Sunday, December 1, 2013

दहेज़ समस्या

आज सम्पूर्ण भारतवर्ष में दहेज़ समस्या सुरसा के मुख कि भांति दिन प्रतिदिन फैलता ही जा रहा है और ये हिंदुओं में ही नहीं अब तो मुस्लिमों में भी खूब फल फूल रहा है और ये हाल तो तब है जबकि लडकियां हाई क्वालिफाइड हो रही हैं और लड़के वहीँ केवहींहै जैसे कि वो २० वि शताब्दी में  थे और जो लडके २१ वीं शताब्दी में पहुँच गये तोवो तो कहीं भी किसी भी जाति में अपने जैसी पढ़ी लिखी लड़की देखि और शादी कर ली बिना ही दहेज़ के ,जब तक उनके पिताजी उनके लिए मोटा दहेज़ वाला बन्दा पटाते रहे तब तक बेटा शादी शुदा होकर १ बच्चे के बाप भी बन गये ,ये तो हुई हाई क्वालिफाइड लड़को कि बात ,अब समस्या आती है कि इन हाई क्वालिफाइड लड़कों ने तो अपनी मर्जी कि शादी कर ली ,फिर हाई क्वालिफाइड लड़कियों का क्या हो ,या तो वो भी इसी तरह से कहीं शादी कर लें या फिरघर में क्वारी बैठी रहें या फिर किसी थोड़े पढ़े लिखे ,खेती करने वाले या चाय अंडा बेचने वाले अथवा किसी छोटी मोटी नौकरी करने वाले से शादी कर लें ,अब वोलडकियां संकोचवश ऐसा भी नहीं कर पाती और जिस कारण से लड़कियों कि आयु जो शादीकरणे के लिए पहले १८ वर्ष थी वो बढ़कर २४ से २५ वर्ष हो गई और अब २१ वि शादी में २८ से ३२ हो गई और इसके बाद शादी का होना भी मुश्किल हो जाता है और अब तो शायद ये हालात हो जाएँ कि अधिकतर लडकियां जीवन भर क्वारी ही रह जायें | यदि ऐसा हुआ तो देश कि संरचना का ढांचा ही खराब हो जाएगा ,इसलिए इसे बचाया जाए |
तो मेरी सरकार और इस सम्पूर्ण समाज से ये ही प्रार्थना है कि वो इस समस्या के समाधान के लिए कोईऐसा क़ानून अवश्य बनाएँ ताकि दहेज़ लेने और देने वाले दोनों  को ही दोषी करार दिया जाय और जो भी दोषी मिले उसके लिए सबिधान में दंड कि व्यवस्था हो क्यों ना इसको मात्र रजिस्ट्रेसन या मंदिर में जाकर ही शादी सम्पूर्ण मानी जाए

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