Tuesday, April 11, 2017

lokjoktiyan

इज्जत का एक निवाला अपमान के षटरस भोजन से हजार गुना अच्छा होता है |

समझदार व्यक्ति वही होता है जो  बुरे वक्त में चुपचाप रहकर अच्छे वक्त का इन्तजार करे |

क्रोधी मनुष्य शीघ्र ही मृत्यु को प्राप्त होता है क्योँकि क्रोध उसके शरीर और आत्मा को छलनी  कर देता है |

यदि मुर्दा ज़िंदा भी हो जाए तो मात्र कफ़न फाड़ सकता है |

नारि चाहे किसी भी जाति की हो चाहे कैसी ही भी हो ,वो प्रत्येक रूप में महान होती है, क्योँकि पुरुष ही अपने लाभार्थ हेतु कोई भी रूप प्रदान करता है |

हम सभी को सुसंस्कृत बनाने और संस्कारित करने एवं सुन्दर छवि  प्रदान करने हेतु नारी ही सर्वप्रथम है |

सौतेला शब्द ही विष स्वरूप है चाहे वो किसी भी रूप में क्योँ ना हो |

सर्प पर केंचुली का ,हाथी पर जवानी का ,चांदी  पर सोने के पानी का चढ़ने का ,पीतल के बर्तन पर कलई का ,निर्धन पर धन का ,वा इंसान पर  का ,मुलम्मा चढ़ जाता है ,तो ये सब मद मस्त हो अहंकार के वशीभूत हो ये स्वयं को भी भूल जाते हैं |

विश्वास करना चाहिए जंगल में केवल जानवर का ,पूजा में पत्थर पर और धंधे यानी की व्यापार में केवल पैसे पर |

नफरत की आग में जलता हुआ मनुष्य अजगर सांप से भी खतरनाक हो जाता है |

हौसले यदि बुलंद हो तो सियार भी गाँव उजाड़ देते हैं |

दुष्ट प्रकृति का मनुष्य धन का बाहुल्य होने या ना होने दोनों ही परिस्तिथियों में अपनी दुष्टता वा धृष्टता नहीं छोड़ता
अन्यायी संझ्या में चाहे कितने ही क्यों ना हों सत्यमार्गियों से युद्ध में समूल ही नष्ट हो जाते हैं जैसे महाभारत में दुर्योधन ,यानी कौरवों का सम्पूर्ण परिवार बड़े बड़े योद्धाओं सहित होने के बावजूद ,केवल पांच पांडवों और श्री कृष्ण जी से युद्ध करके सभी मृत्यु को प्राप्त हो गए ,परन्तु पांचों पांडव और श्री कृषि पूर्ण आयु भोगकर ही स्वर्ग गामी हुए |

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