Monday, July 19, 2010

बेल की तारीख १७ जुलाई २०१०

आज बेल कि तारीख सेसन कोर्ट (संजय कुमार )की अदालत में थी ,आज कोई ख़ास काम तो नहीं हुआ ,केस को देखते ही जज ने कहा कि मिडीएशन भाइयों के केस में सफल नहीं होती वो तो महाभारत ही चाहते हैं और ऐसा ही होता भी है ,मैं भी पिछले ३ वर्षों से मिडीएशन करा रहा हूँ प़र कुछ नहीं होता ,चलो केस को मेंरीट पे लगा कर सुनवाई के लिए लगा देता हूँ ,और अगली डेट ११ ऑगस्ट मुक़र्रर कर दीं ,

Tuesday, July 13, 2010

प्रेम वाली रिट कि हाई कोर्ट में तारीख १३ जुलाई २०१०

कल हाई कोर्ट में प्रेम वाली रिट कि डेट थी ,उसमे प्रेम ने रिजोइंदरदाखिल करना था जो नहीं किया और कोर्ट ने उसे ५ हफ्ते में दाखिल करने के लिए कह दिया है ,और अगली डेट ९ सेप्टेम्बर मुकर्र कर दी ,न्यायाधीश एस ,एन अगरवाल ने हमको भी ३००० रुपया जमा करने के लिए कहा है ,जो जल्दी ही करने हैं ,

Saturday, July 10, 2010

मनी (धन ,पैसा ) की परिभाषा क्या है ?

एक प्रमुख अर्थशास्त्री ने मनी कि परिभाषा इस प्रकार कि है "मनी इज ऐ मैटर फंक्शन फॉर ,ऐ मीडियम ,ऐ मीसर , ऐ स्टेंडर्ड ,ऐ स्टोर "प़र क्या आप अब ये जानते हैं कि ये परिभाषा आज भ्रष्टाचार के युग में बदल चुकी है ,अब आज कि नयी परिभाषा ये है "मनी इज ऐ मैटर फंक्शन फाइव ,ऐ मीडियम ,ऐ मीसर ,ऐ स्टेंडर्ड ,ऐ स्टोर और ब्राइब "क्या आप उपरोक्त परिभाषा से सहमत हैं तो अपने विचार लिखें

Friday, July 9, 2010

क्या कोई अपना अनुभव बता सकता है ?

ज्यादातर बावा और स्वयम को योगी कहने वाले लोग हमेशा कहते हैं कि हे भगवान् हमको या सबको मोक्ष दे देवे क्योंकि बार बार माँ के गर्भ में ९ महीने तक रहने में बड़ा कष्ट होता है ,यद्यपि सभी लोग माँ के गर्भ से ही पैदा होते है और ९ महीने अन्दर भी रहते है ,और में भी माँ के गर्भ में ही ९ महीने रहकर आया हूँ ,प़र गर्भ में रहने के दौरान मुझे तो उस समय ऐसा कभी फील नहीं हुआ कि मुझे कोई दुःख है क्योंकि में तो उस समय शायद सुसुप्त अवस्था में था और प्रत्ये प्राणी कि भी वो ही दशा होती है जैसी कि मेरी ,
अब सवाल ये है कि क्या भारत कि जनता में क्या कोई ऐसा स्त्री या पुरुष है जिसने गर्भ में रहते हुए बाबाओं कि कथनानुसार फील किया हो यदि ऐसा हुआ है तो क्रप्या इस ब्लॉग प़र लिखे

गणेश जी कि मूर्ति

आज सुबह सुबह मेरे हाथो से सफाई करते हुए श्री गणेश जी कि मूर्ति गिर कर टूट गई ,मेरी वाइफ कहती है कि अशगुन हो गया अब देखते हैं क्या होगा ,सम्पूर्ण दिन कैसा बीतेगा ,

Wednesday, July 7, 2010

४/७/२०१० को राजा बुन्देला से मिले

हम लोग रविवार को राजा बुन्देला फिल्म एक्टर से बंगाली मार्किट में एक काफी हाउस में मिले ,हमने एक एक काफी ली ,और किसी मुद्दे प़र डिस्कस भी किया ,वो एक अच्छे और समझदार व्यक्ति हैं ,उनसे मिलकर अच्छा लगा और भविष्य में भी मिलने का वायदा किया .

Friday, July 2, 2010

आखिर इतने दिन बाद क्यों ?

सभी ब्लॉगर भाई सोच रहे होंगे कि आखिर इतने दिन तक मैं कहाँ रहा और ब्लॉगर प़र लिखना क्यों छोड़ दिया तो भाइयो मैं आपको बता दूँ मेरे अपनों ने जिनमे मेरी सोतेली माँ ,२ छोटे भाई और एक बहन जिन सब को पाल पोश कर मैंने बड़ा किया उनकी शादियाँ ,उनको बिजनेस ,उनको चुनाव आदि लड़ाकर ,नेता बना कर ,यानी के अपने पिताजी कि म्रत्यु के बाद सम्पूर्ण घर का भार उठाया और गरीबी कि रेखा से ऊपर उठाकर इस काबिल बनाया कि वो एक अच्छे समाज में बैठ सके और अच्छे आदमी बन सके का भार उठाया प़र वो बजाय अच्छे बन्ने के घटिया ही बने रहे ,उनको मैंने अपना सर्वस्व तक दे दिया ,ले देकर एक मकान और इज्जत बची थी उसको भी वो छीनने कि फिराक में लगे रहते है ,दुसरे वो चाहते हैं कि मुझे कहीं ना कहीं फंसा कर रखें ताकि मैं उन्नति ना कर सकूँ और उनका असरिया बना रहूँ इस लिए उन अपने परिवार के लोगों ने मिलकर मुझे ससुराल भेज दिया था सो मई वहाँ प़र कुछ दिन बिता कर आया हूँ दुसरे आप जानते हैं कि ससुराल कि खुमारी आसानी से उतरती नहीं इसलिए मैं आपसे भी संपर्क ना कर सका वैसे उनका इरादा अभी भी मुझे दोबारा ससुराल भेजन इ का है क्योंकि मैं अपना मकान और इज्जत उनकी भेंट चदानी नहीं चाहता प़र उन सबकी कोशिस यही है कि वो किसी भी तरह शाम दाम दंड भेद से ये घरोंदा मुझसे छीन लें ,इस बारे में मेरा एक शेर है "मेरे अपने लगे रहे सदा इसी फ़िराक में ,जलता रहूँ मैं हमेशा बाटी जले चिराग में "Show