाया और जो नहीं देखा वो नहीं दिखाया ,जैसे की उस पार्टी के कैंडिडेट पर कहाँ जूता फेंका  गया ,कहाँ पर चांटा मारा गया ,कहाँ काले झंडे दिखाए गए ,कहाँ पर पत्थर मारे गए ,कहाँ पर उनकी पार्टी ने गुंडा गर्दी की ,कहाँ पर उनके गुर्गों ने गालियां दीं ,कहाँ पर शराब बांटी गई ,ये सब मीडिया ने नहीं देखा तो उन्होंने नहीं दिखाया ,और उन्होंने अपार भीड़ देखि ,रोड शो देखा ,कर्नल निजामुद्दीन के पैर छूटे हुए देखा ,उनके कैंडिडेट की तालियां और वाह वाही देखि ,तो वो दिखा दी ,अब वो वाही तो दिखाएँगे जो देखेंगे ,जो देखा ही नहीं उसे कैसे दिखाएँगे तो भाई मीडिया पर बिकने का आरोप लगाना बेतुका है और यदि बहती गंगा मैया में उन्होंने भी हाथ धो लिए तो कौन सा गुनाह कर दिया ,कोई रोजाना तो चुनाव होते नहीं ऐसे चुनाव तो ५ साल में १ बार ही होते है तो भाई कमाने का मौका तो मिलना भी चाहियें ,
पर हाँ एक बात अवश्य देखि गई की कुछ चैनल ,केवल आजतक को छोड़कर ज्यादातर केजरीवाल और कांग्रेस के मामले में काफी चुप्पी साढ़े बैठे थे पता नहीं क्योँ ,इनसे इनकी नाराजगी क्युओं थी इस बार ,चलो केजरीवाल जी तो बेचारे गरीब की जोरू थे ,पर कांग्रेस तो ऐसी नहीं थी उनके साथ भी मीडिया का सौतेला व्यवहार क्योँ ,

Wednesday, May 7, 2014

प्रियंका वढेरा ने मोदी जी को कहा ,

प्रियंका वढेरा ने कहा मोदी जी के बारे में की वो निचले स्तर की राजनीती करते हैं ,
तो मोदी जी ने प्रियंका की बात का इतना बुरा माना की वो बोले कि मै नीची जाती से आता हूँ इसलिए निचले स्तर कि राजनीति करता हूँ ,और प्रियंका अब जाति बिरादरी कि ओछी राजनीति पर उत्तर आई है ,यद्द्य्पी उन्होंने ऐसा कहकर दलित और बेक वर्ड का कार्ड खेलना चाहा और कांग्रेस को नुक्सान पहुचना चाहा पर वो ही उनके गले कि हड्डी बन गया और मायावती ने काफी खरी खोटी सूना दी और फिर मोदी ठन्डे हो गए ,अब वो बेचारे क्या करें ,अब तो उनको अपनी जाति भी बतानी पड़ेगी |जय श्री राम

मायावती जी ने मोदी जी के बारे में क्या कहा ?

बी एस पी सुप्रीमो मायावती जी ने ने मोदी जी के बारे में कहा की यदि मोदी जी कहते हैं की वो नीची जाति से आते हैं और निचले स्टार की राजनीति करते हैं तो फिर बता क्योँ नहीं देते की वो कौन सी नीची जाति है जिससे वो आते हैं फिर मोदी (बनिया )जाति का तमगा लगा कर क्योँ घुमते हैं ,अब या तो मोदी में दिमाग नहीं है या फिर बौखला गए हैं ,या फिर जनता जनार्दन को कुछ बना रहे हैं ,यानी के दोनों हाथों में लड्डू लेकर चल रहे हैं ,ये तो धोखा है ,

Saturday, May 3, 2014

एक नारा कितना सत्य कितना असत्य ,हिन्दू मुस्लिम भाई भाई पार्ट ३

एक नारा कितना सत्य कितना असत्य हिन्दू मुस्लिम भाई भाई ,पार्ट ३
मुगलों के समय में हिन्दुओं से बने (कनवर्टेड) मुसलमान आज सम्पूर्ण भारत के ही नहीं बल्कि पाक और बँगला देश के मुसलमान भी हमारे कनवर्टेड भाई हैं ,क्योंकि ये दोनों पार्ट तो भारत में से ही टूट कर बने हैं कोई अलग से तो आये नहीं ,इसका मतलब वो भी हमारे भाई ही हैं ,यदि जरुरत है तो मुल्को को और बाशिंदों को दूरंदेशी की ,मुहब्बत के पैगाम की ,अब सवाल उठता है की ये हिँदु और मुसलमान दोनों एक क्योँ नहीं होते या हो सकते ,इसके बहुत से कारण हैं ,जो निम्नलिखित हैं |
समय का अंतराल जो की थोड़ा बहुत नहीं बल्कि ४०० साल का है जो की एक मायना रखता है ,उसको भरना किसी के भी हिम्मतकी  से बाहर की बात है ,
दुसरे भाई भइयों के झगडे मिल बैठकर नहीं निबटते वो ज्यादातर बन्दूक और तलवारो से ही निबटाए जाते हैं ,
तीसरे नेता जो अपना वोट बैंक समझकर चलते हैं और प्रत्येक ५ वर्ष बाद उनको उकसाते हैं ,लड़वाते है ,हिँदु ,मुस्लिम झगड़ों से राजनीती चमकाते हैं वो एक नहीं होने देते ,और हिँदु मुस्लिम दोनों ही इनकी चालों को समझ नहीं पाते ,इस लिए  वो इनको कभी भी भाई भाई बनने ही नहीं देंगे ,
चौथे हिँदु धर्माधिकारी ,शंकराचर्य ,पीठाधीश ,पुजारी और मुस्लिम धर्माधिकारी काजी ,हाजी उलेमा ,ये कभी भी इनको एक नहीं होने देंगे क्योँकि इनकी रोजी रोटी ही इन लोगों से चलती है और मान सम्मान भी मिलता है इनकी पूजा होती है ,उनको नवाजा जाता है ,
दोनों को प्रथाओं में कुछ ना कुछ अंतर भी आ ही गया है उनको दूर करना बड़ा मुश्किल है ,इबादत का तरीका भी भी अलग हो गया है ,उनमे परिवर्तन करना बड़ा मुश्किल है ,
फिर आपसी बैर इतना लंबा और गहरा हो चुका है की उसे हल करना भी मुश्किल है ,
 अब इसका हल मात्र एक ही है की हम सब कुछ भूलकर शांति के साथ रहें और खुद को एक दुसरे का भाई और परिवार समझे ,जिस प्रकार से  एक घाव को भरने में समय लगता है इसी प्रकार ये घाव  भी एक ना एक दिन बुद्धि चातुर्य से भर ही जाएगा  ,कोशिश करने में क्या बुराई है ,कहते हैं की "करात करात अभ्यास के जड़मति हॉट सुजान ,रस्सी आवत जात ते सील पे होत निशाँ "
जब भाई भाइयों में दुश्मनी हो सकती है तो एक दिन मित्रता भाई बंधुत्व की प्रेरणा भी जाग्रत हो सकती है ऐसा कहीं नहीं लिखा कि दो भाई कभी मिल ही नहीं सकते ,कुछ लोग आज भी मिलने के प्रयास कर रहे हैं परन्तु उनको अभी भी हिन्दू जनमत कि और से ही अनुमति नहीं मिल पाई है ,उदाहरणार्थ ,हरयाणा के अंदर मेव जाति है जो कि काफी तादाद में हैं वो मुस्लिम हैं वो खुद को क्षत्रिय कहते हैं उनके घरों में महाराणा प्रताप कि फोटो लगी भी मिलेंगी में भी कई बार उनसे मिला हूँ उन्होंने क्षत्रियों के साथ हिंदुत्व स्वीकार करने के लिए बहुत बार बात कि हैऔर वो हमारे क्षत्रिय महासम्मेलनों में शिरकत भी कर चुके हैं ,जैसे कि लाल किले के पीछे जो सम्मेलन हुआ था उसमे भी हजारों कि संख्या में आये थे ,और उनको बार बार मिलाने के लिए कहने के बाद हमारे राजपूत आकाओं ने जिनमे डॉ करण सिंह ,राजा दिग्विजय सिंह ,श्री अर्जुन सिंह जी श्री भैरों सिंह शेखावत और भी कई बड़े बड़े नेता थे इन्होने घोषणा तक नहीं की,ये पहला चरण था ,परन्तु पूर्ण नहीं हुआ ,वो लोग आज भी पछताते हैं ,कहने का तातपर्य है की शुरुआत तक नहीं की ,फिर सोचिये की मुस्लिम भाई हिन्दुओं से कैसे मिलेंगे जब हिन्दू ही उनको मिलाने को तैयार नहीं हैं ,
वैसे जो हिन्दू या मुस्लिम लोग अपने आपको बहुत बड़े आदमी कहते हैं या वास्तव में हैं भी वो तो धीरे धीरे शादियां तक करके एक दुसरे के पास खिसक रहे हैं जैसे की ,
सिकंदर बख्त की पत्नी कृष्णा बख्त ,हिन्दू थी  ,सचिन पायलट की पत्नी शेख अब्दुल्ला की बेटी है रिर्टिक रोशन की पत्नी  फिरोज खान की बेटी है शीला दिक्सित की बेटी का पति मुस्लिम है ,इंदिरा गांधी का पति फिरोज खान मुस्लिम थे ,जोशी की बेटी शाहनवाज खान की पत्नी है ,सलमान खान अपने घर में सभी हिन्दू रीती रिवाज निभाते हैं यहाँ तक की उनके रिस्तेदार भी ,शाहरुख़ खान की पत्नी हिन्दू हैं ,कहने का तातपर्य है ऐसे बहुत से उदाहरण मिल जाएंगे ,और हमारे गाँवों में तो खासकर सभी हिन्दू मुस्लिम एक दुसरे के त्यौहार होली ,दिवाली ईद ,मिल जुलकर ही आज भी मनाते हैं धीरे धीरे जिस बिमारी को को लगे ४०० साल हो गए उसे ठीक होने में भी ४०० या ५०० साल तो लग ही सकते हैं |
वैसे भी किसी भी राज्य में चले जाइए और वहां के हिन्दू मुस्लिम दोनों को देखिये उनका खाना पीना ,पहनना ओढ़ना ,बोल चाल भाषा ,व्यवहार तीज त्यौहार शौक ,संगीत ,सभी एक जैसे ही मिलेंगे जिससे पता लगता है किइनमे जो समानता है वो भी दर्शाती है कि वास्तव में हिन्दू मुस्लिम दोनों एक ही सिक्के के पहलू हैं ,यानी कि इनकी पैदाइश कहीं एक ही जगह से हुई होगी ,इसमें ज़रा भी असत्य नहीं है कि ये भाई भाई नहीं है |
यदि हमारे देश के नेता ,धर्माधिकारी ,चाहें तो हिन्दू मुस्लिम भाई भाई के नारे को सकारात्मक रूप दे सकते हैं और आपसी जो झगडे आज खड़े हैं वो सब समाप्त हो सकते हैं ,और अगर ये इनको मिलाने के लिए पॉजिटिव सोच बनाये तो काम आसान हो जाएगा |अंत में ,
                                                           हिन्दू मुस्लिम भाई भाई






















 


















Friday, May 2, 2014

एक नारा कितना सत्य कितना असत्य हिन्दू मुस्लिम भाई भाई (पार्ट २)

एक नारा  कितना सत्य कितना असत्य हिन्दू मुस्लिम भाई भाई पार्ट २
दरअसल भारत में मुस्लिम ११ वि शताब्दी के बाद आने शुरू हुए ,पहले वो अफगानिस्तान तक ही सिमित थे ,क्योँकि उस समय में ईरान ईराक ,अरब ,अफगानिस्तान जॉर्डन या जितने भी मुस्लिम देश थे वो सभी रेतीले थे वहाँ पर कृषि योग्य भी खेती नहीं थी ,फल  फ्रूट ,और कुछ मसाले आदि का या पशु पालन का व्यापार होता था जिसमे की भेड़ ,ऊंट ,भैंस आदि प्रमुख थे ,हालात ख़राब थे भुखमरी जैसा हाल होता था ऐसे उनको पता चला की पास में ही भारत नाम का एक देश है जो की सोने की चिड़िया भी है और वहां के राजा महाराजा मात्र आपस में लड़ने भिड़ने के सिवाय और कुछ नहीं करते ,आराम तालाब थे ,ऐसे में उन्होंने इसका फायदा उठाना शुरू कर दिया और झुंडों या कबीलों के रूप में भारत में प्रवेश करने लगे उनके पास बहुत ही बढ़िया नस्ल के अरबी घोड़े होते थे ,और उन्होंने भारत पर धीरे धीरे हमले करने शुरू कर दिए और छोटी बड़ी लूट मार करके भाग जाते थे फिर कुछ समय बाद आ जाते थे  कुछ समय तक ऐसे ही चलता रहा ,और उसके बाद ,
पृथ्वीराज चौहान के समय में मुहम्मद गौरी अफगानिस्तान से १७ बार भारत में आया और उसको पृथ्वीराज चौहान ने १६ बार हराकर वापस भेज दिया परन्तु १७ वि बार पृथ्वीराज मुहम्मद गौरी के हत्थे चढ़ गया और ११९२ में उनका निधन हो गया और गौरी भी वापस चला गया ,उसके बादऔर  मुस्लिम बादशाह भारत में आते रहे जैसे शेरशाह सूरी ,नादिर शाह ,ख़िलजी ,लोदी ,परन्तु एक बात जरूर थी क़ि तब तक भारत में मुस्लिम कौम का नाम भी नहीं था परन्तु उसके बाद ,
मुग़ल शासक बाबर तीसरी बार भारत में १५२० ,१५२१ में आया और जबरदस्त हमला किया माल मत्ता लूटा और जल्दी ही कंधार  में कुछ गड़बड़ी होने के कारण वापस चला गया ,कुछ थोड़े बहुत सैनिक भारत में छोड़ गया ,उसके बाद फिर १५२६ में लौटा और पानीपत में अब्राहिम लोदी को हराया ,उसके बाद उनकी मृत्यु हो गई और राज काज उनके पुत्र हुमायु ने संभाल लिया उसके बाद जलालुद्दीन अकबर जो क़ि एक धार्मिक और नेक बादशाह था उसने अपने धर्म को बढ़ावा दिया पर मुहब्बत के पैगाम के साथ जिसके कारण मुग़ल   खानदान ने भारत में अपने पैर जमाने शुरू कर दिए ,उसके बाद जहांगीर और शाहजहाँ ,और फिर एक क्रूर बादशाह ओरंगजेब जिसने सबसे लंबा शासन किया और कट्टरता के साथ किया उसने अपने काल में एक प्रण कर लिया था क़ि सवा मन जनेऊ रोजाना उतरवाने  हैं यानी क़ि जिसने जनेऊ जान बचाने के लिएउतार दिया और  मुस्लिम धर्म स्वीकार कर लिया तो वो बच गया वरना जिसने नहीं उतारा और मुस्लिमधर्मनहीं स्वीकारा उसका कत्ल कर दिया गया ,इस प्रकार प्रतिदिन हजारों लाखों क़ि संख्या में हिन्दू लोग धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बनने लगे ,और ये सिलसिला जब तक ओरंगजेब ज़िंदा रहा और शासन करता रहा ,चलता रहा इस प्रकार ये सिलसिला १७०७ में ओरंगजेब क़ि मृत्यु के बाद रुका ,ओरंगजेब की मृत्यु के समय भी भारत में मुगलों की संख्या ना के बराबर थी क्योंकि या तो राजशाही लोग थे अथवा सैनिक ,जो सैनिक थे वो तो ओरंगजेब की मृत्यु के बाद होने वाली लड़ाइयों में काम आ गए और बादशाह के कुटुम्बी राजशाही लोग धीरे धीरे समाप्त होते चले गए और मीरजाफर के बाद तो मानो सब कुछ मुग़ल सामराज्य का सफाया ही हो गया और आज भी यदि मुग़ल सल्तनत के कुछ वारिस निजामुद्दीन में रहते हैं जो लालकिले का कुछ प्रिवीपरश जैसा पैसा लेने के लिए दिल्ली सरकार के पास आते है जो की ना के बराबर है ,या कुछ मुगलों के वारिस हैदराबाद में रहते हैं वरना मेरी जानकारी के अनुसार मुगलई खानदान हिन्दुस्तान से लगभग समाप्त हो चुका है ,यदि किसी भाई के पास कोई जानकारी हो तो मुझे सूचित करें ,
मेरा कहने का तातपर्य है क़ि ये वो ही हमारे हिन्दू भाई है जो ओरंगजेब क़ि तलवार के डर से  उस समय में मुस्लिम बन गए थे पर इतना समय लगभग ४००  साल बीत जाने के कारण ये अपने नए धर्म में इतने घुल मिल गए क़ि अब वो अपने पुराने धर्म के बारे में सोच भी नहीं सकते ,पर जो जाती सूचक शब्द आज भी उनके साथ लगे हैं वो इनका पीछा नहीं छोड़ते  और छोड़ भी नहीं सकते क्योँकि उस धर्म के उपदेश ,प्रथाएं ,नियम इबादत  सब उनकी जिंदगी में शर्बत में चीनी क़ि तरह मिल गए हैं |पर मुख्य मुद्दा ये ही है की आज जो मुस्लिम भाई भारत में रह रहे हैं ये लगभग सभी हिन्दू से कनवर्टेड मुस्लिम हैं जो ओरंगजेब के समय में हुए थे
अब ये क्योँ नहीं मिल सकते या इनको कौन मिलने नहीं देना चाहते ,या इनका मन क्या कहता है ,हिन्दू मुस्लिम के प्यार में अड़ंगा क्योँ है , इनकी मजबूरियाँ क्या हैं ,दोनों में समानताएं कयांहैं ,














Thursday, May 1, 2014

एक नारा,कितना सत्य ,कितना असत्य ,

आपने अक्सर प्रत्येक नेता के मुंह से ,सामाजिक कार्यकर्ताओं के मुख से ,और आम आदमी के भी मुख से चाहे वो हिन्दू है या मुसलमान ,कहने का तातपर्य है की भारत का हर व्यक्ति ये कहता भी है .मानता भी है और करके दिखाने की कोशिश भी करता है ,पर फिर भी बुरा वक्त आने पर उस पर अमल नहीं करता ,तो भाइयोंवो नारा है ,"हिन्दू मुस्लिम भाई भाई "
और सत्य भी यही है की आज जितने भी हिन्दू या मुस्लिम भारत में रहते हैं वो वास्तव में ही आपस में भाई भाई ही है बल्कि में तो कहूँगा की एक ही खानदान से संबंधित हैं उसके बावजूद हम एक दुसरे के खून के प्यासे बने हुए हैं आखिर क्योँ ,हम हक़ीक़त को जानने कि कोशिश क्योँ नहीं करते  ,हाँ ये अवश्य है कि हमको एक दुसरे से अलग हुए ४०० वर्ष या उससे भी ज्यादा बीत चुके हैं ,अब आप कुछ  उदाहरण देखिये जिनसे वास्तविकता का पत्ता चलता है और हम जानते हैं कि किसी वक्त हम आपस में भाई भाई ही थे ,इसमें लेशमात्र भी असत्य नहीं है |
कांति प्रकाश चौहान ...............लियाकत अली चौहान
विजय मालिक .....................साजिद मालिक
राजेंद्र शेखावत ......................मुहम्मद शमीम शेखावत 
भगवती प्रसाद सकलानी........कामरान सकलानी
नरेंद्र सिंह निर्वाण .................मियाँ कासिम निर्वाण
महेंद्र राजपूत .......................जफ़र खान राजपूत
अतर सिंह लोधी .................इसरार मियाँ लोधी
और पता नहीं कितने ही नाम हैं जो आपको ऐसे लगेंगे की ये सब भाई भाई ही है अब आप सोचिये की दोनों अलग अलग हिन्दू और मुस्लिम होते हुए भी जाति सूचक शब्द कैसे एक हो गए इस बात से तो लगता है किकहीं ना कहीं दोनों में कुछ तो मेल है |
हक़ीक़त क्या है हम नेक्स्ट लेख में लिखेंगे ,आप अपनी राय देनी चाहे तो दे सकते हैं 











Monday, April 28, 2014

मोदी &कंपनी ऐन डी ऐ का शेयर २७४ से घटकर २५२ रह गया ,

मोदी &कंपनी ,ऐन डी ऐ का शेयर २७४ से घटकर २५२ रह गया ,जानते हैं क्योँ ?
क्योँकि बनारस की रैली की भीड़ देखकर मोदी जी का अहंकार उनके सर पर चढ़कर बोलने लगा और उनकी ढाई गज की जुबान बिना कुछ सोचे समझे जो मन में आया उगलने लगी ,और वो ये भी भूल गए की वो भावी प्रधानमंत्री हैं इसलिए पद की गरिमा के अनुसार उनको संयम बनाकर रखना पडेगा ,आदरणीय मनमोहन सिंह जी की तरह ,पर वो मूक प्रधान मंत्री तो बन्ना ही नहीं चाहते इसलिए उन्होंने ,दुसरे नेताओं  पर अनर्गल आरोप लगाने शुरू कर दिए जैसे की प्रियंका के पति वडेरा,भाई राहुल ,माँ सोनिया ,केजरीवाल ,ममता बनर्जी ,आजमखान ,फारुख अब्दुल्ला ,अहमद पटेल ,म्युलायम सिंह यादव ,नितीशकुमार ,लालू यादव ,और यहां तक कहा की यदि ऐन डी ऐ की सरकार आई तो ये सभी जेल किम हवा खाएंगे ,जब मोदी जी ने इतना कहा तो उन सभी ने भी मोदी और भाजपा पर आरोप लगाने शुरू कर दिए वो कब चुप बैठने वाले थे उनमे प्रियंका मोदी पर भारी पड़गई और ममता भी भारी पड़ गई ,इसने मोदी & कंपनी की धज्जियां उड़ा दी ,जिसका परिणाम पंजाब की  मोदी जी की रैली में भी देखने को मिला वहाँ आदमी तो क्या परिंदे भी नहीं थे ,कारन था जब मोदी के विपक्षियों ने धज्जियां उड़ाई तो जनता में संदेश गलत गया और जनता इस तुरुप  के पत्ते को समझने लगी जिसके कारन इनका शेयर गिरने लगा ,और यदि मोदी जी ने ढाई गज की जुबान बंद ना की तो हो सकता है इनका शेयर कहीं २०० को ही ना छूने लगे ,ये जनता है सब जानती है फिर मोदी का ५६ इंच का सीना भी कुछ काम नहीं आएगा,
दरअसल आर एस एस ने जिस रेस के घोड़े पे दांव लगाया उसे वैसे खाना पीना ,कपडे पहनना ,बोलना भाषण देना तो सबकुछ आता है पर उसकी ढाई गज की जुबान जब कैंचिं की तरह चलती है तो नुक्सान दे जाती है इसलियें उस जुबान पर लगाम लगानी चाहिए थी और वो भी इसलिए है क्योँकि उनकी तालीम कुछ  कम है यदि तालीम थोड़ी ज्यादा होती तो ये ओवर कॉन्फिडेंस की नौबत नहीं आती और शेयर ना गिरता और सरकार भी बन ही जाती ,अभी तो ससय ही है |












नेता क्या क्या कहते हैं मोदी जी के बारे में

शंकराचार्य  जी ने कहा कि, "एक चाय बेचने वाला देश का प्रधान मंत्री नहीं बन सकता ,
प्रियंका जी ने कहा कि , देश ५६ इंच की छाती से नहीं चलता उसको चलाने के लिए भेजा चाहिए ,अब पता
                                    नहीं वो मोदी जी के पास है या नहीं ,
प्रियंका जी नेम कहा कि ,"नारी कि रक्षा का दम्भ भरने वाले मोदी छुप छुप कर नारीयों के फोन सुनते हैं ,
आजम खान जीमने कहा ,"खून करने वाले को क्या खुनी ना कहूँ तो और क्या कहूँ ,
सोनिया जी ने कहा कि ,"मोदी खून के सौदागर हैं और गोधरा काण्ड को लोग अभी भूले नहीं हैं ,
मुलायम सिंह जी ने कहा कि ,"मोदी के पास काम से काम ४०० कुर्ते  यानी कि इतने जोड़े हैं ,दिन में दस दस
                                      बार कपडे बदलते हैं ,
रशीद अल्वी जी ने कहा कि ,"मोदी जी ,भाजपा के पास पैसे है खर्च करने के लिए हमारे पास इतने पैसे नहीं हैं ,
लालू जी ने कहा कि ,"      मोदी वोदि कुछ नहीं है वो तो नोटंकीवा है लुटेरा ,
शेख अब्दुल्ला जी ने कहा कि ,"यदि मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो काश्मीर पाकिस्तान को चला जाएगा ,
महाराजा गायकवाड़ ने कहा कि ,"मोदी ने गुजरात का कोई विकाश नहीं किया ये सब सफ़ेद झूठ है ,
उमा जी ने कहा था कि , "    मोदी विकास नहीं विनाश पुरुष है ,
आडवाणी जी ने राजनाथ जी को लिखा था कि ,'"अब भाजपा में रहते हुए मेरा दम घुट रहा है .
सुषमा स्वराज ने कहा कि ,"मेरे मना करने के बाद भी मोदी जी बहुत से ऐरे गेरे नेताओं को स्थान दिया ,
एक और नेता ने कहा कि ,'मोदी जी अपना घर तो संभाल ना सके वो देश को क्या संभालेंगे ,
एक और नेता जी ने कहा कि ,"सोनिया जी कि चाबी का गुड्डा जाएगा और आर एस एस क़ी चाबी का गुड्डा
                                        आ जाएगा ,,बात तो वहीँ क़ी वहीँ रहेगी ,
मायावती जी ने कहा क़ी ,"हम किसी भी हालात में मोदी को देश का प्रधानमंत्री नहीं बनने देंगे ,
एक मौलाना साहब ने कहा कि," मोदी फिरकापरस्त व्यक्ति है जिस पर यकीन नहीं किया जा सकता ,
बनारस के चुन्नू महाराज जी ने कहा कि ,"काम निकल गया पहिचानते नहीं" ,दरअसल उनको नोमनेशन वाले दिन
                                                  नाम उद्धृत करने हेतु लाया गया था पर उसके बाद नाही उनसे बात  नाही
                                                    उनको घर छुड़वाया
एक मुस्लिम नेता ने कहा कि,यदि मोदी देश के प्रधान मंत्री बने तो देश में हिन्दू ,मुस्लिम झगडे शुरू हो जाएंगे ,



















Saturday, April 26, 2014

एक लोकोक्ति

जो व्यक्ति या नेता अपने थोड़े से फायदे के लिए झूठे ,टुच्चे ,लुच्चे और कमीने ,बिना पैंदी के (लोटा राम )अथवा परिवार द्रोही ,राज द्रोही देशद्रोही ,स्वार्थ के लिए दल बदलू ,व्यक्ति या नेता से मित्रता करता है वो व्यक्ति या नेता कभी भी वचबद्ध या बुद्धिमान ,देश भक्त या देश प्रेमी कभी भी नहीं हो सकता और देश उसके हाथों में कभी भी सुरक्षित नहीं रह सकता और कभी भी किसी भी समाज के प्रति उत्तरदायित्व को सम्पूर्ण नहीं कर सकता ,यदि हो सके तो उस वयक्ति के पदचिन्हों का अनुसरण ना करें वरना उसके साथ साथ ,उसके अनुयायियों का भी हश्र उसके जैसा ही पतनगामी होगा |   
                                                     " छोटा मुंह और बड़ी बात "

Friday, April 25, 2014

वाह रे केजरीवाल

भारत माँ के लाल
तूने कर दिया कमाल
भाजपा और कोंग्रेश
दोनों को धकिया कर
कर दिया धमाल
वाह रेअरविन्द  केजरीवाल ,
दिल्ली में सरकार बनाकर
४९ दिन सरकार चलाकर
भ्र्ष्टाचारियों को सबक सिखाकर
घोटाले बाजों को चने चबवाकर
सबका किया हाल बेहाल
वाह रे अरविन्द केजरीवाल 
बिजली के कनेक्शन जुड़वाकर
पानी का समाधान कराकर
रातों रात रेन बसेरे बनवाकर
गरीबों को सर्दी से बचाकर
बन गए उनके लिए ढाल
वाह रे अरविन्द केजरीवाल ,

मात्र ४९ दिन के राज काज से
दिल्ली में आ गए भूचाल
आपकी गवर्नेस को देखकर
विपक्षियों के हो गए गाल लाल
फिर दिखलाया उन्होंने
अपना असल रूप विकराल
वाह रे अरविन्द केजरीवाल ,
विधान सभा में शोर मचाया
अपशब्दों का जाल फैलाया
कांग्रेस ,भाजपा दोनों ने मिलकर
केजरीवाल को खूब छकाया
स्पीकर के अधिकार छीनकर
उसको भी खूब रुलाया
कुछ ना बोला धरती का लाल
वाह रे अरविन्द केजरीवाल 
  सरकारी दफ्तरों में अब तक
चल रही थे जो कछुआआ  चाल
तुम्हारी कार्य शैली देखकर
सभी चलने लगे खरगोश चाल
दलाली हुई बंद भागे सभी दलाल
वाह रे अरविन्द केजरीवाल
जनरल लोकपाल बिल को
विधान सभा में पेश कराकर
भाजपा और कांग्रेस से
बिल को सहमति ना पाकर
मुख्य मंत्री कुर्सी को ठोकर मारी
खुद को कर लिया स्वयं हलाल
वाह रे अरविन्द केजरीवाल |















Tuesday, April 22, 2014

मोदी जी काबिले तारीफ़

एक बात के लिए तो नरेंद्र मोदी जी तारीफ़ करनी पड़ेगी की लाइन में सबसे पीछे खड़े होने के बावजूद भाजपा के बड़े बड़े पुराने और नए धुरंधरों को धोबी पाट से  पटकी देकर सबसे आगे जाकर खड़े हो गए और सभी पुराने पापी जो प्रधानमंत्री बनने के ख्वाब देख रहे थे चारों खाने चित्त होकर चुप चाप खड़े होकर देखते रह गए और अब जो भी मोदी कहते हैं उन्हें केवल हाँ में सर हिलाना होता है ,
जजैसे कांग्रेस में सोनियाँजी के सामने कोई बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाता,अब भाजपा में भी मोदी जी के सामने नहीं बोल पायेगा ,अब आया असली लोकतंत्र ,मेरा भारत महान "

Monday, April 21, 2014

मोदी उवाच

जी हाँ मोदी जी कहते है कि:=     मोदी उवाच
आप मुझे वोट दो मैं आपका भाग्य बना दूंगा ,भाग्य बनाने में माहिर हूँ ,बहुत बड़े बड़े लोगों के भाग्य मैंने बना दिए और किसी को पता भी नहीं चला
मै देश की सेवा करने हेतु जीवन भर ब्रह्मचारी रहा रहा ,(पोल खुलने सेपहले कहा )वैसे स्नूपगेट में मुझ पर  आरोप लग रहे हैं
मैं वंशवाद  को बढ़ावा नहीं दूंगा चाहे कुछ भी हो जाए ,नहीं तो जनता मुझपर भी आरोप लगाएगी ,
मैंने ४५ साल से पत्नी से नाता नहीं रखा फिर शादी कैसी ,७ फ़ैरो से शादी हो गई पर गौना तो नहीं हुआ ,
मैंने बचपन में भुने चने खा खा कर जीवन यापन किया है ,तभी तो ६३ साल में जवानी फुट फुट कर निकल रही है
मैंने ट्रैन के डिब्बे में घूम घूम कर चाय बेचीं है ,खाली चाय ही या और भी कुछ बेचा था ,क्योँकि गुजरात की ट्रेनों में कुछ और भी बिकता है जिसको गांधी जी ने बेन करवा दिया था
मेरी माँ ने मुझे घरों में  झाड़ू और बर्तन मांजकर पाला पोषा ,तभी तो अहंकार फुट फुट कर भरा हुआ है
केजरीवाल तो सड़क पे झाड़ू लगाकर दिखा रहा है मैंने तो बचपन में माँ के साथ जाकर घरों में झाड़ू लगाकर देश की सेवा कीथी,और अब दिन में १० दस बार कपडे बदल कर देश की सेवा कर रहा हूँ ,बहुत कपडे हैं मेरे पर
आज तक गुजरात जितने भी किसान मर चुके हैं मर गए पर अब कोई भी किसान गुजरात में ही नहीं बल्कि देश में भी कोई किसान नहीं मरेगा ,तड़पने में तो कोई बुराई नहीं है ना ,
संविधान के दायरे में रहकर राम मंदिर अयोध्या में अवश्य बनेगा ,मैं बनवाऊंगा ,पर समय नहीं बताऊंगा
मैं देश को उस शिखर पर पहुंचा दूंगा जिसकी आपने कल्पना भी नहीं कि होगी ,वो समय बताएगा ,डूबोगे,या तेरोगे,या भागोगे ,
अब अच्छा समय आने वाला है ,क्योँकि मोदी जी अब आपके भगवान बन गए हैं ,
कांग्रेस ंकाऔर  कोई नाम लेने वाला नहीं मिलेगा , पप्पू बेचारा तो टॉफ़ी वाला है ,माँ का लाडला है ना ,
गुजरात मॉडल क्या है ?  मैं खुद गुजरात मॉडल हूँ आपको वो तो देखने से ही पता चल रहा होगा
सोनिया के दामाद वडेरा ने ५ साल में १ लाख के ३०० करोड़ बनाये,पर हमको बनाने नहीं आते तो क्या करें ,वैसे हमने भी पिछले १४ दिन में भागते भागते १४ लाख तो कमा ही लिए ,१० अप्रैल को मेरी कैपिटल १करोद ५१ लाख थी जो २४ अप्रैल को बढ़कर १ करोड़ ६५ लाख हो गई ,अब मैं ये नहीं बताऊंगा की मेरा बिज़नेस क्या है जिसमे इतना अच्छा प्रॉफिट है
मेरी माँ आज भी १०बाई १०  फ़ीट के कमरे में रहती है ,ये उनकी मजबूरी है क्योंकि सी एम की माँ है ना ,
भाई आज भी परचून कि दुकान करता है ,उसका भाग्य तो मै नहीं बदल सकता ,जैसा किया वैसा भर ,
लड़की बचाओ लड़की पढ़ाओ ,शादी करो ,छोड़ कर भाग जाओ ,और ब्रह्मचारी बन ,त्यागी बन जाओ ,
मई रास्ते में जाता हुआ यदि किसी से पानी भी पी लूँ तो सोचता हूँ कि उसका अहसान मंद हो गया ,अब उसको कितनी कहाँ जमीन दूँ ताकि उसका अहसान उत्तर जाय ,
मैं स्त्री रक्षा का परं लेकर आया हूँ और हमेशा रक्षा करूंगा ,पर शादी कभी नहीं करूंगा 
आर एस एस संगठन ही मेरा माँ बाप है ,मैं उसके लिए कुछ भी करने को तैयार हूँ ,एक सच्चे सेवक कि भांति ,
आदरणीय मोहन भगवत जी का वरदहस्त मेरे शीश पर है ,वैसे मेरी एक माँ गाव में भी रहती है ,


Thursday, April 17, 2014

हमारे नेता श्री नरेंद्र मोदी

आदरणीय नरेंद्र मोदी जी की एजुकेशनल क्वालिफिकेशन क्या है शायद उनके साथी नेता या समर्थक अथवा कार्यकर्ता कोई भी नहीं जानता, क्योँकि कोई बताता ही नहीं ,
हाँ एक दिन एक चैनल पर मोदी जी ने ये अवश्य कहा था कि उनकी प्रारम्भिक शिक्षा बड़ोदरा में हुई थी ,इससे लगता है कि वो ज्यादा पढ़े लिखे नहीं हैं ,
वैसे पढ़ते लिखते भी कैसे जो बच्चा दिन भर रेल के डिब्बे में चाय बेचेगा वो पढ़ेगा कब ,
वैसे भी उनको इसकी जरुरत भी नहीं थी क्योँकि वो तो योगी और त्यागी पुरुष हैं इसलिए उनको आंतरिक बुद्धि का भण्डार है ,
पत्नी यशोदा को शादी के तुरंत बाद उन्होंने छोड़ दिया क्योँकि ज्यादा समय अपने पास रखते तो २ ,४मुटमुन्ने पैदा हो जाते तो फिर देश कि सेवा कैसे करते और त्यागी पुरुष कैसे कहलाते ,
अपनी माता जी को इसलिए साथ  नहीं रखा क्योंकि और भी तो उनके २ भाई हैं उनका भी तो माँ के प्रति कुछ फर्ज बनता है या फिर सारा नरेंद्र जी ही करें ,ये क्या काम है कि साल में एक या दो बार मिल आते हैं ,आ था
भाइयों को इसलिए मुंह नहीं लगाया कि सब जानते हैं कि कोई भाई कभी किसी का हुआ है ,ओरंगजेब ने अपनेम सभी भाइयों को मरवा दिया था ,कहीं ऐसी कहानी मेरे साथ हो जाती तो देशआ गुजरात model कि सेवा कौन करता , और गुजरात को स्वर्ग इसलिए बना दिया क्योँकि  वो तो पहले से ही स्वर्ग जैसा था उसका नाम पहले सौराष्ट्र था ,पता है इसका मतलब क्या होता है ,सबसे अच्छा राष्ट्र या राज्य ,उसमे मैंने थोड़ी सी उठा पटक और कर दी और नाम दे दिया गुजरात मॉडल ,अब आप तो जानते ही है मेरे समर्थक कैसे हैं ,
वाराणसी से इसलिए लड़ रहा हूँ क्योँकि मुझे पता था कि शायद में बड़ोदरा सीट से या गुजरात में कहीं से ना जीत पाऊँ क्योँकि विधायक का चुनाव तो २५ या ३० हजार वोटों से जीता जा सकता है पर सांसद हेतु काम से काम ३ से ४ लाख वोट तो चाहिए ही ,तो हमने सोचा कि जोशी जी कि वाराणसी कि सीट सबसे अच्छी सीट है वहाँ से तो जीत ही जाएंगे ,पर ये क्या पता था कि ये झाड़ू वाला वहां भी पहुँच जाएगा फिर बड़ोदरा ही भागना पड़ा ,अब कहीं ना कहीं से तो जीत ही जाऊंगा
आपने भाजपा के सभी बुजुर्ग नेताओं को किनारे क्योँ कर दिया ,दरअसल ये लोग कुछ कर तो सकते नहीं ये रास्ते के रोड़े हैं इसलिए इनको हटाना जरूरी है ,अब अगली बार ये कान नहीं फटफटाएँगे
वैसे आर एस एस वालों ने क्या कहा ,उन्होंने कहा है कि जो चाहो सो करो ,चाहे जितना पैसा खर्च करो पर पी एम बनो
पर आपने १० १५ हजार करोड़ रुपया विज्ञापनों पर खर्च कर दिया इतना पैसा कहाँ से आ रहा है ,अब साड़ी बाते आपको क्योँ बता दूँ ,बाकी बाते पर्दानमंत्री बनने के बाद होगी |