Friday, May 27, 2016

KISI KO JANTA KI KOI CHINTA NAHIN ,

देश के हुक्मरानों को ,

विपक्षियों को ,
क्या लेना देना ,
कौन मर रहा है ,
किसके साथ बलात्कार हुआ है ,
कौन भूखा मर रहा है ,
कौन बीमारी से तड़फ रहा है ,
कौन आत्महत्या कर रहा है ,
क्योँ कर रहा है ,
मात्र आंसू बहाने  चले जाते हैं ,
अपनी रोटियां सेंकने चले जाते हैं ,
चुनाव की गोटियां फिट करते हैं
वापस चले आते हैं ,
भ्र्ष्टाचार कर करके
खजाने भर रखे हैं
नित नए नए कपडे बदल रहे हैं ,
भाषण दे देकर जनता को
 दिग्भर्मित कर रहे हैं
खाली खोकली बातों से ही
जनता जनार्दन का पेट भर रहे हैं ।

Wednesday, May 25, 2016

प्रेम पत्र पढ़ने  तो अब भूल  ही गए
लिफाफा देखकर ही मन मसोस लेते हैं ।

 

Tuesday, May 24, 2016

बेवफा की कब्र पर
हम योँ ही सर पटकते रहे
वो सकून से  सोती रही और
हम आंसुओं में तर बतर हो गए

Sunday, May 22, 2016

mnushy dhrm na nibha paayaa

अनंतकाल
युग युगन्तरों से
कितनी ही योनियों में
परिवर्तित हो
ये मनुष्य जन्म पाया
पर मैं
मनुष्य धर्म ना
निभा पाया ,
जन्म से पूर्व
गर्भ रूपी कुंड में
जिसे अंधेर कोठरी ही कहूंगा
वेदनापूर्ण
नौ मॉस तक
जीवन बिताया ,
और अंत में
ईश्वर से याचना
करवद्ध प्रार्थना कर
 प्रभु को
अंतर्दवन्द का बखान कर
कष्टों का
व्रतांत सुना
मुक्त होनें का
प्रसाद पाया ,
शैशव बीता
किशोर अवस्था बीती
यौवन आया
अहंकार ने
मस्तक उठाया
सब कुछ भूल गया
और मनुष्य धर्म
ना निभा पाया ।


Friday, May 20, 2016

ek nek salah

मेरा ,हमारा और आप सभी का वो ही सच्चा मित्र है " जो आपकी   कमियों ,खामियों को आपके सम्मुख उजागर करके आलोचना करता है क्योँकि वो आपकी कमियों को आपके द्वारा ही समाप्त करवाकर आपको एक शुद्ध और शक्तियुक्त स्तम्भ  देखना चाहता है ।
और जो व्यक्ति हम सभी की कमियों और खामियों को अनदेखी कर बजाय आलोचना के यश प्रसंशा करता   है वो आपका सबसे बड़ा दुश्मन है क्योँकि वो आपको धीरे धीरे  क्षय होता देखकर समूल नष्टता की और अगर्सर कर रहा है ।

Friday, May 13, 2016

prarbdhanusar

पता नहीं कब किसी को
कलंक लग जाए ,
पता नहीं कब कौन
रातों रात प्रसिद्धि पा जाए ,
पत्ता नहीं कब कौन इ
अचानक अरब पति बन जाए ,
पता नहीं कब कौन कोई भी
चंद  मिनटों में कंगाल हो जाए
पता नहीं कब कौन अचानक
देश का सार्वभौम बन जाए
पता नहीं कब कौन
इस जीवन से मुक्ति पा जाये
सब प्रारब्ध का खेल है प्यारे
जो जतना देकर आये उससे अधिक पा  जाए ।

Wednesday, May 11, 2016

ansuljhaa sawal

 जब भी कोई किसी को उधेड़ता है
तो सर्व प्रथम जिगर को टटोलता है
और जब वहां कुछ भी नहीं मिलता
फिर इधर ,उधर उंगलियां घुसेड़ता हैं
जब सब करने पर कुछ नहीं मिलता
तो फिर नाक मुंह भी  सिकोड़ता है
फिर पश्चाताप के कारण उद्विग्न हो
फिर अपनी आत्मा को झिंझोड़ता है ।

मैंने लिख दिया है अब अनुमान लगाना आपका काम है की मैं क्या कहना चाहता हूँ

Tuesday, May 10, 2016

मैंने तो हमेशा उनको ,
अपनी धड़कनों में बसा के रखा ,
पर वो हैं कि मेरी धड़कनों को भी
बेवफा का खिताब दिए जा रहे हैं,
किसी को मुहब्बत करना भी अब
भरोसे के काबिल नहीं रह गया है
हम उनको खुशियां दे रहे हैं और वो
घाव देकर नमक भी मले जा रहे हैं ।

Monday, May 9, 2016

आज फिर किसी ने अपने ही हाथों से
उस मासूम आईने को तोड़ा है
जिसने सदा बुरा काम करने से पहले
उसके दिल को बार बार झिंजोडा है  ।

इश्क़ ,मुहब्बत ,प्यार , वफ़ा
सब किस्मत का फेरा है ,
जब किस्मत ना देती साथ
तो ना कोई तेरा है और
नाही कोई भी मेरा है
ये दुनिया रेन बसेरा है ।

Wednesday, May 4, 2016

ek nek salah

यदि हम सभी अपने माँ बाप को मात्र कोई भी भगवन मान लें जैसे ,सीता राम , राधा कृष्ण ,या पारवती शिव ,और उनकी पूजा मात्र  ऐसे ही २ या ४ मिनट मिनट करें जैसे कि आप  भगवानों की करते हैं और भोग भी वैसे ही लगाएं जैसे की भगवन को लगाते हैं हैं तो मैं ये गारंटी देता हूँ कि किसी भी वृद्ध जन  वृद्ध आश्रम जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योँकि बुढ़ापे में प्रत्येक व्यक्ति को मात्र मान और कुछ भोजन ,जो की भोग से ही काम चल जायेगा ,आवष्यकता होती है और हमारे सभी के घरों में भी सुख शांति का वातावरण बन जायेगा ,
क्योँकि वृक्ष और बुजुर्ग बुढ़ापे में फल भी नहीं देते तो छाँव अवश्य देते हैं ,इसलिए इन दोनों को कभी भी बेकार मत समझो ।