Saturday, November 5, 2016

मैं रोता  रहा
उनकी चौखट पर सर पटक पटक कर,
शायद कभी वो
गले लगा लेंगे अपना सा समझकर ,
पर ठोकर मार दी
उन्होंने मुझे गैरों से भी बदतर समझकर ,
पर मैं बेगैरत था
जिद करता  रहा खुद को नाचीज समझकर ।

Wednesday, October 12, 2016

STYARTH

स्वस्थ्य रहना है तो
कुदरत की नियामतें खाइये,
शांति से सोना है तो
मात्र  एक जाम उठाइये ,
महान बन्ना है तो
अच्छे काम करके दिखाइए ,
भद्र पुरुष बनना है तो
संस्कारों को अपनाइये ,
बड़ा आदमी बनना है तो
दिल को बहुत बड़ा बनाइये ,
दीर्घायु होना है तो
बीज मन्त्र माला  घुमाइए ,
यदि सम्मान पाना है तो
नम्रता को अपनाइये ,
साधू बनना है तो
सदैव विचरण करते जाइये
 चिंता से मुक्ति पानी है तो
स्वयम चिता बन जाइये ।


Friday, October 7, 2016

bina shershak

इस नश्वर संसार में
पति ,पत्नी और
अपने बच्ची और बच्चे
होते हैं मात्र अपने ,
बन्धु बांधव ,सगे  सम्बन्धी
सभी हैं मुंगेरी लाल के सपने
समय परिवर्तन होते ही
एक दुसरे की छाया तक से डरते ,
भर देते हैं  नयनों में अथाह रूद्र
भर जाते हैं मटकी और मटके
इहलीला समाप्त हो जाने पर
श्रधांजलि यथाशीघ्र सम्पूर्ण करते ।

Wednesday, September 28, 2016

ghaav

जिगर को खोल कर दिखा दूँ तो
घाव गिनते गिनते थक जाओगे
शायद  मैं भूल जाऊं तुमको मगर
तुम मुझे ताजिन्दगी ना भूल पाओगे ।

Thursday, September 22, 2016

teen deshbhkt

मजदूर , जवान और किसान
तीनो बनाते देश को महान
ये  देश में सबसे ज्यादा परेशान,
जीवन भर करते रहते संघर्ष
तब दो वक्त रोटी का होता इंतजाम
पता नहीं होता कब आ जाए पैगाम ,
मरने पर भी न ढंग से कफ़न काठी
नहीं ढाई मन लकड़ी का इंतजाम
फिर भी शान्ति प्रदत करता शमशान ,
फिर भी ,
मेरा देश महान ,मेरा देश महान
जय मजदूर ,जय जवान ,जय किसान
ना कहीं मूर्ति ,न कहीं नामो निशान ।

Friday, August 12, 2016

sawan ki fuharen

 हम प्रेम के बोल बोलते हैं तो 
निर्झर नीरज ही बरसता है
एक एक शब्द फुहारों से
सावन का सरवरा सा लगता है
प्रेयसी यदि साथ में हो तो
नृत्य को ह्रदय ललकता है
एक एक पैर  की तालों से
नीरज भी छप छप  करता है
शीश पर  बूँद टपकने पर
ओष्ठों पर जलावतरण होता है
आचमन करने पर बूंदों का
मधु सम  मीठा लगता है ।


 

Monday, August 8, 2016

suvichar

जो गुजर चुका है उसे भूल जाओ
जो आने वाला है उसका अभिवादन करो
दुख सुख दोनों में ऊपर वाले को नमन करो
यदि कुविचार मन में आएं तो शमन करो

Wednesday, August 3, 2016

chaar padaarh

पीने से पहले कुछ मत सोचो , दो या चार घूँट गले में उतारकर गला तर तो कर ही लो ,
पीने से पहले ३६ बार सोचो शायद खोपड़ी में गर्मी आ   जाए ,
पीने से पहले बिलकुल मत सोचो शायद शरीर में निथार आ जाए
पीने के बाद हजार बार सोचो शायद भविष्य अच्छा हो जाए।
अब आप इन चारों पदार्थों के नाम बताओ ,ताकि मुझे भी कुछ समझ आ जाए

Saturday, July 30, 2016

hamara dhrm maa baapu k prti

हमको अपने माँ पिता की सेवा मात्र ये  देखकर ही नहीं करनी चाहिए कि उन्होंने इस जीवन में हमको दिया क्या है ?,जैसे कि  हमको कितनी शिक्षा दिलवाई ,कितनी धन सम्रद्धि प्रदान की अथवा कितने आनंद के क्षणों से मिलाप कराया ,ये सब कुछ तो बहुत साधारण है ,किसी के अभिभावक बहुत कुछ दे देते और अधिकतर अभिभावक कुछ भी नहीं देते या नाम मात्र को जो उनके पास बच जाता वो  बच्चो को दे देते हैं ,परन्तु सभी के माँ बाप ने हम सबको जो अमूल्य निधि प्रदान की है वो है" इस संसार में हमारा पदार्पण कराना"यानी की हमको जन्म देना ,और बस केवल यही  सोचकर हमको अपने माँ बाप की सेवा सुश्रवा करनी चाहिए क्योँकि ये सबसे बड़ा  ऋण है हम सभी पर अपने माँ बापू का जिसको हम सम्पूर्ण जीवन भर भी सेवा करके नहीं उतार सकते
कांति  प्रकाश चौहान

Thursday, July 28, 2016

WO KOUN THEE


पदचाप सुनी थी प्रंगण से
आवाज आई थी सुरीली सी
श्वेत  वस्त्रों से सुसज्जित
वो कौन थी वो कौन थी
फड़फड़ाते ओष्ठों से
दंतपंक्ति निपोरती
चित्त को आनंदित करती
मधुमती वो सौम्य सी
वो ह्रदयवासिनी थी या
सौंदर्य की थी मूर्ति 
पल में प्रलय सी कर गयी
वो रम्भा थी या उर्वशी

Sunday, July 24, 2016

जिनको आज हम
पैरों से मसल रहे हैं
कभी वो हमारे सरफरोश  थे
पेड़ पर लगे थे तो शांत थे
जमी पर पड़े तो चरमरा रहे हैं
अपने अच्छे दिनों की कहानी को
महाभारत की भांति सुना रहे हैं
मरते दम तक भी अभिमान टूटेगा नहीं
 यही उपदेश देते देते शहीद होते जा रहे हैं ।

Saturday, July 23, 2016

उनकी दरिंदगी की कहानियां बेमिशाल देखो
जो भी जवाब देता है उसी का मुंह लाल देखो ,
है किसी में हिम्मत जो उनको रोककर दिखाए
अगले दिन उसी के घर पर लगा पंडाल देखो ,
मुंह छुपाने के लिए उनको पूरा जहाँ जो पड़ा है
जहाँ भी जाओगे ,वहां उन्हीं का कमाल देखो ,
आधा बीत गया है आधा अधूरा ही रह गया है
पूरा  बीत जाने पर काल का इंतकाल भी देखो ।

Thursday, July 21, 2016

भारत में एक कहावत है कि " अपने यदि मारते भी हैं तो छाँव में डालते हैं "
परन्तु मेरा अनुभव है की "यदि आपने मारते हैं तो ऐसी जगह डालते हैं जहां छाँव तो छोडो ,मुंह में डालने के लिए एक बूँद पानी भी मयस्सर नहीं होता "

Wednesday, July 20, 2016

dosti k naam par Emotionaly black mail ham kis parkar hote hain ya kisi ko karte hain

दोस्तों की प्रतिक्रियाएं
जब दोस्ती की  है तो उम्र भर  निभाएंगे
दोस्त आप जान  भी मांगोगे तो बेहिचक दे देंगे
जहाँ आपका पसीना गिरेगा तो खून बहा देंगे
अरे दोस्त कोई आपकी तरफ कोई आँख उठकर देखेगा तो  फोड़ देंगे
भाई एक बार कुछ कहकर तो देखो
कभी जीवन में जरूरत पड़े तो आजमा  कर देखना
दोस्त हम आपके बिना तो जी भी नहीं सकते
यदि आपको कभी जरूरत पडी खुद  को गिरवी रख देंगे
ये बातें मात्र जब तक की हैं जब तक आप एक दम  ठीक ठाक हैं   है और आपपर कोई विपदा नहीं है और आपकी जेब रुपयों से लबालब भरी है ,और आपके शरीर में भरपूर शक्ति है
इसके बाद खुदा ना खस्ता आपके साथ कुछ उलटा सुल्टा हो जाए तो उन्ही दोस्तों की क्या पर्किर्याएँ होंगी आप खुद ही  लिखोगे


antim patr preysi ko

हम तुम जब
अंतिम बार मिले थे
तब से लेकर आज तक
ज्ञात नहीं तुम कहाँ हो
और मैं कहाँ हूँ ,
पर जो वायदा तुमसे किया था
उसे आज तक निभा   रहा हूँ
हर वक्त  तुम्हारी यादों को
ह्रदय में बसाए हुए हूँ ,
बस इतना ही नहीं
सोते वक्त भी
तुम्हारी मनमोहक छवि को
अपनी पलकों में बसाए  हुए हूँ ,
तुम्हारी कल्पना तो वफ़ा थी
मैं बेवफाई का गम उठाये हुए हूँ
कभी माफ़ नहीं करूंगा  खुद को
एक ये ही जहमत उठाये हुए हूँ
अलविदा ,

Sunday, July 17, 2016

mousam

आज मौसम ने
पलट दिए
चालीस वर्ष पुराने वरखे
जब हम और वो
कभी ऐसे मौसम में
एक दुसरे के
अंक में समा
दिल ही दिलमे
कुछ कुछ छुपाए थे ,

Saturday, July 16, 2016

mera mntvy

हर शख्स कहता है कि
माँ के पगों तले स्वर्ग होता हैं
पर कुपुत्रो के लिए स्वर्ग और
सुपुत्रों के लिए नरक होता है
मैंने जीवन में जो देखा है
वो ही आपके सम्मुख भौंका है  ।

hamaare apne

ज़माना कहता है कि
अपने अपने ही होते हैं
पर मैं कहता हूँ कि
कत्ल भी अपने ही करते हैं ।
खून अपने खून की
और को ही दौड़ता है
अब अपनों का खून भी तो
पानी पानी हो गया है ,
जब तक उनको जरूरत है
तुम्हारी और दौड़ते रहते हैं
जरूरत पूरी हो जाने पर
फिर तुमको खचेडते हैं ,



Saturday, July 9, 2016

हुस्न बानो को हुस्न के दीवानों ने
हुस्न बानो बना दिया
उसने भी एक एक कर सभी को गले लगा
एक एक कर सभी का लहू पीया

Friday, July 8, 2016

किसी के दर पे टपकने से तो अच्छा है
उसे अपने दड़बे पर ही बुला लो
करते हो  यदि उससे पाक मुहब्बत
तो उसे अपने जिगर में ही बसा लो

Sunday, July 3, 2016

 इस हुस्न की तुमने हमेशा इबादत की है
देखें गले से भला लगाते कब हो ।

तुम्हारी मुहब्बत तो चांदनी  रातें हैं
फिर दिन में नजर छुपाते क्योँ हो ।

Saturday, July 2, 2016

उन्होंने मेरी आँखों में
ना झांक कर देखा कभी
 बस यूँ ही कह दिया
झील से गहरी हैं तेरी आँखें
 मुझे खौफ है कि
कहीं डूबकर मर न जाएँ
जो मेरी बिल्लौरी  आँखों ने
दे दिया उनको धोखा   ।

Wednesday, June 29, 2016

मैंने तुम्हें कभी चाहत  भरे दिल से नहीं देखा
तू रूह है मेरी ,बस इतना कद्रदान हूँ  मैं तेरा ।

Monday, June 27, 2016

janaja

हमने देखा
किसी का जनाजा
निकल रहा था
तो हमने पूछा
मियाँ ये जनाजा
किन साहब का है
तो विसने कहा
ये जनाजा
नवाब वसीउल्ला खां का है
तो हमने कहा कि
वो तो बड़े पैसे वाले थे
उनका तो सारे जहां में नाम था
तो वो बोला क्या मियाँ
पैसे वाले लोग नहीं मरते
नहीं वो क्योँ मरेंगे
वो तो पैसे से
सब कुछ खरीद सकते हैं
जिंदगियां खरीद लेते हैं
फिर क्या अपने लिए
एक जिंदगी ना खरीद सके

vkt badalte der nahin lagti

पैसा आया ,मान मिला और
साथ बहुत सी लाया सौगात
भाई बंधुओं को रास आया
बन गए सभी कुंवर प्रताप ,
ठंडी सभी की खत्म हो गई
आ गया सभी में उच्च ताप
कद सभी का बड़ा हो गया
तो भूल गए अपनी ओकात ,
किसी को  भी बड़ा न समझे
सबसे ऊंचे बन गए वो आप
जो भी  उनके सामने बोलता
बता देते उस बेचारे को जात ,
वक्त ने एक दिन पलटा खाया
सबकुछ ले गया अपने साथ
जिसे भी मिलते मुंह फेर लेता
चाहे कितना ही करें प्रलाप ।

Friday, June 24, 2016

तीर तो हमने भी चलाये बहुत
मगर निशाने पर एक भी न लगा
इसे अपना भाग्य कहूं या नाकामी
मुफ्त में बदनामी का ख़िताब मिला ।

Tuesday, June 21, 2016

अमावस्या की काली रात्रि में
कोई मेरा आँचल थामे या ना थामे
पर मैं अपने  संयम के बल पर
पूर्णमासी को प्राप्त करके रहूंगा ।

Monday, June 20, 2016

 वक्त किसी को नहीं मारता
क्योँ उसे बदनाम  करते हो
जब कुकर्म करते हो तो
क्या वक्त से भी पूछते हो ।

Saturday, June 18, 2016

इब्तदा  ऐ इश्क़ में हम सारी रात जागे
अल्ला जाने अब क्या होगा आगे आगे

Monday, June 13, 2016

AMIT SHAH JI KI JUBANI BHRSHTACHAR KI KAHANI

अलाहाबाद में भाजपा अध्यक्ष श्री अमित शाह जी ने कहा की २ साल से केंद्र  में हमारी सरकार है पर हम पर एक भी दाग नहीं ,
पहली बात तो ये है की इससे बड़ा सफ़ेद झूठ और कुछ हो ही नहीं सकता ,की जिनके खुद के आँचल में कितने दाग लगे हैं वो ऐसी बात कह रहे हैं ,तो इसी संदर्भ में पढ़िए

दागों की कमी नहीं है
फिर भी बेदाग़ हैं हम
क्योँकि हम सार्वभौम हैं
और सत्ता भी हमारी है
अभी तक तो सी बी आई
और रा  ही हमारी थी
और मीडिया भी हमारी थी
 सी आई सी ,सी वी सी चुप है
अब न्यायपालिका की बारी है



Saturday, June 11, 2016

ghoda

जिसने भी मुझे देख लिया
वो ही मंत्र मुग्ध हो जाता है
 रंग भेद की कोई नीति नहीं
सभी रंगों में मुझे चाहता है ,
धीरे धीरे वो मुझे सपर्श कर
फिर पीठ को  सहलाता है
फिर स्टेयरिंग को हाथ में ले
हवाई जहाज सा उडाता  है ,
पर बन्दा भी सतयता से
उसका पूर्ण साथ निभाता है
जैसा वो मुझसे  चाहता है
वैसा ही उसे कर दिखाता है ,
इसी लिए शूरवीरों के साथ
मेरा नाम भी जुड़ जाता है
हीरू ,मगरू ,चेतक गबरू
 नामों से नवाजा जाता है ,
 मेरी ही गति का माप यंत्र से
नाता जोड़  दिया जाता है
वाहन  गति  का आंकलन
हॉर्स पावर में बताया जाता है ,
मैं कभी भी बूढ़ा नहीं होता यदि
 दाना पानी समय पर मिल जाता है
ऐसी कहावत है संसारं में
गर्न्थों में भी वर्णन आता है ।








Monday, June 6, 2016

धरा का  जिसने भी ह्रदय से सम्मान किया किया है
विश्वास कीजिये उनका शीश कभी शर्म से झुका नहीं ।

Wednesday, June 1, 2016

रिश्ते भी कितने अजीब होते हैं
जिनके चेहरों पर हंसी देखकर
हम फूल कर कुप्पा हो जाया करते थे ,
आज वो हमारी आँखों में आंसू देखकर
खुद को हमारा भगवन बता रहे हैं ।

Friday, May 27, 2016

KISI KO JANTA KI KOI CHINTA NAHIN ,

देश के हुक्मरानों को ,

विपक्षियों को ,
क्या लेना देना ,
कौन मर रहा है ,
किसके साथ बलात्कार हुआ है ,
कौन भूखा मर रहा है ,
कौन बीमारी से तड़फ रहा है ,
कौन आत्महत्या कर रहा है ,
क्योँ कर रहा है ,
मात्र आंसू बहाने  चले जाते हैं ,
अपनी रोटियां सेंकने चले जाते हैं ,
चुनाव की गोटियां फिट करते हैं
वापस चले आते हैं ,
भ्र्ष्टाचार कर करके
खजाने भर रखे हैं
नित नए नए कपडे बदल रहे हैं ,
भाषण दे देकर जनता को
 दिग्भर्मित कर रहे हैं
खाली खोकली बातों से ही
जनता जनार्दन का पेट भर रहे हैं ।

Wednesday, May 25, 2016

प्रेम पत्र पढ़ने  तो अब भूल  ही गए
लिफाफा देखकर ही मन मसोस लेते हैं ।

 

Tuesday, May 24, 2016

बेवफा की कब्र पर
हम योँ ही सर पटकते रहे
वो सकून से  सोती रही और
हम आंसुओं में तर बतर हो गए

Sunday, May 22, 2016

mnushy dhrm na nibha paayaa

अनंतकाल
युग युगन्तरों से
कितनी ही योनियों में
परिवर्तित हो
ये मनुष्य जन्म पाया
पर मैं
मनुष्य धर्म ना
निभा पाया ,
जन्म से पूर्व
गर्भ रूपी कुंड में
जिसे अंधेर कोठरी ही कहूंगा
वेदनापूर्ण
नौ मॉस तक
जीवन बिताया ,
और अंत में
ईश्वर से याचना
करवद्ध प्रार्थना कर
 प्रभु को
अंतर्दवन्द का बखान कर
कष्टों का
व्रतांत सुना
मुक्त होनें का
प्रसाद पाया ,
शैशव बीता
किशोर अवस्था बीती
यौवन आया
अहंकार ने
मस्तक उठाया
सब कुछ भूल गया
और मनुष्य धर्म
ना निभा पाया ।


Friday, May 20, 2016

ek nek salah

मेरा ,हमारा और आप सभी का वो ही सच्चा मित्र है " जो आपकी   कमियों ,खामियों को आपके सम्मुख उजागर करके आलोचना करता है क्योँकि वो आपकी कमियों को आपके द्वारा ही समाप्त करवाकर आपको एक शुद्ध और शक्तियुक्त स्तम्भ  देखना चाहता है ।
और जो व्यक्ति हम सभी की कमियों और खामियों को अनदेखी कर बजाय आलोचना के यश प्रसंशा करता   है वो आपका सबसे बड़ा दुश्मन है क्योँकि वो आपको धीरे धीरे  क्षय होता देखकर समूल नष्टता की और अगर्सर कर रहा है ।

Friday, May 13, 2016

prarbdhanusar

पता नहीं कब किसी को
कलंक लग जाए ,
पता नहीं कब कौन
रातों रात प्रसिद्धि पा जाए ,
पत्ता नहीं कब कौन इ
अचानक अरब पति बन जाए ,
पता नहीं कब कौन कोई भी
चंद  मिनटों में कंगाल हो जाए
पता नहीं कब कौन अचानक
देश का सार्वभौम बन जाए
पता नहीं कब कौन
इस जीवन से मुक्ति पा जाये
सब प्रारब्ध का खेल है प्यारे
जो जतना देकर आये उससे अधिक पा  जाए ।

Wednesday, May 11, 2016

ansuljhaa sawal

 जब भी कोई किसी को उधेड़ता है
तो सर्व प्रथम जिगर को टटोलता है
और जब वहां कुछ भी नहीं मिलता
फिर इधर ,उधर उंगलियां घुसेड़ता हैं
जब सब करने पर कुछ नहीं मिलता
तो फिर नाक मुंह भी  सिकोड़ता है
फिर पश्चाताप के कारण उद्विग्न हो
फिर अपनी आत्मा को झिंझोड़ता है ।

मैंने लिख दिया है अब अनुमान लगाना आपका काम है की मैं क्या कहना चाहता हूँ

Tuesday, May 10, 2016

मैंने तो हमेशा उनको ,
अपनी धड़कनों में बसा के रखा ,
पर वो हैं कि मेरी धड़कनों को भी
बेवफा का खिताब दिए जा रहे हैं,
किसी को मुहब्बत करना भी अब
भरोसे के काबिल नहीं रह गया है
हम उनको खुशियां दे रहे हैं और वो
घाव देकर नमक भी मले जा रहे हैं ।

Monday, May 9, 2016

आज फिर किसी ने अपने ही हाथों से
उस मासूम आईने को तोड़ा है
जिसने सदा बुरा काम करने से पहले
उसके दिल को बार बार झिंजोडा है  ।

इश्क़ ,मुहब्बत ,प्यार , वफ़ा
सब किस्मत का फेरा है ,
जब किस्मत ना देती साथ
तो ना कोई तेरा है और
नाही कोई भी मेरा है
ये दुनिया रेन बसेरा है ।

Wednesday, May 4, 2016

ek nek salah

यदि हम सभी अपने माँ बाप को मात्र कोई भी भगवन मान लें जैसे ,सीता राम , राधा कृष्ण ,या पारवती शिव ,और उनकी पूजा मात्र  ऐसे ही २ या ४ मिनट मिनट करें जैसे कि आप  भगवानों की करते हैं और भोग भी वैसे ही लगाएं जैसे की भगवन को लगाते हैं हैं तो मैं ये गारंटी देता हूँ कि किसी भी वृद्ध जन  वृद्ध आश्रम जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योँकि बुढ़ापे में प्रत्येक व्यक्ति को मात्र मान और कुछ भोजन ,जो की भोग से ही काम चल जायेगा ,आवष्यकता होती है और हमारे सभी के घरों में भी सुख शांति का वातावरण बन जायेगा ,
क्योँकि वृक्ष और बुजुर्ग बुढ़ापे में फल भी नहीं देते तो छाँव अवश्य देते हैं ,इसलिए इन दोनों को कभी भी बेकार मत समझो ।

Wednesday, April 27, 2016

jara sochiye

जब ५६ भोग खाने के बाद उसका उतसर्जन विष्ठा के रूप में होता है तो यदि हम बुरी संगत ,गंदा साहित्य ,बुरी बातों ,कुविचारों का संगर्हण अपने मस्तिष्क में करेंगे तो जरा सोचिये उसका उतसर्जन किस भयानक रूप में होगा और फिर उसका परिणाम क्या होगा ।
मत भूलो उस जिंदगी को
जिसने हमेशा तुम्हारा साथ  दिया हैं
 हो सके तो भूल जाओ खुद को क्योँकि
तुमने सदा उसके साथ विश्वासघात किया है ।

Wednesday, April 20, 2016

हुश्न को बिना देखे
इबारत नहीं लिखी जाती 
और हुश्न देखने के पश्चात
ईमारत बना दी जाती है
यदि हुस्न कबीले तारीफ हो 
तो इबारत भी गजब ढाती है ,
यदि महबूब बादशाह हो तो
मुहब्ब्त ताजमहल बन जाती है ।

Tuesday, April 19, 2016

ulta pulta

यदि सभी प्रकृति पर्दत्त कार्य ,यथा  अपने सतीत्व की रक्षा करना यानि के स्त्री  बृह्मचर्य का पालन करना ,
बच्चों को जन्म देने का कार्य करना , यानि की संरचना का विस्तार ,और सम्पूर्ण परिवार की मान मर्यादा को अक्षुण्य बनाए रखना ,लाज शर्म की गठरी  बने रहना जैसे कार्य बजाय नारि के बजाय पुरुष को करने पड़ते तो ,उसका प्रभाव ब्र्म्हांड पर क्या होता ,
कोई भी व्यक्ति स्त्री से शादी ही नहीं करता ,और संसार की आबादी आज की तुलना में १% या२% ही होती ,जानते  क्योिुं ?
क्योँकि व्यक्ति ( नर ) में ना तो दर्द सहने की शक्ति ,और नहीं बृह्मचर्य पालन करने का साहस ,और नहीं नारी जैसी सहनशीलता  ,और नहीं मान मर्यादा को  अक्षुण्य बनाए रखने  साहस,और नहीं   नारी जैसी मात्र शक्ति का अतुल्य भंडार
यदि  गधे भी सिगरेट्स पिया करते ,और तम्बाकू या गुटखे  खाया करते तो 
तो फिर आदमी या ओरत ना सिगरेट पीते और नहीं तम्बाकू ,गुटखे खाया करते 
क्योँकि फिर जनता उनको भी गधा या गधी कहकर सम्बोधित किया करते इसलिए 
फिर वो ना तो धुंआ ही छल्ले  बनाकर उडाते और नाही पोीक थूककर जमीन गन्दी करते 
हे भगवन ऐसे लोगों से देश को मुक्त करा। 

Saturday, April 16, 2016

 इन्तजार में जो मजा है
वो इजहार में कहाँ
जो इजहार में मजा है
वो इकरार में कहाँ
जब इकरार ही कर दिया तो
फिर बेकरारी किस बात की
जब बेकरारी का हुआ ख़ात्मा
फिर मुहब्ब्त भी हुईं  फना ।

Tuesday, April 5, 2016

kataaksh

यदि गधों के भी सींग  होते
तो वो संसद  में बैठकर
ढीचु ढीचु के उच्च स्वर के साथ
सींगा  सींगी भी खूब खेलते

bhagy ki vidmbnaa

सम्पूर्ण कुटुंब हेतु लड़ता लड़ता
व्यक्ति तीर कमान बन जाता है
और जब परिवार का प्रत्येक व्यक्ति
अपने पैरों पर खड़ा कर दिया जाता है 
तो फिर सम्पूर्ण परिवार उस व्यक्ति को
दुलत्ती मारकर महामूर्ख बताता है
फिर वो अन्मयस्क भावों में घिरा
सांप सुंघा इंसान बन के रह जाता है ।


Saturday, March 26, 2016

ANDH BHKT

अंध  भक्त वो ही हैं
जो अंग्रेजों के जमाने में
तलुए चाटते रहे ,
 कांग्रेस के जमाने में
पत्ते चाटते रहे ,
 भाजपा के इस युग में
जूठन चाटते  रहे ,
और जिसने भी
नेक सलाह दी तो
उसे सबक सिखाते रहे ।
 

Monday, March 14, 2016

hnsee

     हंसी जब गरीबों  के ओष्ठों पर मयूर जैसी
     थिरकती है तो कुछ और ही बात होती है ,
     यौ तो अमीरों की हंसी दिन भर देखते हैं
     परन्तु वो सदैव बनावटी ही प्रतीत होती है    ,
     दो सूखी रोटियां उदरस्थ हो जाने  भर से
     जो आत्म संतुष्टि गरीब को प्राप्त होती है ,
     करोडो रुपया पानी की भांति बहाने पर भी
     किसी अमीर को कहाँ  कभी प्राप्त होती है ,
     तड़फते रहते हैं अमीर क्षणिक हंसी हेतु
    जैसे ही मिलती है तो परेशानी सामने होती है ,
    गरीब  को जब आती है तो आती ही रहती है
     सब कष्ट दर्द मिटा ओतप्रोत कर  देती  है

Wednesday, March 9, 2016

nek salah

 एक बात बोलूं ,
कभी भी किसी के साथ
पग से पग मिलाकर मत चलो
यदि वो डूबेगा तो
तुम भी बच नहीं पाओगे ,
यदि थोड़ा फासला रखोगे
तो उसे देखकर
सतर्क हो जाओगे और
डूबने से अवश्य  बच जाओगे ,

Tuesday, March 1, 2016

एक शायर की शादी के कुछ दिन बाद का ये शेर है ।
जिनके कल तक हम महबूब हुआ करते थे
आज वो हमारे महबूब बन गए हैं
वो आराम फ़रमा रहे हैं बिस्तर पे
और हम जमीं पे  शादी की इबारत लिखरहे हैं

Monday, February 22, 2016

jo doge wahi milegaa

मैंने  अपनी ख्वाइशों को ताक़ पे रखकर 
अपनी सब जमा पूंजी तुम पर खर्च कर 
मूक बनकर बैठा डाक पेड़ पर उल्लू बनकर 
बड़ा बन जाने पर तूने फर्ज निभाया अपना
हम मियाँ बीबी को वृद्धाश्रम में भेजकर ,
पर एक बात याद रखना मेरे प्यारे बेटे 
जो तूने आज हमको दिया है बदले में 
वो ही सीख रहे हैं तेरे बच्चे भी आज 
अपने प्यारे दादा दादी की हालत देखकर 
वो भी बदला देंगे तुझ  को यहाँ भेजकर ।
 

Thursday, February 11, 2016

शीर्षक हीन

तुम्हारी प्रेरणा से
जो पौधे उगे थे
अब किशोर होकर
यौवन की दहलीज पे
कदम रख चुके हैं
वो आतुर हैं
वृक्ष बनने के लिए ,
कलियों ने
अपने सौंदर्य को
स्निग्धता को
वातसलयता को
एकाग्रता को भी
समर्पित कर दिया है
उसके वक्ष स्थल के लिए ,
वृक्ष की ऊष्मा से
वो पुष्प बन गई हैं
अपनी सुगन्धि
बरसाने के लिए 
 उसने सुगंधित कर दिया
वातावरण को
सम्मान पाने के लिए |

Thursday, January 28, 2016

प्रकृति से खिलवाड़ मानव की विवशता भी है

मानव अपनी
समग्र और
अति आवश्यक
इच्छाओं की पूर्ती हेतु
पृथ्वी वा प्रकृति को
वैधव्यता प्रदान करना
उसकी विवशता है
क्योँकि कि
वो वस्तु के अभाव में
रोटी सेंक नहीं सकता
यथोचित शास्त्रार्थ
प्राप्त नहीं कर सकता
पुष्प वा फल या
अन्न ,जल को
सुंगने  या चखने से 
उदर भर नहीं सकता
लकड़ी के बिना
अट्टालिकाओं के
दरवाजे बना और
लगा नहीं सकता
फिर इन सभी के हेतु
वो कुछ भी कर सकता है
किसी का उजाड़
किसी का संहार
पर त्याग नहीं कर सकता |

Tuesday, January 19, 2016

मृत्यु

वो जब भी
जिसके निकट जाती है
उसकी अंत:स्तिथि का
अवलोकन कर
म्नस्तिथि को
वश में कर
स्वांशों की गति को
अवरुद्ध कर
बुद्धि का विनाश कर
शरीर स्तिथि को
निश्चेष्ट कर
आत्मा को
आत्मविभोर कर
तृष्णा को मिटा
क्षुधा का विलोप  कर
अर्धमूर्छित होनें का
मात्र आभास कराती है
और बड़ी शान्ति से
सर्वस्व तक
आँचल में समेट 
चुपचाप खिसक जाती  है |


प्रतीक

नैमिषारण्य में
नैसर्गिक आनंद की
अनुभूति ,
ह्रदय पटल पर
उक्रित चित्रकारी की
वक्रित लकीरें ,
मनोमालिन्य पर
सानिंध्य हेतु
उन्मादित सुगंधित समीर ,
कैनवास पर थिरकती
नृत्य करती
मुस्कुराती अधबनी तस्वीर ,
जिसकी समीपता से
सौंदर्यता से
ओतप्रोत होता प्राचीर ,
धरा को भी
सुशोभित करता
स्वेदाम्बु होता अधीर
शशि को स्पर्श  हेतु
पूर्णिमा को
प्रयासरत क्षीर नीर |