Thursday, July 9, 2015

धार्मिक उन्माद

यदि मै या आप अपने खेत में या गमले में गाजर और मूली बो देते हैं ,ऊपर वाले की कृपा से वो दो महीने में अच्छी मोटी ताजी ,खाने योग्य तैयार हो जाती हैं ,और फिर कोई बाहरी व्यक्ति ,रिश्तेदार भी उस गाजर या मूली को उखाड़कर ,धोकर साफ़ करके और चाक़ू से उसे काटकर दो हिस्सों में कर खाता चला जाता है ,तो आपको या मुझे कितना बुरा लगेगा शायद मेरे पास उसके लिए शब्द नहीं हैं ,
इसी प्रकार कोई भी माँ ,हिन्दू या मुस्लिम एक बच्चे को जन्म देती है और उसे ना जाने कितने ही जतनो या प्रयत्नो से म्हणत मजदूरी करके ,अपना पेट काटकर ,रातों को जागकर ,खुद गीले में सोकर और बच्चे को सूखे में सुलाकर यानी की बहुत से कष्ट सहने के बाद उसे पढ़ा लिखा पाल पॉश कर एक गबरू जवान बना देती है ,और फिर कुछ धर्म के कट्टर पंथी अधिकारी आकर उसका" माइंड वाश " करके झगड़ों में  झौंकने के लिए  प्रेरित कर ,धर्म के नाम पर उत्साहित कर दुसरे धर्मों को गलत करार देकर और अपने धर्म का दुश्मन बनाकर दुसरे के धर्म अनुयायिओं को काटने पीटने हेतु भेज देती है और फिर वो गबरू जवान वहाँ जाकर मारा जाता है ,तो कभी आपने सोचा है की उस माँ जिसने उसे ९ महीने अपने पेट में रख अपना एक एक बूँद खून उसको जन्म दिया और इतना बड़ा किया था उसके दिल  को कितनी चोट पहुंची होगी और ये हम सभी जानते हैं की जिसका जवान बेटा मर जाए तो उसका तो घर ही बर्बाद हो गया ,और यदि उसके पीछे उसके छोटे छोटे बहन भाई और उसके अपने बच्चे हैं जो उस पर आश्रित थे उनका क्या होइगा शायद उनकी जिंदगी तो भिखारियों से भी बदतर हो जायेगी ,और फिर कोई मभी धर्माधिकारी किसी भी धर्म का एक दो बार आकर अपनी शक्ल भी दिखाने नहीं आएगा ,मदद की बात तो बहुत दूर की बात है |
इस लिए भाइयो मै तो अंत में यही कहूँगा की इन राजनीतिज्ञ ,मतलबी ,खुद को  सर्वभोम कहने वाले साधू संतों  ,मुल्ला मोलवयों से दूरी बनाई रखने में ही भलाई है . यदि मेरे इस लेख से किसी भी हिन्दू ,मुस्लिम भाई को बुरा लगे तो वो मुझे २०० या ४०० गालियां देकर संतुष्ट हो सकते हैं ,मैंने अपनी समझ के मुतालिक जो लिखा है वो शत प्रतिशत ठीक है |

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