Wednesday, April 27, 2016

jara sochiye

जब ५६ भोग खाने के बाद उसका उतसर्जन विष्ठा के रूप में होता है तो यदि हम बुरी संगत ,गंदा साहित्य ,बुरी बातों ,कुविचारों का संगर्हण अपने मस्तिष्क में करेंगे तो जरा सोचिये उसका उतसर्जन किस भयानक रूप में होगा और फिर उसका परिणाम क्या होगा ।

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