Thursday, January 28, 2016

प्रकृति से खिलवाड़ मानव की विवशता भी है

मानव अपनी
समग्र और
अति आवश्यक
इच्छाओं की पूर्ती हेतु
पृथ्वी वा प्रकृति को
वैधव्यता प्रदान करना
उसकी विवशता है
क्योँकि कि
वो वस्तु के अभाव में
रोटी सेंक नहीं सकता
यथोचित शास्त्रार्थ
प्राप्त नहीं कर सकता
पुष्प वा फल या
अन्न ,जल को
सुंगने  या चखने से 
उदर भर नहीं सकता
लकड़ी के बिना
अट्टालिकाओं के
दरवाजे बना और
लगा नहीं सकता
फिर इन सभी के हेतु
वो कुछ भी कर सकता है
किसी का उजाड़
किसी का संहार
पर त्याग नहीं कर सकता |

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