Wednesday, February 26, 2014

किसी व्यक्ति के साथ विश्वासघात करने से तो अच्छा है क्यों ना उस व्यक्ति को विष ही दे दिया जाय ,ताकि वो व्यक्ति कम से  कम आराम से मर तो सके ,क्योंकि विश्वासघात से घायल व्यक्ति ना मर पाता है और नाही जीवन जी पाता है |

Friday, February 21, 2014

प्रतीक

नेमिषारण्य में
नैसर्गिक आनंद की
अनुभूति
ह्रदय पटल पर
उक्रित चित्रकारी की
वक्रित लकीर
मनोमालिन्य पर
सानिंध्य हेतु छाती
सुगंधित समीर
कैनवास पर थिरकती ,
नृत्य करती ,मुस्कराती
अधबनी तस्वीर
जिस्किम समीपता से
सौंदर्यता से
ओट प्रोत होता प्राचीर
धारा को भी
सुशोभित करता
स्वेदाम्बु होता अधीर
पूर्णिमा को
शशि को सपर्श
करने हेतु
प्रयासरत क्षीर नीर |


Tuesday, February 18, 2014

केजरीवाल का जहाज आखिर क्योँ डूबा ?

दिल्ली की जनता के गले में ये बात नहीं उतर रही की जो सरकार दिल्ली की जनता ने बड़ी ख़ुशी ख़ुशी केजरीवाल & पार्टी यानि की आम आदमी पार्टी को २८ सीट पर विजय श्री दिलवाई थी, और ख़ुशी ख़ुशी केजरीवाल जी को  कोंग्रेस ने अपना  समर्थन देकर आम आदमी पार्टी की सरकार बनवाई थी ,और उस वक्त केजरीवाल जी ने दिल्ली की जनता से घूम घूमकर पूछा था की सरकार बनाये या नाबनाए तो दिल्ली की ८०%जनता ने कहा की सर्कार बनाओ ये शब्द हैं खुद केजरीवाल जी के ,बस यहीं से षणयंत्र शुरू हो गया जो की भाजपा नार कोंग्रेस का सम्मिलित था ,जिसे केजरीवाल जी ने नोट नहीं किया और उन्होंने समझा की दिल्ली की ८०% जनता उनके साथ है ,यदि वो इसको नोट करके विचार करते तो केजरीवाल जी अपनी सरकार ही नहीं बनाते |
वास्तविकता ये थी की दिल्ली  की ३४% जनता ने आम आदमी पार्टी को अपना वोट दिया था और जब केजरीवाल जी ने सरकार बनाने को पूछा तो ८०% जनता ने कहा की सरकार बनाओ अब आप सोचिये की की ४६%लोग अन्य कौन थे जो सरकार बनाने को कह रहे थे ,तो भाइयो ये ही लोग भाजपा औरकोंग्रेस के थे जिनको दोनों पार्टी ने पहले ही पढ़ा दियाथा ,यदि उस समय केजरीवाल जी ये पहले ही समझ लेते की उन्हें वोट तो मात्र ३४%ने दिया है तो सरकार कैसे बना सकते हैं ,पहली गलती थी |
दूसरी गलती इनके पास कोई भी समझदार या तजुर्बेकार सलाहकार नेता नहीं था और जो सलाहकार थे वो जी हजूरी वाले ही थे और नेतागिरी के नाम पर निल थे |
जिसके पास अच्छे सलाहकार नहीं होते वो तो डूबते ही हैं चाहे व्यापारी हों या नेता |
जो इनके सपोर्टर या समर्थक कोंग्रेसी थे उनसे इन्होने न कुछ सीखा और नाही कुछ सीखना चाहा ,उनसे तो इन्होने पूछा तक नहीं |
यदयपि यदि ये पूछते भी तो वो इनको सही सलाह देते इसकी भी कोई गारंटी नहीं थी फिर भी पूछने में कोई बुराई नहीं थी |
इनके अलावा भी और बहुत से वयोवृद्ध नेता तजुर्बेकार  थे जो दिल से केजरीवाल जी के साथ थे और सलाह मश्वरा भी देना चाहते थे पर कोई उनसे पूछता तो सही |,काफी लोगो ने आपको फेसबुक पर भी लिख लिख कर भेजा पर आपने किसी को भी कोई जवाब नहीं भेजा |
कुछ आपके अंदर ये अहंकार की आप बहुत ही समझदार व्यक्ति हैं शायद भारत में आप जैसा समझदार कोई व्यक्ति है ही नहीं ,अपने साथियों को आपने कहा अहंकार मत करना पर आपके अंदर अहंकार कूट कूट कर भरा था ,ये ही वास्तविकता थी
दुसरे जिन लोगों के हाथ से आपने सत्ता छीनी वो आपको भला कैसे बख्सते ,या जो लोग आपको समर्थन दे रहे थे आपने सभी जरूरी काम छोड़कर आप उनके पीछे हाथ धोकर पद गये यानि की जिस थाली में खाना उसी में छेड़ करना ,जिस L G से आपको काम पढ़ना था आप उसे कोंग्रेस का एजेंट कह रहे हैं ,
बार बार आपने मजमे लगाने शुरू कर दिए जैसे की tel बेचने वाले या मंजन बेचने वाले लगाते हैं |
और फिर आपने एकदम ही जन  लोकपाल बिल ले आये उसे  आप पास कराना चाहते थे सोचो जिनको आप परेशान कर रहे है न वो आपको भला कैसे जनलोकपाल बिल पास काने देते |
फिर एकदम ही बिना सोचे समझे दिल्ली सरकार का त्यागपत्र ,आपने उस जनता से भी पूछना ग्वेवारा नहीं समझा जिसने आपको दिल्ली की गद्दी पर बिठाया 
शायद आप नहीं जानते जो चुनाव अंदर बैठकर लड़े जाते हैं उनका हश्र कुछ और & जो बाहर से लड़े जाते हैं उनका हश्र कुछ और ,इसलिए आप अब लोकसभा चुनाव का हश्र देखना और जनता का भी स्व्भाव देखना ,यदि हो सके तो दिल्ली की जनता को एक बार फिर अपनी बनाने की सोचो ,एक कहावत है "तेते पैर पसारिये ,जैती लम्बी सौर "
आये दिन आपके मंत्रीयौ के  जो दिल में आया बोल दिया नए नए पंगे लेने शुरू कर दिए  |कभी पुलिस से तो कभी चेनल वालों से ,
आपकी सबसे बड़ी गलती थी आपने २८ सीट होने के बावजूद अपनी सरकार बनाई आखिर क्योँ ? जबकि भाजपा ने ३२ सीट होने पर भी सरकार नहीं बनाई क्योंकि वो भली भांति जानते थे की हश्र क्यां होगा 
और आपने समर्थन भी उस पार्टी का लिया जिससे आप लड़ रहे हैं जहां करप्शन ही करप्शन है ,आप साँपों से कैसे उम्मीद करते हो की वो जहर नहीं उगलेंगे |

Friday, February 14, 2014

केजरीवाल जी का सबसे बड़ा फायदा देश को हुआ है वो है उनसे प्रेरणा लेकर आज भारत में हजारों नहीं बल्कि लाखों केजरीवाल बन गये और पैदा हो गये और पैदा होते रहेंगे और जो मशाल भर्ष्टाचार को समाप्त करने के लिए जलाई है वो कभी भी बुझेगी नहीं और आज नहीं तो कल जितने भी भ्रष्टाचारी देश में कुकुरमुत्ते कि भांति पैदा हुए या बन गये हैं ये एक दिन गधे के सर से सींग कि भांति समाप्त हो जायेंगे ,जो आज उनपर कुत्तों कि भांति भोंक रहे हैं ये सब भौकते रह जायेंगे और केजरीवाल नाम का हाथी मस्ती से घूमता निकल जाएगा और ये सब अपने बचाव के लिए कीड़ों कि भांति बिलबिलाएंगे ,भला करेंगे भगवान् |
क्या वास्तव में भाजपा के एम् एल ऐ लेबल के कुछ नेताओं को व्यवहारिक ज्ञान नहीं है और उनका बोलने का तरीका ,बातचीत करना बहुत ही असंगत और बेहूदा और अक्खड़पन लिए होता है जिसके अंदर  गालियों का पुट भी होता है ,आज १४.२ .१४ को जो दिल्ली विधान सभा में भाजपाइयों का तांडव नृत्य देखने के काबिल था जिनमे साहिब सिंह चौहान कि भाषा तो महागन्दी थी और चीखपन लिए थी ,दूसरी हर्षवर्धन जी कि जो कि पार्टी अध्यक्ष भी हैं और आदरणीय नंदकिशोर जी ने तो हद ही कर दी उन्होंने तो केजरीवाल के १ विधायक को चोर तक कह दिया और भी काफी कुछ कहा जैसे कि ऐसे तो उनकी जेब में कितने ही पड़े होते हैं ,और भी कई विधायक भाजपाई थे जो बदतमीजी से पेश आ रहे थे जिनका नाम हैम नहीं जानते इसके अलावा में पहले भी लिख चुका हूँजिनमे पूर्व अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ,जॉली जी और पूर्व मेयर ,ये सभी आज तक आम आदमी पार्टी को बुरी तरह कोसते रहे हैं ,
पर जिस भाषा का प्रयोग अभी तक ये भाजपाई जनता के बीच ,चैनलों पर और विधान सभा में बोलते रहे हैं उसका हर्जाना तो पब्लिक इनको चुनाव के समय में अवश्य देगी ,और भाजपाई शायद गलत फहमी के शिकार हैं अगली सरकार इनकी आदतों के कारण ही नहीं बन्ने वाली इन्होने ने तो आदर्शों कि धज्जियां ही उड़ा दी ,ये सबकुछ जनता देख रही है ,हकीकत तो यही है कि ये कार्यकर्ता या नेता तो नरेंद्र मोदी जी कि म्हणत पर भी पानी फेर रहे हैं |

Thursday, February 13, 2014

देश कि जनता ये जानना चाहती है कि जनरल लोकपाल बिल पास करने में भाजपा और कांग्रेस को प्रॉब्लम क्या है जबकि ये बिल तो भ्रष्टाचार के ही खिलाफ है कोई केजरीवाल जी इन दोनों पार्टीज कि ईमानदारी तो छीन नहीं रहे और नाहीं कोई इनकी प्रॉपर्टी छीन रहे फिर क्या परेशानी है जबकि भ्रष्टाचार तो कांग्रेस भी और भाजपा भी दूर करना चाहती है जब तीनो पार्टीज के मुद्दे पर समान विचार हैं तो प्रॉब्लम क्या है ,मात्र अहंकार ,या छोटा बड़ा या फिर ये दोनों पार्टी भ्रष्टाचार दूर करना ही नहीं चाहती ,मात्र दिखावा करती हैं और जनता को बेवकूफ बना रही हैं ,पर जनता है जो सबकुछ जानती है |
मित्रो क्या  आप जानते हैं कि  कल अप्रत्यक्ष रूप से दिल्ली कि केजरीवाल सरकार को गिराकर भाजपा और कोंग्रेस पार्टीज दोनों ने मिली जुली सरकार बनाकर विधान सभा में कई क़ानून भी पास कर लिए हैं और विधान सभा अध्यक्ष को भी हटा दिया है ,है ना मजे कि बात ,आपको पता भी नहीं चला और दोनों ने मिलकर अप्रत्यक्ष रूप से सरकार भी बना ली और केजरीवाल जी को भाजपा और कोंग्रेस दिल्ली परदेश अध्यक्षों ने सिन्दूर और चूड़ियाँ भी भेंट कीं ,क्योंकि वो दिल्ली सरकार को चलाने में असमर्थ रहे ,यदि अभी तक इन दोनों कि सरकार होती तो दो महीने में दिल्ली कि सभी समस्याएं खत्म कर देते जैसा कि वो पिछले १५ सालों से करते आ रहे हैं ,इन दोनों पार्टीज को इतना क्रोध आया कि उन्होंने केजरीवाल जी का माइक भी तोड़ डाला ,
पर यदि भाजपा और कांग्रेस ने मिलना ही था तो फिर पहले ही इन्होने मिलकर सरकार क्योँ नहीं बनाई ,बीच में क्योँ केजरीवाल जी को लाये जिनको राजनीति का अनुभव ही नहीं था ,बेकार में बेचारे को बेइज्जत किया ताकि दोबारा वो या कोई भो बीऊरोक्रेट राजनीति का नाम ही ना ले ,केवल नौकरी ही करता रहे ,देश कि सेवा करने का मौका तो तो देश के भ्रष्टाचारियों को ही मिलना चाहिए |