Saturday, April 15, 2017

DIL K TUKDE

मुख्यतया अभिभावक अपनी जिंदगी को टुकड़ों टुकड़ों में जीते हैं ,और जिन दिल के टुकड़ों के लिए वो ऐसी जिंदगी जीते हैं जब वो ही दिल के टुकड़े,  बुढ़ापे में अपने माँ बाप को हिकारत भरी नजर से देखते हैं और उनकी बातों को अनसुना तक कर देते हैं या अपने मित्रों से दूर रहने तक की सलाह देते हैं और उनको वो टुकड़े टुकड़े जैसी जिंदगी भी देने में खुद को असमर्थ बताते हैं तो सच मानिये उन माँ बाप को अपना जीवन दुसाध्य और कष्ट कर नजर आता है तब उनके पास आत्महत्या जैसा घिनौना कार्य करने के शिवा और कोई चारा नहीं होता ,वार्ना वो फिर रात्रि में बिस्तर में पड़े पड़े आंसूओं से उसको गीला करते रहते हैं ,और जब वो स्वर्गीय हो जाते हैं तो उनकी किर्या के नाम पर अखबारों में बड़े बड़े विज्ञापन ,फोटो सहित दिए जाते हैं और उस विज्ञापन में पूरे खानदान के नाम और श्लोक ,तक लिखे जाते हैं और वो भी मात्र इसलिए की उनकी बिरादरी ,यार  रिश्तेदारों को पता चले की वो कितने अच्छे और महान  व्यक्ति हैं और भोज आदि भी दिए जाते हैं ,बरसियाँ मनाई जाती हैं काश यदि इतना खर्चा या सेवा भाव उनके जीते जी कर लिया जाता तो शायद स्वर्ग में रहते हुए भी वो अपने दिल क टुकड़ों हेतु ईश्वर से प्रार्थना करते रहते ,पता नहीं ऐसे लोगों को भगवन कब सद्बुद्धि देगा ,हरी ॐ

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