Wednesday, April 26, 2017

aatm mnthan

पिछले ३ साल से भारतीय लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाई जा रहीं हैं परन्तु कोई ना कुछ बोल रहा है ,ना सोच रहा ,और नाहीं आत्ममंथन कर रहा है ,परन्तु अब समय आ गया है की इसपर सभी बुद्धिजीवियों को सोचने ,आत्ममंथन करने हेतु समर्पण करना पडेगा वरना तो देश एक बार फिर गुलामी ,आपातकाल की यादें ताजी कर देगा ,

No comments:

Post a Comment