Saturday, March 6, 2010

एक अजीबोगरीब घटना जो मेरे साथ घटी

शुक्रवार का दिन था मैं और मेरी बेटी मोना सारे दिन के कोर्ट कछेरी और कुछ सरकारी दफ्तरों के काम निबटाकर घर को वापिस आ रहे थे गाडी मैं खुद चला रहा था मोना मेरे बराबर वाली सीट पे बैठी थी हम लोग रिंग रोड लालकिला से होते हुए मरघट वाले हनुमान जी के मंदिर के आगे से गुजर रहे थे मैंने उनको शीश भी नवाया और हाथ भी जोड़े ,जैसे ही पुल को पार करके हम २००गज के करीब आगे गए थे तो ट्रेफिक जाम था ,मैंने भी गाडी रोक दी ,थोड़ी देर बाद ऐसा लगा की रास्ता खुल गया है तो मैंने गाडी चलानी शुरू की तो मुझे ऐसा लगा की मेरी गाडी तो तेज स्पीड से पीछे की और भाग रही है मैंने जल्दी जल्दी हैण्ड ब्रेक भी लगा दिया और फुट ब्रेक भी परन्तु गाडी रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी मैं चिल्लाने लगा की मोना गाडी से उतर कर भाग और मैं भी खुद गाडी से कूदने का प्रोग्राम बनाने लगा मुझे ऐसा लग रहा था की मेरी गाडी अब कोई जबरदस्त एक्सीडेंट करने वाली है पता नहीं क्या होगा कितनी गाड़ियां फूटेंगी कितने लोग मरेंगे ,मेरा क्या होगा मेरा लगता था की मेरा मानसिक संतुलन इतना खराब हो गया था की मैं पूरी जोर से हैण्ड ब्रेक और फुट ब्रेक को दबा रहा था प़र गाडी की स्पीड कम ही नहीं हो रही थी और मैं जोर से चिल्लाने भी लगा ,मोना मेरी और अचंभित होकर देख रही थी और कुछ बोल भी रही थी जो मुझे सुनाई ही नहीं दे रहा बस मेरे दिमांग मैं तो भयंकर एक्सीडेंट घूम रहा था और अपना भविष्य ,इस मौसम मैं भी मैं पसीनो से सराबोर था ,मुझे कुछ नहीं सूझ रहा था ,मुझे ऐसा भी लग रहा था की लोग अपनी गाड़ियां बचाकर भीम ले जा रहे ,दुसरे मैं सोच रहा था की इतनी सारी गादियौं के बीच फंसा होने के बाद भी एक्सीडेंट क्योँ नहीम हुआ लगता की बस होने वाला है ,मोना मुझसे कह रही थी गाडी कहीं भी नहींभाग रही वो तो एक ही जगह पे कड़ी है अचानक मेरी तुन्भाद्रा टूटी और मैंने स्वयम को ठीक पाया ,तब मोना ने कहा की गाडी मैं चलाती हूँ ,मैंने कहा नहीं मैं एक दम ठीक हूँ और गाडी मैं स्वयम चलाऊंगा और फिर हम घर सहीसलामत पहुँच गए ,
मुझे कुछ पता नहीं की इस घटना का समय क्या रहा होगा परन्तु मेरी बेटी ने बताया की ज्यादा से ज्यादा समय १ मिनिट का रहा होगा ,और इतनी ही देर में गाड़ियों के होर्न जोर जोर से बज रहे थे प़र मुझे कुछ भी पता नहीं था इसका मतलब है की इतनी देर तक मेरा मानसिक संतुलन सही नहीं था प़र मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा की ऐसी घटना मेरे जीवन में पहली बार हुई है क्या कभी दुसरे लोगों के साथ भी ऐसा होता होगा ये सब जान्ने के लिए मैंने काफी लोगों से संपर्क साधा तो सभी की अलग _अलग राय थी
कुछ लोगों का विचार था की ,मैं दिन भर गाडी चलाता हुआ काफी थक गया होउंगा तो नींद आ रही होगी और मैं फिर भी जबरदस्ती गाडी चला रहा हूंगा जिसकी वजह से ये सब कुछ हुआ ।
कुछ लोगों काकहना है की मैं कुछ सोचने में गंभीर होउंगा जिसके कारण दिमांग खाली की और डाइवर्ट हो गया होगा जिसके कारण मई स्वयम प़र काबू ना रख पाया और शरीर ने कार्य करना बंद कर दिया होगा ।
मैंने मरघट वाले हनुमान जी को ह्रदय से नमस्कार नहीं किया होगा या फिर कोई हनुमान जी से झूठा वायदा किया होगा जो पूरा ना किया हो ।
कुछ लोग कहते हैं की शुकर्वार का दिन था हो सकता हो की जुम्मे वाले दिन कोई पीर पैगम्बर की बरात वहाँ से जा रही हो और उन्होंने रोकने के लिए आपके साथ ऐसा किया हो ,
कुछ का कहना है की शमशान घाटों के सामने अक्सर ऐसी घटनाएं होती रहती है क्योंकि ऐसी जगह के पास से निकलते हुए हमारा दिमांग किसी और दुनिया मई चला जाता है
कुछ का कहना है किकोई भटकी आत्मा जिसका वहाँ कभी एक्सीडेंट वगेराह हो गया हो और उसी स्थान प़र आपकी गाडी कड़ी हो गई हो
कुछ लीगो का कहना है की वहाँ किसी व्यक्ति की कोई पुरानी कब्र ना हो
कोई कहता है की आपके दिन अच्छे थे वरना उस दिन तो तुम्हारा अंतिम वक्त ही आ गया था ,कोई कहता है की किसी ने उस दिन तुम्हारे ऊपर कुछ करवाया होगा जिसका वो असर था
अब आप भी मुझे मेरे ब्लॉग प़र लिखकर भेजें की आप क्या कहते है आप लोगों की बहुत मेहरबानी होगी क्रप्या मेरा मार्ग दर्शन करे

No comments:

Post a Comment