Monday, February 22, 2016

jo doge wahi milegaa

मैंने  अपनी ख्वाइशों को ताक़ पे रखकर 
अपनी सब जमा पूंजी तुम पर खर्च कर 
मूक बनकर बैठा डाक पेड़ पर उल्लू बनकर 
बड़ा बन जाने पर तूने फर्ज निभाया अपना
हम मियाँ बीबी को वृद्धाश्रम में भेजकर ,
पर एक बात याद रखना मेरे प्यारे बेटे 
जो तूने आज हमको दिया है बदले में 
वो ही सीख रहे हैं तेरे बच्चे भी आज 
अपने प्यारे दादा दादी की हालत देखकर 
वो भी बदला देंगे तुझ  को यहाँ भेजकर ।
 

Thursday, February 11, 2016

शीर्षक हीन

तुम्हारी प्रेरणा से
जो पौधे उगे थे
अब किशोर होकर
यौवन की दहलीज पे
कदम रख चुके हैं
वो आतुर हैं
वृक्ष बनने के लिए ,
कलियों ने
अपने सौंदर्य को
स्निग्धता को
वातसलयता को
एकाग्रता को भी
समर्पित कर दिया है
उसके वक्ष स्थल के लिए ,
वृक्ष की ऊष्मा से
वो पुष्प बन गई हैं
अपनी सुगन्धि
बरसाने के लिए 
 उसने सुगंधित कर दिया
वातावरण को
सम्मान पाने के लिए |