Saturday, July 31, 2010

कहावतें

कांस का खेत ,सांस कीबिमारी और ठाकुर की यारी
इन तीनों से भय खाए ,महामारी -----------------
कांस एक प्रकार की घास होती है ,जो एक बार खेत में उग आये तो उस खेत से कभी जाती नहीं यानी के उस खेत में कभी भी फसल होती ही नहीं ,ये सब कुछ मैंने अपनी आँखों से देखा है ,यानी की सत्यानाश ,पूरे खेत का ,
इसी प्रकार सांस (दम )की बिमारी होती है जिसमे आदमी को सांस लेने में काफी परेशानीहै ,और आदमी को बेहाल कर देती है यानी के आदमी ना तो जी ही पाटा है और नाही मर पाता है ,यानी के आदमी के मर जाने प़र ही ये बिमारी ख़त्म होती है यानी के आदमी का सत्यानाश ,
प़र यदि किसी आदमी यारी (दोस्ती )ठाकुर साहब से हो गई तो समझ लो कि उसका भी सवा सत्यानाश क्योंकि जब तक आप उनके काम आते रहोगे तब तक तो ठीक है और यदि कभी आपको उनसे कोई काम पद गया तो समझ लो कि आपका उनसे नाता ही समाप्त आपको किसी भी मुसीबत में पडा देख ठाकुर साहब भाग लेंगे आपके काम आने वाले नहिः है ,मैं ऐसा इस लिए लिख रहा हूँ क्योंकि मैं खुद भी भुक्त भोगी हूँ ,और बिरादरी से भी ठाकुर हूँ ,दुसरे जिन लोगों ने ये कहावत बनाई होगी वो शत प्रतिशत सही है ,क्रप्या ख्याल रखें ,
इसी लिए अंत में लिखा है कि महामारी कि बिमारी भी इन तीनो से कम खतरनाक है ,बिमारी से आप वफ़ा कि उम्मीद कर सकते हैं प़र इनसे नहीं ,इन तीनो से तो महामारी भी भय खाती है

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