Tuesday, March 21, 2017

k p uvach

शायद ये बात जवानी में अच्छी न लगे परन्तु बुढापे में अवश्य बात को याद करके रोओगे क्योँ ?
भाई ,बन्धुओं को अपना सर्वस्व और धन देने के बाद ,ब्याज के रूप में अपमान ,और मूल के रूप में दुश्मनी प्राप्त  होती है ।




यदि मनुष्य को अपने धन के बदले में ब्याज ही लेने का शौक है तो उसे चाहिए की वो अपने धन को ,गरीब ,मजलूमों ,अनाथों ,जरूरतमंदों को दान कर दे ,क्योँकि दान दिया हुआ धन ,बाद में दस गुना होकर  मिलता है और ठीक समय पर जब उसकी आपको जरूरत होती है अवश्य मिलता है ,आजमाइश करके लिखा

धनाभाव होने पर बुद्धिमान ,सशक्त ,सुन्दर मनुष्य ,की बुद्धि भी ,ह्रदय भी ,और सुंदरता एवं मान सम्मान ,सभी का ह्रास भूमि के कटाव की भांति होता रहता है ,जिसका इलाज भी असम्भव है ।

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