Sunday, May 22, 2016

mnushy dhrm na nibha paayaa

अनंतकाल
युग युगन्तरों से
कितनी ही योनियों में
परिवर्तित हो
ये मनुष्य जन्म पाया
पर मैं
मनुष्य धर्म ना
निभा पाया ,
जन्म से पूर्व
गर्भ रूपी कुंड में
जिसे अंधेर कोठरी ही कहूंगा
वेदनापूर्ण
नौ मॉस तक
जीवन बिताया ,
और अंत में
ईश्वर से याचना
करवद्ध प्रार्थना कर
 प्रभु को
अंतर्दवन्द का बखान कर
कष्टों का
व्रतांत सुना
मुक्त होनें का
प्रसाद पाया ,
शैशव बीता
किशोर अवस्था बीती
यौवन आया
अहंकार ने
मस्तक उठाया
सब कुछ भूल गया
और मनुष्य धर्म
ना निभा पाया ।


No comments:

Post a Comment