Monday, June 23, 2014

रजनी

वो रजनी जो अपनी
कलुषता के लिए
सर्वप्रसिद्ध होते हुए भी
सभी जड़ ,चैतन्यों को
किसी ना किसी रूप में
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में
कुछ ना कुछ
अवश्य प्रदान करती है
किसी को
आनंद और अनुभूति ,
तो किसी को प्रेम
प्रकृति की संरचना हेतु
काम क्रीड़ा ,
आलिंगन और प्रेमालाप
किसी को प्रियतम से
मिलान के मीठे मीठे ख़्वाब
किसी को संध्या होते ही
प्रेयसि के साथ
पांच सितारा होटल में जा
स्वादिष्ट भोजन ,
नृत्य और शराब ,
तो किसी को
उदर पूर्ती करने हेतु
सेंधमारी ,राहगीरी करने का
असीम साहस और प्रताप ,
तो वृक्षों और लताओं को
अपना होने का आभाष
कार्बनडाई आक्साइड फेंक
शुद्ध होने का प्रयास
पशु और पक्षियों को भी
शान्ति से अपने नीड़ों में
लुक छिपकर आनंद विभोर हो
उषा होने तक
शान्ति का वेद पाठ .
पर आज तक
किसी ने भी उससे नहीं पूछा
तुम ये सब किस लिए करती हो
तुम्हें क्या चाहिए
अपना सर्वस्व देकर भी
दिन रात शांत क्यों रहती हो |

















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