Wednesday, April 27, 2016

jara sochiye

जब ५६ भोग खाने के बाद उसका उतसर्जन विष्ठा के रूप में होता है तो यदि हम बुरी संगत ,गंदा साहित्य ,बुरी बातों ,कुविचारों का संगर्हण अपने मस्तिष्क में करेंगे तो जरा सोचिये उसका उतसर्जन किस भयानक रूप में होगा और फिर उसका परिणाम क्या होगा ।
मत भूलो उस जिंदगी को
जिसने हमेशा तुम्हारा साथ  दिया हैं
 हो सके तो भूल जाओ खुद को क्योँकि
तुमने सदा उसके साथ विश्वासघात किया है ।

Wednesday, April 20, 2016

हुश्न को बिना देखे
इबारत नहीं लिखी जाती 
और हुश्न देखने के पश्चात
ईमारत बना दी जाती है
यदि हुस्न कबीले तारीफ हो 
तो इबारत भी गजब ढाती है ,
यदि महबूब बादशाह हो तो
मुहब्ब्त ताजमहल बन जाती है ।

Tuesday, April 19, 2016

ulta pulta

यदि सभी प्रकृति पर्दत्त कार्य ,यथा  अपने सतीत्व की रक्षा करना यानि के स्त्री  बृह्मचर्य का पालन करना ,
बच्चों को जन्म देने का कार्य करना , यानि की संरचना का विस्तार ,और सम्पूर्ण परिवार की मान मर्यादा को अक्षुण्य बनाए रखना ,लाज शर्म की गठरी  बने रहना जैसे कार्य बजाय नारि के बजाय पुरुष को करने पड़ते तो ,उसका प्रभाव ब्र्म्हांड पर क्या होता ,
कोई भी व्यक्ति स्त्री से शादी ही नहीं करता ,और संसार की आबादी आज की तुलना में १% या२% ही होती ,जानते  क्योिुं ?
क्योँकि व्यक्ति ( नर ) में ना तो दर्द सहने की शक्ति ,और नहीं बृह्मचर्य पालन करने का साहस ,और नहीं नारी जैसी सहनशीलता  ,और नहीं मान मर्यादा को  अक्षुण्य बनाए रखने  साहस,और नहीं   नारी जैसी मात्र शक्ति का अतुल्य भंडार
यदि  गधे भी सिगरेट्स पिया करते ,और तम्बाकू या गुटखे  खाया करते तो 
तो फिर आदमी या ओरत ना सिगरेट पीते और नहीं तम्बाकू ,गुटखे खाया करते 
क्योँकि फिर जनता उनको भी गधा या गधी कहकर सम्बोधित किया करते इसलिए 
फिर वो ना तो धुंआ ही छल्ले  बनाकर उडाते और नाही पोीक थूककर जमीन गन्दी करते 
हे भगवन ऐसे लोगों से देश को मुक्त करा। 

Saturday, April 16, 2016

 इन्तजार में जो मजा है
वो इजहार में कहाँ
जो इजहार में मजा है
वो इकरार में कहाँ
जब इकरार ही कर दिया तो
फिर बेकरारी किस बात की
जब बेकरारी का हुआ ख़ात्मा
फिर मुहब्ब्त भी हुईं  फना ।

Tuesday, April 5, 2016

kataaksh

यदि गधों के भी सींग  होते
तो वो संसद  में बैठकर
ढीचु ढीचु के उच्च स्वर के साथ
सींगा  सींगी भी खूब खेलते

bhagy ki vidmbnaa

सम्पूर्ण कुटुंब हेतु लड़ता लड़ता
व्यक्ति तीर कमान बन जाता है
और जब परिवार का प्रत्येक व्यक्ति
अपने पैरों पर खड़ा कर दिया जाता है 
तो फिर सम्पूर्ण परिवार उस व्यक्ति को
दुलत्ती मारकर महामूर्ख बताता है
फिर वो अन्मयस्क भावों में घिरा
सांप सुंघा इंसान बन के रह जाता है ।