Monday, February 22, 2016

jo doge wahi milegaa

मैंने  अपनी ख्वाइशों को ताक़ पे रखकर 
अपनी सब जमा पूंजी तुम पर खर्च कर 
मूक बनकर बैठा डाक पेड़ पर उल्लू बनकर 
बड़ा बन जाने पर तूने फर्ज निभाया अपना
हम मियाँ बीबी को वृद्धाश्रम में भेजकर ,
पर एक बात याद रखना मेरे प्यारे बेटे 
जो तूने आज हमको दिया है बदले में 
वो ही सीख रहे हैं तेरे बच्चे भी आज 
अपने प्यारे दादा दादी की हालत देखकर 
वो भी बदला देंगे तुझ  को यहाँ भेजकर ।
 

Tuesday, December 22, 2015

दहेज़ रुपी लालचियों की कहानी

एक दहेज़ के लालची व्यक्ति के लड़के की शादी में लड़की वाले ने इतना ज्यादा दहेज़ दिया कि दहेज़ को देखकर लालची बाप की बोलती बंद हो गई ,और फिर समस्त दहेज़ और बहु को बिदा कराकर बरात वापिस लड़के घर चल दी ,पहला जमाना था अक्सर बारातें बैल गाडी ,रथ ,रब्बे ,और तांगों से जाती थी ,खूब मस्ती का माहौल था सभी बाराती और लड़का और लड़के के पिता बहुत खुश थे ,अचानक रस्ते में कहीं एक खांचा ( कीचड भरा रास्ता )आ गया ,सभी गाड़ियां उसमे फंस गईं, तो उस कीचड को हटाने के लिए कुछ जैसे की फावड़ा आदि की जरूरत  होती है ,परन्तु वो नहीं था तो सभी की एक मंत्रणा चल रही थी ,तभी लड़की का बाप बोला की साले ने सब कुछ दिया पर एक फावड़ा नहीं दिया ,अब सोचिये उस लड़की कि बाप को क्या पता था की बारातियों की गाड़ियां कीचड में फंसेगी ,खैर किसी तरह बाराती और दुल्हन घर व् पहुँच गई ,अब लड़की की चादर रस्ते में कहीं अटक गई होगो तो गई सीने के लिए बहु ने सुई मांगी तो सास कहती है क्या तेरे बाप के पास एक सुईं बी नहीं थी देने को ,कहने का तातपर्य है कि इतना बड़ा दहेज़ लेने की बात भी भविष्य में घर में जो भी वस्तु नहीं  होगी उस पर गालिया दी जाएंगी लड़की और लड़की के बाप को |जब गालियां ही खानी है तो इससे अच्छा है कि दहेज़ दिया ही न जाये |

Wednesday, November 4, 2015

मैं सहिष्णु हूँ

हिन्दू पूजते मंदिर मात्र
सिक्ख पूजते गुरुद्वारे
मुस्लिम जाते मस्जिद केवल
पर मैं पूजूं सब द्वारे ,
राम भी मेरे ,ईशा भी मेरे
नानक और मक्का मदीना मेरे
इन सभी के आशीष से
जीवन के क्षण  बीते सारे ,
सभी ग्रन्थ देते  उपदेश
सत्य ,अहिंसा ,प्रेम ,ईमान
गुरु ग्रन्थ साहिब हो या बाइबिल
चाहें गीता हो या कुरआन ,
पवित्र स्थलों के महत्त्व को जानो
ग्रंथों के उपदेशों को मानो
एक दूजे का रखो ध्यान
मिटाओ ना किसी का निशाँ ,
हमारी कोई जाति नहीं है
सभी की जाति है इंसान
हिंसा  के मत बनो पुजारी
ना बनो खुनी दरिंदे ,या हैवान ,
चलो मिलकर बजाएं घंटियाँ
और मिलकर लगाएं अजान
गुरुबाणी गायें गुरुदेव जी की
मधुरं मिलान  कर बने इंसान |








Monday, September 7, 2015

महानदी

स्वर्ण ,चांदी ,ताम्र ,अभरक
मिटटी ,रेत से बने पथ पर
हरित किनारी वाली साडी पहिन
इतराती इठलाती ,मचलती
नीली नीली आभा दर्शाती ,
  से सभी को अपनी शीतलता से
तृप्त कराती ,प्यास बुझाती
गाँव गाँव और शहर शहर
ऊबड़ खाबड़ जंगलों में
मंगल करती स्वयं भटकती ,
अशुद्धता को कंठ लगाती
अनमने स्वभाव  से
नृत्य करती बहे जा रही है
निरंतरता का पाठ पढ़ाती
अविरलता को ह्रदय लगाती |

Saturday, July 11, 2015

भ्र्ष्टाचार के कारण डूबती नैया

नेताओं की चिता पर
लगेंगे  हर रोज मेले
भ्र्ष्टाचार कर कर के
सम्पूर्ण देश डुबो दिया ,
बाकी जो थोड़ा बचा था
वो भी स्वाहा होने लगा
नवेले नेताओं के कारण
कर्जा  रोज बढ़ता गया  ,
जनता रोज पिसती रही
नेता पेट भरता रहा
देश कंगला हो गया
और नेता अमीर हो गया ,
कर्जदार जब मांगने लगे
नेता कुर्सी छोड़ भाग गया
कर्जदारों ने एक साथ मिलकर
देश को वाटर मेलन बना दिया

भाइयो ,वाटर मेलन चीन के इतिहास का वो काला अध्याय है ,जिसमे कर्ज में डूबे हुए चीन को कुछ देशों ने जिन्होंने चीन से कर्जा लेना था तरबूज की शेप में बाँट दिया था ,और शायद वो देश थे , अमेरिका ,फ़्रांस ,जर्मन ,ऑस्ट्रेलिया ,इंग्लैंड |


Wednesday, July 8, 2015

पत्नी

भाइयो मै ये लेख इस लिए लिख रहा हूँ क्योँकि माँ का गुणगान तो सभी लोग करते हैं परन्तु जो जीवन भर मनुष्य का साथ निभाती है उसके बारे किसी की भी लेखनी दो शब्द नहीं उगलती |
लगभग प्रत्येक मनुष्य के जीवन में
एक स्त्री भी अवश्य आती है
जिसको धर्म  पत्नी  कहा जाता है
और धर्म पत्नी का खिताब उसे
उसके अभिभावकों के द्वारा
दहेज़ स्वरूप लाखों खर्च करके
पति देव  से दिलवाया जाता है |
और शादी के बाद जिंदगी में
कभी कभार ऐसा मौका भी आता है
जब माँ ,बाप भाई बंधु रिश्तेदार
सब पति देव को छोड़ जाते हैं ,
तब एक धर्म पत्नी ही होती है
जो पति का साथ नहीं छोड़ती
स्वयं को पूर्णत:समर्पित करके
खानदान को जाज्वलित करती |
सावित्री बन पति की दीर्घायु हेतु
 ईश से व्रत, कामनाये करती
यदि परिवार को चलाने हेतु
श्रम करना पड़े तो पीछे नहीं हटती ,
पति को परमेश्वर मान करके
उसकी इच्छाओं को सर्वोपरि रख
अपनी इच्छाओं का गला घोँट
कंधे कंधा मिलाकर साथ चलती |
तो कभी कभी सीता बन करके
पति के साथ वनो में विचरण करती 
रावण जैसों के द्वारा अपहरण होने पर 
अपने पति व्रत धर्म को नहीं छोड़ती ,
वापस पति के घर आ जाने पर 
कुलच्छिनी जैसे शब्दों का भ्र्म जान 
आरोप प्रत्यारोप लगाए जाने पर 
अग्नि में कूद जीवन इति करती |
 


















Tuesday, June 23, 2015

मेरी लेखनी


मेरी लेखनी
उसी के लिए
विष वमन करती है
जिसे मैं
पसंद नहीं करता
फिर चाहे वो
मोदी जी हों
या उनके
काम करने या
बदला लेने का तरीका ,
मै केजरीवाल को भी
पसंद नहीं करता
पर उनकी ईमानदारी
और भ्र्ष्टाचार को
रोकने की प्रवर्ति की
सराहना करते हुए भी
कभी नहीं थकता 
उनकी प्रसिद्धि
दिन दूनी रात चौगुनी
बढ़ना हैं है नतीजा ,
मुझे कांग्रेस से भी
शिकवा नहीं है
पर कांग्रेस के
अहंकारी और दम्भी
बेईमान नेताओं से
सदैव ही रहा है शिकवा
आज जो कांग्रेस के
बुरे हालात हुए हैं
ये भ्र्ष्टाचारी नेताओं के
किये कर्मों का है नतीजा  |