Wednesday, July 20, 2016

antim patr preysi ko

हम तुम जब
अंतिम बार मिले थे
तब से लेकर आज तक
ज्ञात नहीं तुम कहाँ हो
और मैं कहाँ हूँ ,
पर जो वायदा तुमसे किया था
उसे आज तक निभा   रहा हूँ
हर वक्त  तुम्हारी यादों को
ह्रदय में बसाए हुए हूँ ,
बस इतना ही नहीं
सोते वक्त भी
तुम्हारी मनमोहक छवि को
अपनी पलकों में बसाए  हुए हूँ ,
तुम्हारी कल्पना तो वफ़ा थी
मैं बेवफाई का गम उठाये हुए हूँ
कभी माफ़ नहीं करूंगा  खुद को
एक ये ही जहमत उठाये हुए हूँ
अलविदा ,

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