Thursday, February 11, 2016

शीर्षक हीन

तुम्हारी प्रेरणा से
जो पौधे उगे थे
अब किशोर होकर
यौवन की दहलीज पे
कदम रख चुके हैं
वो आतुर हैं
वृक्ष बनने के लिए ,
कलियों ने
अपने सौंदर्य को
स्निग्धता को
वातसलयता को
एकाग्रता को भी
समर्पित कर दिया है
उसके वक्ष स्थल के लिए ,
वृक्ष की ऊष्मा से
वो पुष्प बन गई हैं
अपनी सुगन्धि
बरसाने के लिए 
 उसने सुगंधित कर दिया
वातावरण को
सम्मान पाने के लिए |

No comments:

Post a Comment