Sunday, May 31, 2015

मुकाम

हमारे पास ऐसा कोई मुकाम नहीं है
जहां क्षण भर  भी हम सुस्ता पाएंगे
जब से आये है  इस नश्वर संसार में
चलते रहे हैं चलते रहेंगे चला चली है
चलते  चलते जब थक के चूर जाएंगे
तो स्वयं ही अपने मुकाम पे पहुँच जायेंगे |

Thursday, May 28, 2015

मुस्कुराने को
किसी नवयौवना का
जो पगले
जेब  में आना
बताते हैं ,
और हंसने को
उनके
फंस जाना समझ
अपनी उपलब्धि
बताते हैं ,
एक दिन
ऐसा आता है
जब वो तो मुस्कुराती
हंसती रहती हैं
पर दिल फेंकू
देवदास बन जाते हैं |
मात्र मुस्कुराना
देखकर
किसी यौवना का 
जो उन पर फ़िदा
हो जाते हैं ,
वो खुद
एक दिन
खुद को
महा बेवक़ूफ़
बताते हैं 

Monday, May 25, 2015

advocate

जनता में एक कथन व्याप्त है और मैं भी कहता हूँ ,
झूठ बोलने से कभी भी किसी का भला नहीं होता ,
और सत्य बोलने से कभी किसी का बुरा  नहीं होता ,
पर मैं एक पूरी कौम और उनके पेशे के बारे में कहता हूँ
यदि वो झूठ नहीं बोलेंगे तो उनका कभी भला नहीं होगा बल्कि मैं तो कहूँगा की उनका पेशा ही नहीं चलेगा और यदि सत्य बोला तो सब कुछ ही समाप्त हो जाएगा और हो सकता है कि एक  दिन भिखारियों कि पंक्ति में ही लगना पड़े |वैसे वो भी झूठ बोलना नहीं चाहते पर उनकी मजबूरी है ,फिर मजबूरी में झूठ बोलना तो क्या झूठा लोग झूठा खाना भी खा लेते हैं |तो भाई वो हैं जिनको हम ओर आप  जब किसी मुकदद्मे में फंस जाते हैं तो उन्ही का सहारा लेना पड़ता है और वो हैं ,
वकील साहब ,अधिवक्ता,बेरिस्टर या न्याय दिलाने वाले देव दूत |

Thursday, May 21, 2015

बदलाव

हमारे देश की
प्रकृति ,प्रवृति
और प्रसूति भी
अजब की विभूति है ,
जब प्रकृति में
परिवर्तन आता है तो 
आँधियाँ चलती हैं 
ओले गिरते हैं
तूफ़ान आते हैं और
महा वृक्ष धराशाई हो जाते हैं ,
जब यहाँ की प्रवृति
परिवर्तन चाहती है तो
जनता के विचार
स्वत् :परिव्रत हो जाते हैं
और जिसको भी चाहा
उसे राजा बना देते हैं ,
जब प्रसूति
परिवर्तन चाहती है तो
एक एक के घर में
दस दस हो जाते हैं
और धीरे धीरे बहुत बदला
अब एक में एक ही नजर आते हैं |













Tuesday, May 19, 2015

दुहेजियां की घोड़ी
जितनी उछले उतनी थोड़ी
चाहे सफ़ेद ,लाल हो
या काली थोड़ी थोड़ी
बिदकने लगती है
चढ़ते ही ड्योढ़ी   |
तो मित्रों आपका ख्याल है ,जरूर लिखना ,

Monday, May 18, 2015

एक कहावत

एक कहावत है ,
माँ गोबर पाथती घूम रही है ,
बेटा  बिटोरे बख्श रहा है  ,
ठीक यही हाल आज भारतवर्ष का है ,देश में पैसा नहीं है ,किसान आत्महत्या कर रहे हैं क्योँकि वो सरकार के या धन्नासेठों के कर्ज में डूब रहे हैं ,मोदी सरकार उन बेचारे किसानों की तो सुन नहीं रही है जिनके प्रयत्नों से खेती करके हमारे देश की जनता पल रही है ,और हमारी सरकार ब्याज तक भरने के लिए बाहरी मुल्कों से कर्जा ले रही है ,और उसके बावजूद हमारे आदरणीय P M श्री नरेंद्र मोदी जी "नार्थ कोरिया " जैसे मुल्क को " १ अरब  डॉलर यानी कि लगभग १०० करोड़ डॉलर ,लगभग ६ हजार ४ सौ  करोड़  रूपये का कर्जा बाँट कर आ रहे हैं हैं ना मजे कि बात ,धन्य हैं हमारे देश के दयालू P M ,भगवान उनका सदैव भला करें |

Friday, May 15, 2015

nirliptt

लोग बाज नहीं आते
शमशान में भी
स्वयं को
स्वयं भू कहने से ,
एक अहंकारी
पहले ही समर्पित है
अग्नि की प्रचंड शिखा में
धू धू कर जलने के लिए ,
सबकुछ साक्षात देखकर भी
आत्मसात नहीं करता
मोह माया जाल में लिप्त
तुच्छता विहीन होने के लिए ,

Wednesday, May 6, 2015

हशरतों की आग में इंसान
कभी कभी  इतना मसरूफ  हो जाता है
कि उनको पाने की चाह में 
इंसान ना रह ,खब्बीस और मगरूरहो जाता है ,
सोचने समझने का माद्दा नहीं रहता उसमे
वो इंसान से शैतान बन जाता है 

Sunday, May 3, 2015

गालियां

जब भी कोई
क्रोधित होकर
मुझको  देता है
प्यारी प्यारी सी गालियां ,
मैं या तो उनको
संजोकर रख लेता हूँ
अपनी पेंट की जेब में ,
या फिर देने वाले से
कहता हूँ की भाई
कुछ तो संजोकर रख
अपने बुरे वक्त के लिये
तेरे भी कभी काम आएँगी ,
जब तू सभ्य बन जाएगा
तो ये ही तेरा
साथ निभाएंगी
तेरे बुरे वक्त में  ,
जब कोई ध्रष्ट व्यक्ति
टकराएगा साधू भेष में
तो तेरी ये गालियां ही
मुक्ति दिलाएंगी संक्षेप में |