Tuesday, March 23, 2010

तारीख २३\ ३ \२०१० मंगलवार

आज हाई कोर्ट में हमारे उस केस की तारीख थी जो की प्रेम ने दिल्ली विकाश प्राधिकरण ,और उपराज्यपाल प़र डाला है की मुझे बिना सुने बी ३२२ सरस्वती विहार की कन्विंस डीड मधु चौहान के नाम में कर दी गई ,ये एक रिट है ,जिसकी अभी तक कम से कम ४ तारीख तो पद चुकी हैं और ५ वि तारीख १३ जुलाई आदरणीय जज जी .एस ,सिस्तानी जी ने दे दी है जिसमे मधु चौहान ने अपना जवाब अब से काफी समय पहले दे दिया ,और डी,डीऐ ने अभी ३ दिन पहले दिया था ,इसके बावजूद बिना किसी बात के उन्होंने मधु चौहान प़र ३००० रुपया की पेनाल्टी लगा दी ,शायद ये उस बात का परिणाम है कि एक अग्रिम जमानत कि तारीख पे जब सस्तानी साहब ने कुछ उलटा किया था तो मजबूरी में उनके सामने कोर्ट में के ,पी, को अपना मुंह खोलना पडा था ,और सस्तानी साहब कि कम्प्लेंट भी हाई कोर्ट के चीएफ़ जस्टिस से कि थी ,तो उन्होंने बिना सोचे समझे ये सब कर दिया और उन्होंने ये कन्फर्म भी किया कि क्या ये वो ही केस है जिसमे भाई भाई का कुछ मामला है ,इस तरह उन्होंने ४ माह के इन्तजार को मिनटों में निबटा दिया और फाइल आगे बढ़ा दी ,अब आप सोचिये कि अगर इसी तरह से फाइल आगे बढती रहेंगी और जज वकील कि सुनेगा नहीं तो न्याय कहाँ से मिलेगा ये मैं सब इस लिए लिख रहा हूँ कि ये सब कुछ हमारी आँखों के सामने हो रहा है ,मेरे विचारों में तो शायद ही ये कोई केस निपटाते होंगे प्रितिदीन ,लोग आते हैं चले जाते हैं वकीलों के मजे हो रहे है ,कहावत है कि अंधेर नगरी चौपट राजा ,टेक सेर भाजी टेक सेर खाजा "

Monday, March 22, 2010

तारीख २२/०३ /१०

आज सम्पूर्ण दिन एक ही विषय प़र सोचते रहे कि ,एक ही माँ बाप कि ओलाद ,एक ही कोख से जन्म लिया ,एक जैसा ही पालन पोषण हुआ एक जैसा ही प्यार मिला ,रहने सहने के लिए एक जैसा ही वातावरण ,एक जैसा ही खान पान ,एक ही स्कूल ,वो ही टीचर ,फिर भी उन तीनो भाइयों में ,बहुत बड़ा अंतर ,आखिर क्यों ? मेरी समझ में नहीं आ रहा क्योंकि एक भाई ने तो परिश्रम के बल प़र सत्यता और इमानदारी से सम्पूर्ण परिवार को पाला पोशा ,सम्मान दिलवाया ,उच्च प्रितिष्ठित समाज के लोगों से जान पहिचान भी कराई ,दान दया धर्म को कभी छोड़ा नहीं ,वहीँ प़र दूसरा भाई एक दम छाता हुआ झूट बोलने में माहिर ,सच कभी बोलता ही नहीं ,बड़े भाई से लाखों रुपया लेने के बाद भी उसका कभी पोत पूरा ही नहीं पड़ता ,काफी समझाने के बाद भी लोगों को तंग करना ,उनके मकान आदि किराए पे लेकर उनसे पैसे वसूलना ,.जिससे रुपया ले लेवे उसे वापिस नहीं करना केवल इसी फिराक में लगे रहना कि किस आदमी से कैसे पैसे वसूलने है यानी के अपने पास एक आतंक का माहोल तैयार कर लिया और लोग डरने लगे क्योंकि जो नहीं मानता उसको पुलिस आदि से परेशान करवाना या उसपर मुकद्दमा ठोक देना ,ऐसे ही कार्य करता है और अब बच्चे भी (२ बेटे )उसी कि तरह से हो गए ,सब मिलकर बनी बनाई इज्जत को ख़ाक में मिला रहे हैं ,वहीँ तीसरा भाई उसके विचारों से सहमती रखता है उसी कि तरह दान दया धर्म से उसका कोई मतलब नहीं अगर पैसे जेब में नहीं हैं तो भिकारी से भी छीन लेना ,उलटे सीधे जुगाड़ करके पैसा कमाना ही उसका भी धर्म है ,यानी तीनो भाइयों में जमीन आसमान का फर्क क्यों आ गया ,क्या ये खाली सौबत का असर है अथवा मानव के जींस का ,क्रप्या आप यदि बता सकते हैं तो मेरी समस्या का निराकरण अवश्य करें

Friday, March 19, 2010

इस दुनिया में किस प़र विश्वास करें

मैं समझता हूँ कि आज भी इस संसार में ,मैं या मेरे जैसे और भी काफी लोग होंगे जो प्रत्येक जन प़र चाहे वो अपने परिवार का हो अथवा बाहर का जो भी उनके सामीप्य में आता है उस प़र ही विश्वाश कर लेते हैं और जिस प़र भी विश्वाश करते हैं वो ही आदमी चाहे कितना ही अच्छा क्योँ ना हो हमारे जैसे लोगों के साथ विश्वासघात ही करता है अब मैं नहीं समझ पाता कि ये मेरी नियति है अथवा उनकी मजबूरी ,या चालाकी ,जब कि हमारे जैसे लोग उनके हेतु अपने बच्चों के मुंह प़र भी ताला लगाकर उनकी प्रत्येक जरुरत को पूरा करते हैं चाहे वो धन सम्बन्धी हो अथवा सामाजिक या पारिवारिक ,और कितने ही बार तो हम स्वयम देख चुके हैं कि वो हमारे सामने ही हमें बेवक़ूफ़ तक कह देते हैं ,और हमारे पास चुपचाप सुनने के अलावा कोई चारा नहीं होता ,हमारे जैसे लोगों को बेवक़ूफ़ बाहर के ही नहीं बल्कि अपने घर के वो छोटे भाई बहन जिनको कि हमने खुद आसरा देकर पाला पोसा होता है ,जो कभी हमारा आसरा पाते थे और हम ख़ुशी ख़ुशी उनके लिए हर कार्य करने को तैयार होते थे ,जो आजतक हमने अपने बच्चों को नहीं दिया वो सबकुछ उनको दिया ,उनके लिए जीवन का त्याग किया प़र फिर भी उन्होंने हमारे साथ विश्वास घात किया और हर तरह से बर्बाद करने कि कोशिश कि ,प़र आज तो मैं अपने ऐसे ही एक मित्र के कारण अत्यंत दुखी हूँ और मजबूर हूँ कि उसका नाम भी नहीं लिख सकता ,हाँ इतना जरूर कहूंगा इस तरह के २ मनुष्य मेरे जीवन आये जिनसे मैं किसी भी तरह का आदान प्रदान नहीं करना चाहता फिर भी भगवान् कि माया कि मुझे उन जैसे लोगों के मुंह लगना पड़ता है शायद ये भी मेरी मजबूरी ही समझो ,खैर अभी तो मेरी प्राथना है भगवान् जी से कि जिस संकट में आज फंसा हुआ हूँ मुझे उससे निकाले ,वरना मेरी तो जीवन भर कि म्हणत अगारत जायेगी और एक मुसीबत में अलग से फंस जाउंगा ,हे भगवान् हमारे जैसे व्यक्तिओं को सही रास्ता दिखाओ और हमारे कष्ट दूर करो

Tuesday, March 16, 2010

आज कि दिनचर्या

मुझे आज एक पुलिश विभाग के दफ्तर में सुबह उच्च अधिकारी से मिलने का समय १२ बजे निश्चित था और में वहाँ प़र सही समय प़र पहुँच गया परन्तु उच्च अधिकारी साहब शायद किसी मीटिंग में थे तो कहा गया की आने वाले हैं परन्तु वो आये शाम को ५ बजे और हमसे मिले ५ बजकर ४० मिनट प़र और वो भी जो काम हमने उनसे पूछा तो उन साहब ने १ मिनट में ही हमको यह कहकर टाल दिया की आई ,ओ अभी नहीं है वो कोर्ट गया हुआ है ,उस अधिकारी को काफी कहा की साहब हम सुबह ११ बजे के आये हुए हैं और अब शाम हो गई है कुछ तो आप बता दीजिए प़र साहब तो कुछ भी बताने को तैयार नहीं थे ,अब देखिये ये कितना अच्छा तरिका हैपुलिश विभाग का जब कि हम ३० किलो मीटर का रास्ता तय करके गए ,
इसी इन्तजार में हमको रात हो गई भूखे , प्यासे थे ही सो आज का हमने माँ शैल पुत्री का उपवास रख लिया जब कि आज मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था ,रास्ते में आते हुए भैरों मंदिर पड़ता है वहाँ भी उनके दर्शन करते चले आये ,दरअसल आज हम ई ,ओ ,डब्लू गए थे

Monday, March 15, 2010

मरघट वाले हनुमान जी ,जमुना बाजार

आज मैं जीवन में पहली बार मरघट वाले हनुमान जी के मंदिर में उनके दर्शन करने के लिए शाम को लगभग ५ बजे गया ,बड़े आराम से उनके दर्शन किये आत्मा प्रसन्न हुई ,मुझे घर से आने जाने में कोई भी किसी तरह की मानसिक परेशानी नहीं हुई बल्कि ह्रदय में एक प्रकार का उत्साह सा अनुभव हुआ जिससे की प्रतीत होता है की मैंने जो उनके दर्शन किये वो बहुत ही सम्र्ध्शाली थे जो की भविष्य में मेरे सपनो को साकार करेंगे ,अब तो बार बार उनके दर्शन करने को दिल चाहता है ,वैसे भी मैंने उनका नाम इसलिए काफी सूना है की वो सभी की मनोकामनाएं पूरी करते हैं ,आशा है की वो मेरे भी दुख दूर करके मेरी मनोकामनाएं आशातीत पूर्ण करेंगे ,

Saturday, March 13, 2010

सत्यमेव जयते लिखने से कुछ नहीं होगा

सरकारी दफ्तरों में अधिकारियों में सुधार लाने हेतु एक नया फरमान ,लिखकर लगाओ "सत्यमेवजयते"ताकि अधिकारी सत्य के मार्ग प़र चलें और सत्य बोले .काम भी खूब करें ,रिश्वत भी ना लें ,समय प़र आये जाएँ ,जनता के साथ म्रदुल व्यवहार करें ,अपने सभी कर्मों का पालन भलीभांति करें ,ये सारे कार्य आज से नहीं बल्कि जब से देश आजाद हुआ है तभी से आज तक ना जाने कितने नेताओं के जैसे की गाँधी जी ,सुभाष ,डॉ राजेन्द्र प्रसाद ,इंदिरा गांधी ,राजिव गाँधी ,स्लोगन सत्यमेव जयते ,हमें राष्ट्र की सेवा करनी है ,रिश्वत लेना और देना ,दोनों गलत हैं ,इस प्रकार सभी के फोटो और स्लोगन लिखकर लगे प़र नतीजा वोही ढाक के तीन पात ,
कल ही में एक सरकारी दफ्तर में गया ,तो वहाँ के अधिकारी अपने मोबाइल फोन प़र चिपक रहे थे ,और में आधा घंटा से वहाँ बेठा था जब भी में कूच कहना चाहता तो वो २ मिनट के लिए कह देते ,और फोन प़र पता नहीं क्या क्या झूठ पे झूठ बोले जा रहे थे ,बड़ी मुश्किल से मेरी और मुखातिब हुए और बोले बताओ क्या काम है ,मैंने अपना काम बता दिया तो बोले आज नहीं कल आ जाओ आज काम बहुत है ,मैंने कहा साहब मैं बहुत दूर से आया हूँ क्रप्या आज ही करा दीजिए आपकी मेहरबानी होगी ,अरे मेहरबानी तो आप करोगे ,चलो करता हूँ अच्छा ,सुविधा शुल्क निकालो ,मैंने कहा ये सब क्या होता है ,अरे समझा करो ,बोले देखो बोर्ड प़र क्या लिखा है ,वहाँ तो लिख रहा है किसी को भी रिश्वत ना दें इसलिए हम रिश्वत नहीं लेते प़र सुविधा तो आपको देंगे ,इसलिए सुविधा शुल्क नाम रख लिया
अच्छा कितना देना है ,चलो १० गांधी जी दे दो ,क्या मतलब ,यार मतलब नहीं जानते कमाते तो हो पेटी .और खोके ,और १० गांधी का मतलब नहीं जानते अरे भाई इसका मतलब है वो बड़े नोट जिनपे गांधी जी छपे हों ,मैंने कहा सर आप तनखा भी तो लेते हो ,हाँ हाँ क्यों नहीं प़र उसमे होता क्या है भाई रोजाना हारा थका जाता हूँ तो २ ,४ पेग भी पीने होते है और फिर मुर्गमुसल्लम भी तब कहीं सारे दिन की थकान उतरती है ,प़र सर यहाँ तो सारे दिन आप मजे से बैठे ही तो रहते हो ,हाँ हाँ क्यों नहीं एक दिन बैठकर दिकाओ तो जाने आप तो आते पीछे हो और भागने की कोशिश पहले करते हो ,फिर भाई ऊपर वाले भी हैं सन्ति से मंत्री तक पैसा भेजना पड़ता है ,इन स्लोगनों और फोटो सोतो टांगने से कुछ भी नहीं होता ,सारे काम पैसे से ही होते हैं ये तो हम टांग लेते हैं हमारे दांत तो भाई खाने के और दिखाने के और है ,तो भाई समझ गए ना इनसे यु,पी हो या हिन्दुस्तान कोई फर्क नहीं पड़ता

Tuesday, March 9, 2010

महिला बिल विधेयक

काफी हील हुज्जत और यादवों की सभाओं के विरोध (जिनमें मुलायम सिंघजी की समाजवादी पार्टी ,शरद यादव जी की जे ,दी ,यु ,और लालू यादव जी की आर ,जे डी ) ही प्रमुख विरोधी थी ,इसके बावजूद ,१८६ विपक्ष में केवल १ से राज्यसभा में बिल पास हो गया ,आज का दिन केवल महिलाओं के लिए ही नहीं अपितु पूरे देश के लिए और लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक एतिहासिक दिन था जो भारत के संविधान में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगावास्तविकता ये है कि ये सब श्रीमती सोनिया गाँधी और देश के प्रधान मंत्री श्री मनमोहन सिंह जी के अथक प्रयासों का फल है और साथ में भारतीय जनता पार्टी भी पूर्ण सहयोग के लिए धन्यवाद कि पात्र हैं

Monday, March 8, 2010

आज महिला दिवस है

आज के दिन को महिला दिवस नियुक्त करने का ओचित्य है कि हमारी देश कि महिलाओं को जागरूक किया जाए कि उनके क्या क्या अधिकार है और उन अधिकारों को प्राप्त करने के लिए उनको क्या क्या करना है यदि अपने अधिकारों कि प्राप्ति के लिए उनको संघर्ष करना है तो ख़ुशी ख़ुशी करना चाहिए चाहे वो किसी भी लेबल का हो यदि उनको समाज और सरकार से कुछ पाना है तो उन्हें संघर्ष करना पडेगा क्योंकि सदैव से ही समाज और सरकारें उनका शोषण करती आई हैं और उन्होंने महिलाओं का इतना शोषण किया है कि आज पुरुषों को लगता है कि महिलाओं का शोषण तो पुरुष का जन्म सिद्ध अधिकार है ,और महिला तो ये समझती आ रही हैं कि पुरुष जो कह रहे है हैं ,जो दे रहे हैं ,समाज जो दे रहा है ,सरकार जो देरही है वो ही सब कुछ है परन्तु ऐसा नहीं है ,आज महिलाओं को दासी स्वरूपा माना जाता है ,जब की हर क्षेत्र में पुरुषों से आगे ही हैं प़र जब भी जहां भी उनको सम्मान देने की बात आती है वहीँ प़र उनको कनखियों से देखा जाता है ,मजाक उड़ाया जाता है ,कहते हैं पद लिखकर क्या कलक्टर बनेगी ,ओरत तो घर में ही चूल्हा चौका सभालती अच्छी लगती है ऐसी बातें तो कोई भी अनपढ़ गंवार व्यक्ति ही बोल देता है ,और आज राजनीति में ३३% महिला आरक्षण की बात आई है तो तीन पार्टियां महिला बिल ही पास नहीं होने दे रही क्योंकि उनको ऐसा लगता होगा की संसद में ,विधान सभाओं में महिलाओं का वर्चस्व स्थापित ना हो जाए ,और ये तो जब है की अभी महिलाओं ने ५०%आरक्षण नहीं माँगा ,और जब इतना आरक्षण मांगेंगी तो सोचो की क्या हंगामा होगा जितना हंगामा आज हुआ है राज्यसभा में वो तो कुछ भी नहीं है ,प़र कोई बात नहीं आज नहीं तो कल तो ३३%हो ही जाएगा वैसे लोकतंत्र को जीवित रखने हेतु एक अच्छा कदम है

Sunday, March 7, 2010

आज मेरी मंझली बेटी तरुणा चौहान का जनम दिन था जिसको हम सबने घर में ही सेलिब्रेट किया क्योंकि वो बहुत खर्चालू नहीं है बस उसको यदिम खर्च करना है तो वो अधिकतर जूते और कपडे खरीदती है ,खान पान प़र भी ज्यादा जोर नहीं देती ,उसकी इच्छ बस एक मर्सिडीज गाडी लेने की है ,अब मैं उसके लिए धन एकत्रित करूंगा ,प्रत्येक जन्मदिन प़र उसकी यही डिमांड रहती है वसे मैं उसको कहता हूँ की १०,या २० रूपये तो मैंने जोड़ लिए है वैसे आएगी भी कितने की मुझे लिखकर भेजें ,धन्यवाद

Saturday, March 6, 2010

एक अजीबोगरीब घटना जो मेरे साथ घटी

शुक्रवार का दिन था मैं और मेरी बेटी मोना सारे दिन के कोर्ट कछेरी और कुछ सरकारी दफ्तरों के काम निबटाकर घर को वापिस आ रहे थे गाडी मैं खुद चला रहा था मोना मेरे बराबर वाली सीट पे बैठी थी हम लोग रिंग रोड लालकिला से होते हुए मरघट वाले हनुमान जी के मंदिर के आगे से गुजर रहे थे मैंने उनको शीश भी नवाया और हाथ भी जोड़े ,जैसे ही पुल को पार करके हम २००गज के करीब आगे गए थे तो ट्रेफिक जाम था ,मैंने भी गाडी रोक दी ,थोड़ी देर बाद ऐसा लगा की रास्ता खुल गया है तो मैंने गाडी चलानी शुरू की तो मुझे ऐसा लगा की मेरी गाडी तो तेज स्पीड से पीछे की और भाग रही है मैंने जल्दी जल्दी हैण्ड ब्रेक भी लगा दिया और फुट ब्रेक भी परन्तु गाडी रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी मैं चिल्लाने लगा की मोना गाडी से उतर कर भाग और मैं भी खुद गाडी से कूदने का प्रोग्राम बनाने लगा मुझे ऐसा लग रहा था की मेरी गाडी अब कोई जबरदस्त एक्सीडेंट करने वाली है पता नहीं क्या होगा कितनी गाड़ियां फूटेंगी कितने लोग मरेंगे ,मेरा क्या होगा मेरा लगता था की मेरा मानसिक संतुलन इतना खराब हो गया था की मैं पूरी जोर से हैण्ड ब्रेक और फुट ब्रेक को दबा रहा था प़र गाडी की स्पीड कम ही नहीं हो रही थी और मैं जोर से चिल्लाने भी लगा ,मोना मेरी और अचंभित होकर देख रही थी और कुछ बोल भी रही थी जो मुझे सुनाई ही नहीं दे रहा बस मेरे दिमांग मैं तो भयंकर एक्सीडेंट घूम रहा था और अपना भविष्य ,इस मौसम मैं भी मैं पसीनो से सराबोर था ,मुझे कुछ नहीं सूझ रहा था ,मुझे ऐसा भी लग रहा था की लोग अपनी गाड़ियां बचाकर भीम ले जा रहे ,दुसरे मैं सोच रहा था की इतनी सारी गादियौं के बीच फंसा होने के बाद भी एक्सीडेंट क्योँ नहीम हुआ लगता की बस होने वाला है ,मोना मुझसे कह रही थी गाडी कहीं भी नहींभाग रही वो तो एक ही जगह पे कड़ी है अचानक मेरी तुन्भाद्रा टूटी और मैंने स्वयम को ठीक पाया ,तब मोना ने कहा की गाडी मैं चलाती हूँ ,मैंने कहा नहीं मैं एक दम ठीक हूँ और गाडी मैं स्वयम चलाऊंगा और फिर हम घर सहीसलामत पहुँच गए ,
मुझे कुछ पता नहीं की इस घटना का समय क्या रहा होगा परन्तु मेरी बेटी ने बताया की ज्यादा से ज्यादा समय १ मिनिट का रहा होगा ,और इतनी ही देर में गाड़ियों के होर्न जोर जोर से बज रहे थे प़र मुझे कुछ भी पता नहीं था इसका मतलब है की इतनी देर तक मेरा मानसिक संतुलन सही नहीं था प़र मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा की ऐसी घटना मेरे जीवन में पहली बार हुई है क्या कभी दुसरे लोगों के साथ भी ऐसा होता होगा ये सब जान्ने के लिए मैंने काफी लोगों से संपर्क साधा तो सभी की अलग _अलग राय थी
कुछ लोगों का विचार था की ,मैं दिन भर गाडी चलाता हुआ काफी थक गया होउंगा तो नींद आ रही होगी और मैं फिर भी जबरदस्ती गाडी चला रहा हूंगा जिसकी वजह से ये सब कुछ हुआ ।
कुछ लोगों काकहना है की मैं कुछ सोचने में गंभीर होउंगा जिसके कारण दिमांग खाली की और डाइवर्ट हो गया होगा जिसके कारण मई स्वयम प़र काबू ना रख पाया और शरीर ने कार्य करना बंद कर दिया होगा ।
मैंने मरघट वाले हनुमान जी को ह्रदय से नमस्कार नहीं किया होगा या फिर कोई हनुमान जी से झूठा वायदा किया होगा जो पूरा ना किया हो ।
कुछ लोग कहते हैं की शुकर्वार का दिन था हो सकता हो की जुम्मे वाले दिन कोई पीर पैगम्बर की बरात वहाँ से जा रही हो और उन्होंने रोकने के लिए आपके साथ ऐसा किया हो ,
कुछ का कहना है की शमशान घाटों के सामने अक्सर ऐसी घटनाएं होती रहती है क्योंकि ऐसी जगह के पास से निकलते हुए हमारा दिमांग किसी और दुनिया मई चला जाता है
कुछ का कहना है किकोई भटकी आत्मा जिसका वहाँ कभी एक्सीडेंट वगेराह हो गया हो और उसी स्थान प़र आपकी गाडी कड़ी हो गई हो
कुछ लीगो का कहना है की वहाँ किसी व्यक्ति की कोई पुरानी कब्र ना हो
कोई कहता है की आपके दिन अच्छे थे वरना उस दिन तो तुम्हारा अंतिम वक्त ही आ गया था ,कोई कहता है की किसी ने उस दिन तुम्हारे ऊपर कुछ करवाया होगा जिसका वो असर था
अब आप भी मुझे मेरे ब्लॉग प़र लिखकर भेजें की आप क्या कहते है आप लोगों की बहुत मेहरबानी होगी क्रप्या मेरा मार्ग दर्शन करे

Friday, March 5, 2010

प्राताप गद के आश्रम की दुर्घटना

बाबा के आश्रम प्राताप गढ़ में श्राध्य के समय में भगदड़ मचने से जो ६३ जनों की जिनमें बच्चे बूढ़े ,स्त्रिया और जवान सम्मिलित है वो एक जून की रोटी के लिए बेचारे इस संसार से बिदा हो गए और काफी लोग कुचले भी गए जिनमे काफी लोगों की हालत खराब है ,उन सबको देखकर मेरा ह्रदय बहुत दुखी है मोर मैं सभी ब्लोगर्स से भी प्रार्थना करूंगा की वो भी उनकी आत्मा की शान्ति के लिए भगवान् जी से प्रार्थना करे

दुसरे मैं आश्रम वासियों से प्रार्थना करूंगा की वो इस प्रकार के फंक्सन नाही किया करे तो अच्छा है और यदि करें भी तो वहा प़र सुरक्षा का इंतजाम होना जरूरी है कहते है की दस हजार लोग भंडारे में थे तो गुरूजी को उनकी सुरक्षा का भी तो इंतजाम करना चाहिए था ,अब गुरूजी या देश की जनता अथवा वर्तमान सरकार ही बताये इस हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है ,मेरे विचारों में तो गुरूजी ही हैं वैसे भी पूरे जीवन में गुरूजी ने जितने पुन्य नहीं कमाए होंगे जितने की पाप आज एकत्रित हो गए

Thursday, March 4, 2010

हैदराबाद की हवाई दुर्घटना

पवन हंस हवाई जहाज जो की नेवी के बेड़े में पिछले २५ वर्ष से सम्मिलित थे ,कल जब वो हैदराबाद में अपने करतब दिखा रहे थे तो उनमे से एक में अचानक कूच गड़बड़ी होने लगी तो उसमे जो २ पाइलट थे हो सकता है उन दोनों ने जहाज को बचाने हेतु प्रयत्न करते करते स्वर्गवासी हो गए परन्तु ना तो जहाज को और नाही स्वयम को बचा पाए ,यह सब देखकर अति दुःख हुआ ,प़र सोचने का विषय ये है की जब वो जहाज इतने पुराने और बेकार हो चुके थे तो उनको बेड़े से आज से पहले ही क्यों ना हटा दिया गया था ,अगर ऐसा होता तो कम कम २ जाने तो बचाई जा सकती थी ,प़र भाई ये हिन्दुस्तान है यहाँ जब दुर्घटना हो जाती तो प्रिकोशन लिया जाता है ,उससे पहले नहीं ,आखिर हम कब जानेंगे अपने आदमियों की कीमत ,कम से कम सरकार को और नेव्वी को तो अब समझ लेना चाहिए

Monday, March 1, 2010

चित्रकूट वाले बाबा

आज चित्रकूट वाले बाबा के बारे में जो कुछ भी पदा उसे पढकर तो बाबाओं के प्रति नफरत सी पैदा हो गयी ,और ऐसा लगता है कि जैसे ये सारे बाबा भी कहीं ना कहीं उलटे टेड़े कार्यों में लिप्त हैं या होंगे क्योंकि कुछ ही समय में इन बाबाओं के पंडालों में लाखों कि भीड़ एकत्रित होने लगती है जब कि बड़े बड़े समाजसेवी और राजनेता तक भी यदि अपने आन्दोलनों के लिए भीड़ एकत्रित करनी चाहते हैं तो लाखों खर्च करने के बाद भी इतनी भीड़ एकत्रित नहीं कर पाते जब कि वो समाज के लिए भी कुछ ना कुछ कार्य अवश्य करते हैं जब कि ये बाबा जो करते है हैं वो तो हम सभी भली प्रकार जानते है और जगजाहिर है ,आये दिन इनके ऊपर स्त्रिओं भाग्त्नियों को छेड़ने के आरोप ,बलात्कार के आरोप ,स्त्रिओं को खरीद फरोक्त के आरोप ,इनके आश्रमों में ओर्तों के मरने या मारने के आरोप ,जादू टोना होने के आरोप ,जमीनी घोटालों के आरोप ,जनता को गुमराह करने के आरोप ,करोड़ों ,अरबों कि संपत्ति एकत्रित करने के आरोप ,जूते चप्पलों से ओरते के द्वारा पिटते हुए टी,वी,प़र दिखाए और लगाए जाते रहते हैं और इन चित्रकूट वाले बाबा ने तो अपने बदमाशी के गंग में ५०० के लगभग स्त्रिओं का पूरा जत्था और वो भी उनकी सप्लाई ५ स्टार होटलों तक में और एक एक रात के २०००० रूपये तक वसूले जाते हैं इस हिस्साब को अगर फैला कर देखा जाए तो बेहिसाब संपत्ति इस छोटी सी आयु में एकत्रित कर ली और प्रतिदिन लाखों स्त्री पुरुष श्रद्धा से उनके पैर छूते देखे जा सकते हैं ,इन साधू बाबाओं ने तो राजा महाराजा ,नेता राजनेता ,मंत्री और संत्री सभी को अपने से पीछे छोड़ दिया ,
आखिर हिन्दू जनता इनके भाषणों में या इनके शब्दजाल में अथवा इनके सम्मोहन में ,क्योँ और कैसे फंसती है ये कहते हैं की प्रत्येक स्त्री पुरुष को अपने जीवन में गुरु अवश्य बनाना चाहिए ,यदि जो भी व्यक्ति गुरु नहीं बनाता तो उसको सही रास्ता नहीं मिलता या उसको भगवान् से मिलाने वाला रास्ता केवल गुरु ही बता सकता है और जिसने गुरु नहीं बनाया उसको मोक्ष भी नहीं मिलता ,परन्तु वो ये नहीं बताते की गुरु कैसा होना चाहिए ,वो कहते हैं की गुरु के केवल गुण देखो अवगुण मत देखो क्योंकि गुण देखने की परख तो तुम्हारे अन्दर है परन्तु अभी तुम इतने सक्षम नहीं हो की जिसको गुरु बनाना चाहते हो उसके अवगुणों की व्याख्या कर सको ,गुरु की भर्त्सना मत करो वरना आपको महापाप लगेगा और ८४ लाख योनिओं में भी उस पाप को धो नहीं पाओगे ,जहां भी गुरु के प्रवचन हो रहे हों चाहे वो स्थान कितनी ही दूर क्योँ ना हो गुरु के दर्शन करने अवश्य जाओ ,सभी जरूरी कारू छोड़ दो ,अगर आप वहां समय पे नहीं पहुंचे और आपको ये पता है की उस जगह पे प्रवचन हो रहे हैं तो आपका बड़ा गर्क हो जाएगा ,यानी के उनके ह्रदय में एक दर पैदा कर दिया और यदि आप समय पे सभी गुरु के प्रवचनों का पान करेंगे तो आपके सभी कार्य सही समय प़र सिद्ध हो जायेंगे ,परन्तु ये सब भ्रांतियां हैं ,भोले भाली जनता को बेवक़ूफ़ बनाने का तरिका है
अब मजे की बात देखिये बाबा भी हम किनको कह रहे हैं ,इनमे बड़े बाबा तो २ या ४ ही होंगे जिनको हम बाबा भी कह सकते हैं क्योंकि वो सब अपनी उम्र से स्वास्थ्य से दुनिया दारी के चक्करों से ,कूच कुछ मोह माया से ,निचुड़ से चुके हैं क्योंकि इन्होने अपने जीवन के सभी भोग विलाश प्राप्त कर लिए ,परन्तु अधिकतर बाबा आपको २५ से ४० साल की आयु के मिलेंगे जिन्होंने ना तो ब्रह्मचारी जीवन ही और नाही गृहस्थ जीवन को पूरी तरह से निभाया है और नाही दौलत भूख इनका पीछा छोड़ रही है ,और नाही अहंकार और कामदेव इनका पीछा छोड़ रहे है खाने पीने की भगवान् की क्रपा से इनको कमी नहीं है और यदि कमी बची है तो केवल सुरा मोर सुन्दरियों की ,और सुंदरियां तो इनके पंडालोंमें आ ही जाती है और कोई ना कोई तो इनकी मीठी मीठी चुपड़ी ,लटकी झटकी बातों में आ ही सकती है वैसे भी इनको अपने पैर छुआने में मजा भी खूब आता होगा जबकि हमारे वेड शास्त्र कहते है की किसी भी स्त्री को अपने पति के सिवा और किसी के पैर नहीं छूने चाहिये प़र क्या कहे वहाँ तो मानो पैर छूने की होड़ लगी होती है और फिर दुआ और दवाई भी चाहिए तो उनको आश्रम में जाना भी पडेगा अब वहां क्या होगा वो तो खुदा ही जाने ,
और अब तो देश में इन बाबाओं की बाढ़ सी आई हुई है जो भी थोड़ा गुरु किस्म (चालाक)सा व्यक्ति है जो शब्द जालों के द्वारा जनता को फंसाना जानता है वो ही अब बाबा बनकर अपना बिजनेस शुरू कर देता है और इस क्षेत्र में आय भी इतनी ज्यादा है की इनको चेले चांटे ,पैसा कमाने के लिए पैसा लगाने वाले मुल्क के सभी कोनो खूब मिल जाते हैं अब ये सबसे कमाऊ बिजनेस गिना जाताइ है ,ये ऐसा बिजनेश है की हलद लगे ना फिटकरी रंग चोखा ,अब तो टी वी के चेनल्स प़र भी इन्ही की बाढ़ है ,अत:मेरी सरकार से प्रार्थना है की इनके हिसाब किताब मंगाकर उनकी पूरी जांच पड़ताल करे क्योंकि ये एक एक पंडाल प़र भी लाखों रूपये खर्च कर रहे ,
ये जनता का समय बर्बाद करते है ,यदि देखा जाए तो पर्यावरण भी दूषित करते है जहां इनके पंडाल लगते हैं वहा ट्रेफिक जाम हो जाता है पुलिश वालों का भी इंतजाम करना पड़ता है ये लोग देश की अर्थ व्यवस्था को भी नुक्सान पहुंचाते है क्योंकि देश का करोड़ों रुपया इनके आश्रमों में डेड मणि के रूप में पडा होता है