Wednesday, November 19, 2014

कर शुक्रिया

कर शुक्रिया
जब सुबह का दीदार हो
कहीं किसी ने पिछली रात
इस दुनिया को अलविदा कहा होगा ,
कर शुक्रिया
जब दीखे माँ का चेहरा
कल किसी ने अपने खुदा को खोया होगा ,
कर शुक्रिया
जब पिता ने तुझे निकम्मा कहा
जाने कितने इस मार्ग दर्शन के बिना भटक गए ,
कर शुक्रिया 
पीने को कलश भर जल मिला
कहीं एक शिशु अधूरी चाह में अग्नि समर्पित हुआ ,
कर शुक्रिया
खड़ा है तू अपने पगों पै
जाने  कितनों ने हाथों में चप्पल पहिन जिंदगी गुजारी है ,
कर शुक्रिया
तेरी किस्मत तेरे हाथों में हैं
कहीं कोई पिता अपने बच्चों  का सिर सहलाने में असक्षम है ,
कर शुक्रिया
गुनगुना लेता है तू प्रत्येक सुर को
कोई ममता लोरी सुनाने को अश्रु बहाती है ,
कर शुक्रियाज
आज  सामना नहीं हुआ मार्ग में मौत से
आज भी जाने कितनी जिंदगियां रूठी हैं अपनों की छाँव से ,
कर शुक्रिया
हर निवाले का जिसने तुझे स्वांसें बख्शी हैं
इस रोटी के वास्ते आज एक लाजो ने अपनी आबरू गवाई है |



















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