Sunday, March 26, 2017

mera apna vichar

अक्सर आपने बहुत व्यक्तियों से सुना  होगा की प्रेम से दुश्मन को भी जीता जा सकता है परन्तु मैं ऐसा नहीं मानता क्योँकि मैंने आज तक ऐसा कोई वाकया नहीं देखा जहां पर किसी ने प्रेम से दुश्मन को जीता हो और यदि किसी ने जीत भी लिया तो, उस दुश्मन ने उसकी पीठ में छुरा ही भौंका है ,इसलिए मेरा निर्णय ये है की दुश्मन को सदैव शक्ति से ही जीता जा सकता है , और सदियों से ऐसा ही होता आया है इसलिए हम सबको भी पुरानी घटनाओं से सबक लेना चाहिए ।
अत: प्रेम से किसी प्रेमी को ही जीता  जा सकता है ,
और शक्ति से दुश्मनों को क्योँकि वो वही भाषा जानता है ।

ek vichar

आपके बुरे वक्त में भले ही कोई व्यक्ति आपकी सहायता ना करे परन्तु जब" उसको आपकी सहायता की जरूरत हो तो आप  उसकी जितनी भी सहायता हो सकती  है निसंकोच कीजिये ",पहल करने की जरूरत है और फिर परिणाम देखिये ।

Tuesday, March 21, 2017

k p uvach

शायद ये बात जवानी में अच्छी न लगे परन्तु बुढापे में अवश्य बात को याद करके रोओगे क्योँ ?
भाई ,बन्धुओं को अपना सर्वस्व और धन देने के बाद ,ब्याज के रूप में अपमान ,और मूल के रूप में दुश्मनी प्राप्त  होती है ।




यदि मनुष्य को अपने धन के बदले में ब्याज ही लेने का शौक है तो उसे चाहिए की वो अपने धन को ,गरीब ,मजलूमों ,अनाथों ,जरूरतमंदों को दान कर दे ,क्योँकि दान दिया हुआ धन ,बाद में दस गुना होकर  मिलता है और ठीक समय पर जब उसकी आपको जरूरत होती है अवश्य मिलता है ,आजमाइश करके लिखा

धनाभाव होने पर बुद्धिमान ,सशक्त ,सुन्दर मनुष्य ,की बुद्धि भी ,ह्रदय भी ,और सुंदरता एवं मान सम्मान ,सभी का ह्रास भूमि के कटाव की भांति होता रहता है ,जिसका इलाज भी असम्भव है ।

Monday, March 20, 2017

हम जिनके दिलों में लगी आग को
अपने आंसूओं से बुझा दिया करते थे
जिनके दिलों में लगी आग को बुझाया
वो अब हमको बेवफा कहने लगे हैं   ।
धन से सब कुछ  खरीदा जा सकता है ,यहां तक की जीवन और म्रत्यु भी ,और सब कुछ बनाया भी जा सकता है ,परन्तु चरित्र ना तो बनाया जा सकता है ,और नाही खरीदा जा सकता है ।
जब दिल पर चोट लगती है तो  आँखों से आंसू निकलते हैं ,और जब दिल को असीम ख़ुशी मिलती है तो भी आँखों से आंसू ही निकलते हैं यानी की दिल आँखों और आंसूओं में कितना समन्वय है ।
समुन्दर में विचरण करते कीड़े मकोड़े
मगर मच्छ कहलाते ,
धनवानों के घर पैदा पगले
बुद्धिमान ही कहलाते ,
मुर्ख निरक्षर धरत व्यक्ति भी
भारत में नेता बन जाते ,

Saturday, March 18, 2017

swsth shareer rakhne hetu

निरोगी काया ( शरीर ) रखना चाहते हो तो बशर्ते कुछ भी मत करिये, परन्तु अपने मष्तिस्क को सदैव साफ़ शुद्ध रखिये ,यानि की मष्तिस्क को ईर्ष्या ,द्वेष ,अहंकार ,वैमस्यता निराशा ,चिंता जातीय भेद ,इन सबसे मुक्त रखिये , फिर देखिये सुखद परिणाम ।

Friday, March 17, 2017

जिस प्रकार स्त्रियों ने अपने पति को परमेश्वर का दर्जा दे रखा है यदि ठीक उसी प्रकार पुरुष भी अपनी पत्नी को देवी का दर्जा दे दें ( अपने पुरुष प्रधान अहम ) को छोड़कर तो मैं समझता हूँ की आधे से ज्यादा पति पत्नी के झगडे स्वत्: ही समाप्त हो जायेंगे और परिवार में सुख शांति का माहौल बना रहेगा और जहाँ शांति होगी वहाँ पर लक्ष्मी का वास भी रहता है ।
                                    कांति  प्रकाश चौहान

BUJURG

यदि हम सभी भारतवासी बुजुर्ग ,अपने बच्चों के सभी कार्यों में जापानीज बुजुर्गों की भांति हाथ बटाये ,और उनका सहारा बनने कीकोशिश करें यानी की उनको अपनी उपयोगिता दर्शाएं ,यथा उनके उद्योग धंधों में छोटे मोठे कार्य या ऑफिसियल वर्क करें ,जो वो कर सकते हैं ,और यदि घर में भी रहें तो छोटे मोठे कार्य जैसे साग भाजी लाना ,बच्चों को स्कूल छोड़ना और लाना या जो भी कार्य वो करने में सक्षम हैं करें तो शायद हमारे देश में व्रद्धाश्रमों की जरूरत नहीं पड़ेगी ,और यदि व्रद्धाश्रम हैं भी तो वो खाली ही रहेंगे , कोई भी व्यक्ति इतनी उपयोगिता देखने के पश्चात बुजुर्गों को व्रद्धाश्रम नहीं भेजेगा ,
" एक कहावत है की सभी को काम प्यारा होता है चाम नहीं "