Tuesday, March 10, 2015

वास्तविकता

जो आपको नहीं जानते और जिनको आप भी नहीं जानते ,वास्तव में वो ही आपके हितेषी और शुभचिंतक हैं ,
क्योँकि प्रितिदिन प्रात: उठकर वो ही भगवान से ये प्रार्थना करते हैं कि "हे भगवान सबका भला करो "
जिनको आप थोड़ा बहुत जानते हो और वो भी आपको कुछ कुछ जानते हैं ,वो भी आपका भला ही चाहते हैं ,जैसे कि आप और हम ,
जो आपको भली भांति जानते हैं और आप भी उनसे पूर्णत:परिचित हैं जैसे कि आपके यार दोस्त ,रिश्तेदार संबंधी .पडोसी ,वो आपका भला  होते नहीं देख सकते और यदि भला होते मजबूरी में देख भी रहे हैं तो अंदर अंदर ही वो आपसे ईर्षा करते हैं ,
और जो आपके बिलकुल नजदीकी हैं जैसे भाई ,बहन , भाबी ,तक भी आपका  भला होते देख ,दौलत और हशरत और मान सम्मान के कारण अंदर ही अंदर आपके  दुश्मन तक बन जाते हैं और आपको नीचा दिखाने या समाज में गिराने अथवा दौलत विहीन करने के लिए एड़ी छोटी तक का जोर लगा देते हैं ,
और छोटे भाई बहन तो तभी तक आपके हैं जब तक कि आप उनकी जरूरतें पूरी करते हैं और जिस दिन आपने उनकी जरूरते पूरी ना  करने अथवा ंउनको  देना बंद कर दिया तो फिर तो वो आपके  दुश्मनों से बड़े दुश्मन बन जाते है और फिर वो इस हद तक पहुँच जाते हैं जिसके बारे में आपने कभी सोचा भी नहीं था ,चाहे आपने उन सभी को पाल पॉश कर भी बड़ा कियां हो और वो आपके तो छोडो आपके बच्चों  के भी दुश्मन बन जाते हैं 
और उनमे से कुछ तो लालच वश अपने माँ बाप ,बड़े भाई तक का मर्डर तक करने में भी नहीं हिचकते ,चाहे फिर उनको अपना सम्पूर्ण जीवन जेल में ही क्योँ न गुजारना पड़े ,
इन सबके बावजूद किसी हद तक व्यक्ति का ससुराल पक्ष ऐसा है जो अपने दामादों के साथ किसी प्रकार का लालच नहीं करता और बेटी वा दामाद का सदैव ही भला चाहता है |
नोट .......ये मेरे अपने विचार हैं और अपने तजुर्बे के कारण ही ऐसा लिख रहा नहुन यदि किसी मित्र के ह्रदय को ठेस लगे तो कृपया मुझे माफ़ कर दें |





 

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